दुनियादक्षिण एशिया
आईएमएफ से नए समझौते का रास्ता खुला, बोले श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके
मौजूदा बेलआउट के करीब छह महीने बचे हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि कोई भी नया कार्यक्रम विकास को प्राथमिकता देगा, और चेताया कि पश्चिम एशिया के युद्ध से इस साल ईंधन आयात का बिल करीब 6 अरब डॉलर तक जा सकता है।

मुख्य बातें
- राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने कहा कि श्रीलंका ने आईएमएफ के एक और कार्यक्रम से इनकार नहीं किया है।
- कोई भी नया समझौता विकास को प्राथमिकता देगा और अब तक हासिल स्थिरता को बचाए रखेगा।
- 2026 में ईंधन आयात पर खर्च करीब 6 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो 2025 में करीब 4.4 अरब डॉलर था।
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने सोमवार को कहा कि मौजूदा बेलआउट खत्म होने के बाद देश ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के एक और कार्यक्रम से इनकार नहीं किया है, लेकिन कोई भी नया समझौता आर्थिक विकास को केंद्र में रखकर ही होगा।
सीलोन चैंबर ऑफ़ कॉमर्स की एक चर्चा में दिसानायके ने कहा कि सरकार ने अभी अंतिम फ़ैसला नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने न तो आईएमएफ से पूरी तरह अलग होने का फ़ैसला किया है और न ही नए कार्यक्रम के लिए हामी भरी है, और मौजूदा व्यवस्था के बचे करीब छह महीनों में वह अपने विकल्प तौलेगी।
स्थिरता के बाद विकास
राष्ट्रपति ने कहा कि श्रीलंका ने स्थिरता बहाल करने में काफ़ी प्रगति की है, लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार को अभी सरकार के चाहे स्तर तक पहुंचना है और देश की क्रेडिट साख में और सुधार की ज़रूरत है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार नया समझौता करती है तो वह विकास पर केंद्रित होगा और अब तक हासिल स्थिरता की रक्षा करेगा, और ऐसा तभी होगा जब आईएमएफ उन लक्ष्यों के अनुकूल शर्तों पर सहमत हो। वित्त मंत्रालय और सेंट्रल बैंक के वरिष्ठ अधिकारी इस पर चर्चा कर रहे हैं कि ऐसा कार्यक्रम कैसा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि अंतिम फ़ैसला अर्थव्यवस्था की स्थिति, विदेशी मुद्रा भंडार की मज़बूती और बाहरी झटकों के आकार पर निर्भर करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के लक्ष्यों और आईएमएफ प्रतिबद्धताओं के बीच टकराव अपेक्षाकृत कम रहे, जिससे कार्यक्रम बिना बड़े मतभेद के चलता रहा।
पश्चिम एशिया के युद्ध की कीमत
दिसानायके ने ऐसे ही एक झटके की ओर इशारा किया जो पहले से जारी है। उन्होंने चेताया कि अगर मौजूदा रुझान जारी रहा तो 2026 में श्रीलंका का ईंधन आयात खर्च करीब 6 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जबकि 2025 में यह करीब 4.4 अरब डॉलर था। उन्होंने इसके लिए पश्चिम एशिया के संघर्ष को ज़िम्मेदार बताया।