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सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर रोक अब हर त्योहार पर, दिवाली भी शामिल: बॉम्बे हाईकोर्ट

गणेशोत्सव के लिए लगाई गई रोक अब पूरे साल महाराष्ट्र की सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर लागू होगी। पटाखों की बिक्री और निर्माण पर असर नहीं पड़ेगा।

संपादकीय डेस्क से · मुंबईप्रकाशित
बॉम्बे हाईकोर्ट की इमारत
बॉम्बे हाईकोर्ट की इमारतPhoto: Adam Jones from Kelowna, BC, Canada / Wikimedia Commons, CC BY-SA 2.0

मुख्य बातें

  1. सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने की रोक अब पूरे साल हर त्योहार पर लागू होगी।
  2. अदालत ने कहा कि उसने पटाखों के निर्माण या बिक्री पर रोक नहीं लगाई है।
  3. स्कूलों और सार्वजनिक परिवहन में जागरूकता अभियान एक हफ्ते के भीतर शुरू करने होंगे।

बॉम्बे हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) ने गुरुवार को सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने की रोक का दायरा बढ़ाकर साल भर के सभी त्योहारों पर लागू कर दिया। इनमें चल रहे नवरात्र, दिवाली और क्रिसमस भी शामिल हैं।

जस्टिस गिरीश एस. कुलकर्णी और जस्टिस नीला के. गोखले की खंडपीठ ने 22 सितंबर को गणेशोत्सव के दौरान दिए अपने आदेश को आगे बढ़ाया। यह जनहित मामला अदालत ने महाराष्ट्र में त्योहारी जुलूसों के दौरान तेज़ साउंड सिस्टम और सड़कों पर पटाखे फोड़ने को लेकर खुद उठाया था। न्यायाधीशों ने बिगड़ती हवा पर चिंता जताई और कहा कि दिवाली के बाद का ज़हरीला धुआं सबसे ज़्यादा बच्चों और बुज़ुर्गों पर असर डालता है।

पीठ ने राज्य से कहा, “पटाखे जलाने पर आपका (अधिकारियों का) कोई नियंत्रण नहीं है।” उसने जोड़ा, “समस्या कानून का पालन न होना है।”

अदालत ने साफ किया कि उसने पटाखों के निर्माण या बिक्री पर रोक नहीं लगाई है। आदेश इस बारे में है कि पटाखे कहां फोड़े जाएं।

अदालत ने महाराष्ट्र सरकार, बृहन्मुंबई महानगरपालिका और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पटाखों के नुकसान पर संयुक्त सार्वजनिक नोटिस जारी करने और एक हफ्ते के भीतर स्कूलों व सार्वजनिक परिवहन में जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया। अधिकारियों से यह भी कहा गया कि संदेश फैलाने के लिए जानी-मानी हस्तियों को जोड़ें, कम उत्सर्जन वाले ग्रीन पटाखों को बढ़ावा दें और पुलिस के साथ शिकायत की कारगर व्यवस्था बनाएं, ताकि लोग उल्लंघन की सूचना दे सकें।

दिवाली में एक महीने से भी कम समय बचा है, और इस आदेश के बाद मुंबई समेत राज्य के शहरों में जश्न को सड़कों से दूर रखने की ज़िम्मेदारी पुलिस और नगर निकायों पर आ गई है।