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जियो इश्यू के डॉलर से रुपया 53 पैसे उछलकर छह हफ्ते के ऊंचे स्तर 94.38 पर

जियो प्लेटफॉर्म्स के इश्यू के लिए आ रहे विदेशी पैसे और तेल कंपनियों की डॉलर खरीद पर आरबीआई के कदम से रुपया मज़बूत हुआ, हालांकि 110 डॉलर से ऊपर के ब्रेंट ने बढ़त सीमित रखी।

संपादकीय डेस्क से · मुंबईप्रकाशित

मुख्य बातें

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया 53 पैसे मज़बूत होकर 94.38 पर बंद हुआ, सितंबर की शुरुआत के बाद सबसे अच्छा स्तर।
  2. विश्लेषकों के मुताबिक जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ के विदेशी बोलीदाताओं के डॉलर से यह तेज़ी आई।
  3. विश्लेषकों को अगले सत्रों में 94.20-94.80 के दायरे की उम्मीद है, कच्चा तेल सबसे बड़ा जोखिम।

जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर इश्यू में बोली लगाने के लिए विदेशी निवेशकों के पैसा लाने से बुधवार को रुपया छह हफ्ते के सबसे मज़बूत स्तर पर बंद हुआ। डॉलर के मुकाबले यह 53 पैसे चढ़कर 94.38 पर पहुंचा।

सोमवार को 94.91 पर बंद हुआ रुपया बुधवार को 94.78 पर खुला और दिन में 94.35 से 94.82 के बीच रहा। यह 4 सितंबर के बाद का सबसे अच्छा बंद स्तर है। दशहरे के कारण मंगलवार को विदेशी मुद्रा बाज़ार बंद था।

विश्लेषकों ने कहा कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने भी दखल दिया। लेमन के रिसर्च प्रमुख गौरव गर्ग ने कहा कि केंद्रीय बैंक ने तेल कंपनियों की हाजिर बाज़ार में डॉलर की मांग घटाने और ज़रूरत से ज़्यादा उतार-चढ़ाव संभालने के लिए कदम उठाए। उन्होंने कहा, “बड़े आईपीओ में हिस्सा लेने वाले विदेशी निवेशक आम तौर पर रुपये लेने के लिए डॉलर बेचते हैं।”

देश का सबसे बड़ा, ₹30,213 करोड़ का जियो प्लेटफॉर्म्स इश्यू बुधवार को खुलने के 100 मिनट के भीतर पूरा सब्सक्राइब हो गया। यह शुक्रवार को बंद होगा।

मिरे एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी ने कहा, “आईपीओ से जुड़े विदेशी निवेश और अपेक्षाकृत कमज़ोर अमेरिकी डॉलर के चलते रुपया छह हफ्ते के ऊंचे स्तर पर पहुंचा।” उन्हें रुपये के 94.20 से 94.80 के बीच रहने की उम्मीद है।

यह बढ़त कमज़ोर शेयर बाज़ार और महंगे तेल के बावजूद आई। भारतीय कारोबारी घंटों में ब्रेंट क्रूड वायदा 1.99% बढ़कर 110.96 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा और सेंसेक्स 143.21 अंक गिरा। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने दिन में ₹1,022.32 करोड़ के शेयर खरीदे।

गर्ग ने आगाह किया कि पश्चिम एशिया में तनाव के बीच ब्रेंट 110 डॉलर से ऊपर है, ऐसे में यह सुधार टिकाए रखना मुश्किल होगा। उनके मुताबिक यह आईपीओ से आने वाले पैसे, आरबीआई, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश और डॉलर पर निर्भर करेगा।