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सी-डॉट ने आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी में 6जी और क्वांटम शोध केंद्र खोला

दूरसंचार विभाग की शोध इकाई ने अपना छठा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस आईआईटी (बीएचयू) में बनाया है, जो 5जी एडवांस्ड, 6जी, एआई नेटवर्क और पोस्ट-क्वांटम सुरक्षा पर काम करेगा।

संपादकीय डेस्क से · वाराणसीप्रकाशित
आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी का परिसर (फ़ाइल फ़ोटो)
आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी का परिसर (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Rosehubwiki / Wikimedia Commons, CC BY 4.0

मुख्य बातें

  1. सी-डॉट ने छठे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी से समझौता किया।
  2. शोध में 5जी एडवांस्ड और 6जी, बड़े मीमो सिस्टम और क्वांटम संचार शामिल हैं।
  3. बाकी केंद्र आईआईटी कानपुर, गांधीनगर, रुड़की, हैदराबाद और आईआईएससी बेंगलुरु में हैं।

दूरसंचार विभाग के शोध केंद्र सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) ने अगली पीढ़ी के मोबाइल नेटवर्क पर काम के लिए वाराणसी के आईआईटी (बीएचयू) में अपना छठा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खोला है। संचार मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

दोनों ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद केंद्र का उद्घाटन हुआ। इस मौके पर सी-डॉट के कार्यकारी उपाध्यक्ष पंकज कुमार दलेला और संस्थान के निदेशक प्रोफेसर अमित पात्रा मौजूद थे।

केंद्र वायरलेस संचार, क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा और एआई आधारित नेटवर्क पर काम करेगा। शोध की सूची में 5जी एडवांस्ड और 6जी, बहुत बड़े मल्टीपल-इनपुट मल्टीपल-आउटपुट (मीमो) एंटीना सिस्टम, इंटीग्रेटेड सेंसिंग और संचार, एआई-नेटिव नेटवर्क और उपकरण, और क्वांटम व पोस्ट-क्वांटम संचार शामिल हैं। दोनों तरफ के शोधकर्ता, फैकल्टी, छात्र और तकनीकी विशेषज्ञ साझा परियोजनाओं पर काम करेंगे, ताकि देश के डिजिटल और संचार ढांचे के लिए स्वदेशी तकनीक विकसित की जा सके।

सी-डॉट के मुख्य कार्यकारी राजकुमार उपाध्याय ने कहा, “यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस एक शोध मंच से कहीं ज्यादा है, यह भारत की भविष्य की तकनीकी क्षमताओं में निवेश है।”

पात्रा ने कहा कि इस साझेदारी से छात्र और शोधकर्ता “दूरसंचार की वास्तविक चुनौतियों से जुड़ सकेंगे और उन्नत संचार तकनीकों में आत्मनिर्भरता की भारत की यात्रा में योगदान दे सकेंगे।”

सी-डॉट के बाकी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस आईआईटी कानपुर, आईआईटी गांधीनगर, आईआईटी रुड़की, आईआईटी हैदराबाद और आईआईएससी बेंगलुरु में हैं। मंत्रालय के मुताबिक इस नेटवर्क का मकसद अकादमिक शोध को उद्योग की जरूरतों से जोड़ना और दूरसंचार क्षेत्र के लिए विशेषज्ञ तैयार करना है।

मूल दस्तावेज़