नीतिगृह मामले
शौर्य दीवार पर 154 नए नाम, अमित शाह ने 36,852 शहीद पुलिसकर्मियों को किया नमन
पुलिस स्मृति दिवस पर गृह मंत्री ने 1959 के हॉट स्प्रिंग्स हमले को याद किया और कहा कि केंद्रीय बलों ने बंगाल का चुनाव बिना एक भी मौत के कराया।

मुख्य बातें
- अमित शाह ने आज़ादी के बाद से ड्यूटी पर शहीद हुए 36,852 पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी।
- इस साल स्मारक में 154 नाम जोड़े गए, जिन्हें खुफिया ब्यूरो के निदेशक ने पढ़कर सुनाया।
- शाह ने कहा कि केंद्रीय बलों ने बंगाल विधानसभा चुनाव बिना एक भी जान गंवाए कराए।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को आज़ादी के बाद से ड्यूटी पर शहीद हुए 36,852 पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी। नई दिल्ली के राष्ट्रीय पुलिस स्मारक की शौर्य दीवार पर इस साल 154 और नाम जोड़े गए।
पुलिस स्मृति दिवस के कार्यक्रम में इस साल के शहीदों के नाम खुफिया ब्यूरो (आईबी) के निदेशक ने पढ़कर सुनाए। इसके बाद शाह ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और दिल्ली पुलिस की संयुक्त परेड की सलामी ली और चाणक्यपुरी स्थित स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किया।
शाह ने कहा, “इस साल 154 और बहादुर जवान इस सूची में जुड़ गए हैं। मैं हाथ जोड़कर इन शहीदों को नमन करता हूं।”
उन्होंने 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र को समर्पित इस स्मारक को तीर्थस्थल बताया। उन्होंने कहा, “यह स्थान देशभर के नागरिकों के लिए तीर्थ बन गया है।”
हॉट स्प्रिंग्स की याद
यह दिन 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में हुए हमले की याद में मनाया जाता है, जब चीनी सैनिकों के हमले में सीआरपीएफ के दस जवान शहीद हुए थे। शाह ने कहा कि लड़ाई शुरू होने के बाद जवान नतीजा जानते थे, फिर भी वे इस संकल्प पर डटे रहे कि “हमारी एक इंच ज़मीन भी विदेशी हाथों में न जाए।”
उन्होंने पुलिस की नौकरी की कठिनाइयों पर विस्तार से बात की। उनके मुताबिक, सरकारी सेवा के सभी रूपों में “सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण, बिना किसी संदेह के, पुलिस बल की सेवा है।” जब बाकी परिवार रक्षाबंधन, होली, दिवाली और ईद साथ मनाते हैं, तब पुलिसकर्मी पहरा देते हैं और लंबे समय तक घर से दूर रहते हैं, जिसे उन्होंने “सेवा का सचमुच गहरा रूप” बताया।
उन्होंने कहा, “घर से दूर रहकर भी वे हमेशा मुस्तैद रहते हैं, चाहे चुनाव हों, त्योहार हों या सार्वजनिक प्रदर्शन।”
बंगाल चुनाव का श्रेय
शाह ने सीमाओं की सुरक्षा और चुनाव कराने में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की भूमिका की खास तौर पर सराहना की और कहा कि उनके बिना लोकतंत्र की रक्षा की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने पश्चिम बंगाल का ज़िक्र किया, जहां पहले चुनावों में जानलेवा हिंसा होती रही है, और कहा कि बलों ने “बंगाल विधानसभा चुनाव बिना एक भी जान गंवाए कराने में उल्लेखनीय सफलता” हासिल की।
उन्होंने कहा, “अब यह व्यापक रूप से माना जा रहा है कि पूरा देश चुनावी हिंसा से मुक्त हो गया है।”
आगे क्या
शाह ने पुलिस बलों से अगले तीन साल जुटे रहकर 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने का आग्रह भी किया। स्मृति कार्यक्रम पूरे हफ्ते चलेंगे। 22 से 30 अक्टूबर तक केंद्रीय बल और पुलिस संगठन स्मारक पर शहीदों के परिवारों की यात्रा, बैंड प्रदर्शन, शहीदों के लिए दौड़ और रक्तदान शिविर जैसे कार्यक्रम करेंगे, और राज्यों की पुलिस भी ऐसे ही आयोजन करेगी। शाह ने करीब 90 पुलिस सवारों की जिस मोटरसाइकिल रैली को हरी झंडी दिखाई, वह 31 अक्टूबर की एकता परेड के लिए गुजरात के एकता नगर जा रही है।