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बीबीसी मुकदमे में ट्रंप को 11 दिसंबर तक बयान दर्ज कराने का आदेश

बीबीसी के वकीलों ने अदालत को बताया कि ट्रंप ने तय बयान रद्द कर जॉर्जिया में चुनाव प्रचार किया। पेश न होने पर उन पर प्रतिबंध लग सकते हैं, जिसमें 10 अरब डॉलर का मुकदमा खारिज होना भी शामिल है।

संपादकीय डेस्क से · वॉशिंगटनप्रकाशित
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और लंदन में बीबीसी का ब्रॉडकास्टिंग हाउस (फाइल फोटो) (फ़ाइल फ़ोटो)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और लंदन में बीबीसी का ब्रॉडकास्टिंग हाउस (फाइल फोटो) (फ़ाइल फ़ोटो)Photos: Shealeah Craighead / Wikimedia Commons; No Swan So Fine / Wikimedia Commons, Public domain, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. अमेरिका की एक मजिस्ट्रेट जज ने ट्रंप को 11 दिसंबर तक शपथ पर बयान (डिपोजिशन) देने का आदेश दिया।
  2. ट्रंप ने 6 जनवरी 2021 के अपने भाषण की एडिटिंग को लेकर बीबीसी पर 10 अरब डॉलर का मुकदमा किया है।
  3. आदेश न मानने पर मुकदमा खारिज होने समेत प्रतिबंध लग सकते हैं।

अमेरिका की एक संघीय अदालत ने गुरुवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बीबीसी के खिलाफ उनके 10 अरब डॉलर के मानहानि मुकदमे में 11 दिसंबर तक शपथ पर बयान (डिपोजिशन) देने का आदेश दिया। बीबीसी के वकीलों ने आरोप लगाया था कि ट्रंप पेशी टाल रहे हैं।

यह समयसीमा अमेरिकी मजिस्ट्रेट जज एनजोलीक लेट ने तय की। अगर सबूत जुटाने (डिस्कवरी) की अवधि, जो अभी 18 दिसंबर को खत्म होनी है, नहीं बढ़ाई जाती और ट्रंप आदेश नहीं मानते, तो उन पर प्रतिबंध लग सकते हैं, जिसमें मुकदमा खारिज होना भी शामिल है।

बीबीसी के वकील चार्ल्स टोबिन ने अदालत से कहा कि डिस्कवरी के दो महीने बचे हैं और “हम अब तक वादी का बयान नहीं ले पाए हैं”। उन्होंने बताया कि ट्रंप 16 अक्टूबर को बयान देने पर राजी हुए थे, लेकिन “राष्ट्रीय महत्व के मामले” का हवाला देकर उसे रद्द कर दिया। टोबिन के मुताबिक उस दिन ट्रंप जॉर्जिया में प्रचार कर रहे थे, जहां उन्होंने डाल्टन में सीनेट उम्मीदवार माइक कॉलिन्स के साथ रैली की।

टोबिन ने कहा, “वे दलगत राजनीति में हिस्सा ले रहे थे और उन्होंने इसे बयान देने से ज्यादा अहमियत दी।”

ट्रंप ने दिसंबर 2025 में बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री “ट्रंप: अ सेकंड चांस” को लेकर मानहानि और भ्रामक व अनुचित व्यापारिक तरीकों का आरोप लगाते हुए यह मुकदमा दायर किया था। 33 पन्नों की शिकायत में कार्यक्रम को “राष्ट्रपति ट्रंप का झूठा, मानहानिकारक, भ्रामक, अपमानजनक, भड़काऊ और दुर्भावनापूर्ण चित्रण” और 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में “दखल देने और उसे प्रभावित करने की बेशर्म कोशिश” बताया गया है।

बीबीसी मान चुका है कि उसने 6 जनवरी 2021 के ट्रंप के भाषण के कुछ हिस्सों को इस तरह एडिट किया कि लगे वे अमेरिकी संसद भवन (कैपिटल) पर हिंसा के लिए उकसा रहे हैं। उसने माफी मांगी और इस मामले में दो वरिष्ठ अधिकारियों ने इस्तीफा दिया, लेकिन बीबीसी मानहानि से इनकार करता है।

यह आदेश मध्यावधि चुनावों से दो हफ्ते से भी कम पहले आया है, जिनमें ट्रंप देश भर में रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे हैं।