LokVox

दुनियाअफ़्रीका

शकाहोला में 191 मौतें: केन्या की अदालत ने पंथ प्रमुख पॉल मैकेंज़ी और 28 अन्य को दोषी ठहराया

मोम्बासा हाईकोर्ट ने यह बचाव ठुकरा दिया कि लगभग सभी बच्चे पीड़ितों ने अपनी मर्ज़ी से भूखे रहकर जान दी। सज़ा 6 नवंबर को सुनाई जाएगी।

संपादकीय डेस्क से · मोम्बासाप्रकाशित
किलिफ़ी काउंटी का शाकाहोला और मोम्बासा की अदालत (फ़ाइल फ़ोटो)
किलिफ़ी काउंटी का शाकाहोला और मोम्बासा की अदालत (फ़ाइल फ़ोटो)Photos: Mmaua1 / Wikimedia Commons; Zahra Abdulmajid / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0, CC BY-SA 3.0

मुख्य बातें

  1. शकाहोला जंगल में 191 मौतों के मामले में पॉल मैकेंज़ी और 28 सह-आरोपी हत्या के दोषी पाए गए।
  2. जस्टिस डायना कावेद्ज़ा-मोचाचे ने यह दलील ख़ारिज की कि पीड़ितों ने स्वेच्छा से उपवास कर जान दी।
  3. सज़ा 6 नवंबर को सुनाई जाएगी; मैकेंज़ी पर आतंकवाद और गैर-इरादतन हत्या के अलग आरोप बाकी हैं।

केन्या की एक अदालत ने सोमवार को प्रचारक पॉल मैकेंज़ी और उसके 28 अनुयायियों को मालिंदी के पास शकाहोला जंगल में भूख से मरे 191 लोगों की हत्या का दोषी ठहराया। मरने वालों में लगभग सभी बच्चे थे।

मोम्बासा हाईकोर्ट की जस्टिस डायना कावेद्ज़ा-मोचाचे ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने सभी 29 आरोपियों के ख़िलाफ़ अपना मामला साबित कर दिया है। उन्होंने बचाव पक्ष की मुख्य दलील ठुकरा दी। उन्होंने कहा, “मैं आरोपियों की यह दलील ख़ारिज करती हूं कि पीड़ित, जो सभी 16 साल से कम उम्र के थे, स्वेच्छा से उपवास करते हुए मरे।”

गुड न्यूज़ इंटरनेशनल चर्च चलाने वाले मैकेंज़ी और उसके सह-आरोपियों ने 2024 में हत्या के 191 आरोपों से इनकार किया था। अभियोजन पक्ष ने “मौत के एक सुनियोजित क्रम” की बात कही, जिसमें यीशु से मिलने का वादा करके पहले बच्चों, फिर किशोरों, महिलाओं और आख़िर में पुरुषों से उपवास कराया गया। बचाव पक्ष का कहना था कि मामला “परिस्थितिजन्य सबूतों, सुनी-सुनाई बातों और अनिर्णायक फ़ोरेंसिक नतीजों” पर टिका है।

सज़ा 6 नवंबर को सुनाई जाएगी। मैकेंज़ी पर आतंकवाद और गैर-इरादतन हत्या के अलग आरोप भी हैं, जिनसे उसने इनकार किया है। इसके अलावा बच्चों से क्रूरता, यातना और शिक्षा से वंचित करने के मामले भी चल रहे हैं।

मामला मार्च 2023 में सामने आया, जब एक व्यक्ति ने पुलिस को बताया कि एक नए चर्च से जुड़े उसके रिश्तेदार घर नहीं लौटे। तलाशी में सैकड़ों उथली कब्रें मिलीं और आख़िरकार 446 शव निकाले गए। मालिंदी के मुर्दाघर में रखे 443 शवों और अवशेषों में से सिर्फ़ 34 की डीएनए से पहचान हो पाई है।

एक लोकपाल जांच में पाया गया कि अधिकारियों ने 2021 से 2023 के बीच मैकेंज़ी को लेकर मिली चेतावनियों को अनदेखा किया, और इन मौतों को रोका जा सकता था। धार्मिक संगठनों पर नियंत्रण कड़ा करने वाले विधेयक के मसौदे को कैबिनेट ने जुलाई 2025 में मंज़ूरी दी थी, लेकिन पादरियों की आपत्तियों के बाद वह अटका पड़ा है।