नीतिगृह मामले
राष्ट्रीय एकता दिवस पर एकता नगर में 25,000 लोग, नक्सल प्रभावित ज़िलों से 5,000
गृह सचिव गोविंद मोहन ने कहा कि 31 अक्टूबर का आयोजन वामपंथी उग्रवाद के अंत का प्रतीक होगा और नशामुक्त भारत इसका मुख्य संदेश रहेगा।

मुख्य बातें
- 31 अक्टूबर को एकता नगर में 25,000 लोगों की व्यवस्था हो रही है, जबकि पहले 1,500 से 2,000 लोग आते थे।
- वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित 126 ज़िलों से करीब 5,000 प्रतिभागी आने की उम्मीद है।
- गोविंद मोहन ने कहा कि यह दिवस गणतंत्र दिवस से होड़ के लिए नहीं है।
केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने बुधवार को बताया कि 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस पर गुजरात के एकता नगर में करीब 25,000 लोगों के आने की उम्मीद है। इनमें लगभग 5,000 लोग वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित ज़िलों से होंगे।
नई दिल्ली में एक सम्मेलन में मोहन ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर इस साल का आयोजन वामपंथी उग्रवाद के अंत का प्रतीक होगा, हालांकि मुख्य विषय राष्ट्रीय एकता ही रहेगा।
आयोजन का दायरा तेज़ी से बढ़ रहा है। मोहन ने कहा कि 25,000 लोगों की व्यवस्था की जा रही है, जबकि पिछले आयोजनों में करीब 1,500 से 2,000 लोग आते थे। पहली बार ऑनलाइन पंजीकरण शुरू किया गया है और 5,000 से 6,000 लोग पंजीकरण करा चुके हैं, जिनमें कई गुजरात के बाहर के हैं। तैयारी आम तौर पर ढाई महीने पहले शुरू होती थी, इस बार करीब चार महीने पहले शुरू हुई।
कार्यक्रम में 15 झांकियां होंगी, पांच राष्ट्रीय विषयों पर जिन्हें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता से चुना गया और दस गुजरात पर। साथ में कुचिपुड़ी और मोहिनीअट्टम नृत्य और एक नाटक भी होगा।
मोहन ने कहा, “राष्ट्रीय एकता दिवस का मकसद गणतंत्र दिवस से होड़ करना नहीं था।”
नशामुक्त भारत दूसरा अहम संदेश है। गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को दिल्ली में राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के दस्तों वाली जिस पुलिस मोटरसाइकिल रैली को हरी झंडी दिखाई, वह यही संदेश लेकर एकता नगर जा रही है। इससे पहले राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर शाह ने पुलिस बलों से तीन साल तक जुटे रहकर 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने का आग्रह किया।
राष्ट्रीय एकता दिवस 2014 से हर साल 31 अक्टूबर को मनाया जाता है।