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1 नवंबर से इलाके के बजाय क्षेत्रवार सुरक्षा संभालेगा सीआईएसएफ

गृह मंत्रालय ने औद्योगिक सुरक्षा बल के ढांचे में बड़े बदलाव को मंजूरी दी है। आठ क्षेत्रीय कमानों की जगह बिजली, कोयला, इस्पात, तेल-गैस, बंदरगाह और राजधानी की सरकारी इमारतों के लिए अलग-अलग सेक्टर बनेंगे।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
ड्यूटी पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवान (फ़ाइल फ़ोटो)
ड्यूटी पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवान (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Bharata-indstar / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. गृह मंत्रालय की मंजूरी से सीआईएसएफ 1 नवंबर से उद्योगवार सेक्टरों में काम करेगा।
  2. आठ क्षेत्रीय सेक्टर बिजली, कोयला, इस्पात, पेट्रोलियम, बंदरगाह और दिल्ली की सरकारी इमारतों व मेट्रो के सेक्टर बनेंगे।
  3. हवाई अड्डों और परमाणु ऊर्जा व अंतरिक्ष के सेक्टर, जो करीब 25 साल से इसी तरह चल रहे हैं, जस के तस रहेंगे।

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) 1 नवंबर से अपना ढांचा इलाकों के बजाय उन उद्योगों के हिसाब से बनाएगा, जिनकी वह सुरक्षा करता है। बल ने रविवार को बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस बदलाव को मंजूरी दे दी है।

योजना के तहत सीआईएसएफ के आठ क्षेत्रीय सेक्टर कार्यात्मक सेक्टरों में बदल जाएंगे। मुंबई के पश्चिमी सेक्टर या रांची के पूर्वी सेक्टर की जगह अब वरिष्ठ अधिकारी देश भर में अपने जिम्मे के हर बिजलीघर, कोयला क्षेत्र, इस्पात संयंत्र या बंदरगाह की निगरानी करेंगे।

बल के मुताबिक इस बदलाव का मकसद कामकाज पर बेहतर निगरानी, हर क्षेत्र में विशेषज्ञता, एक जैसे प्रतिष्ठानों में सुरक्षा के एक जैसे तरीके और संबंधित मंत्रालयों व प्रतिष्ठानों के प्रबंधकों से बेहतर तालमेल है। बल ने कहा, “इस पुनर्गठन से अधिक विशेषज्ञ और क्षेत्र-केंद्रित सुरक्षा तंत्र बनने की उम्मीद है।”

क्या बदलेगा

नई दिल्ली का एनसीआर सेक्टर अब जीबीएमएम और एमआरटीएस सेक्टर बनेगा, जिसके जिम्मे सरकारी इमारतें, संग्रहालय, स्मारक और मेट्रो होंगे। नई दिल्ली का उत्तरी सेक्टर पावर-I और कोलकाता का पूर्वोत्तर सेक्टर-II पावर-II सेक्टर बनेगा।

रांची का पूर्वी सेक्टर कोयला सेक्टर और भिलाई का मध्य सेक्टर इस्पात सेक्टर बनेगा। गुवाहाटी का पूर्वोत्तर सेक्टर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस प्रतिष्ठानों की सुरक्षा संभालेगा। तटों पर मुंबई का पश्चिमी सेक्टर पश्चिमी तट बंदरगाह सेक्टर और चेन्नई का दक्षिणी सेक्टर पूर्वी तट बंदरगाह सेक्टर बनेगा।

तीन सेक्टरों में कोई बदलाव नहीं होगा: बेंगलुरु का परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग सेक्टर, नई दिल्ली का एयरपोर्ट सेक्टर-I और बेंगलुरु का एयरपोर्ट सेक्टर-II।

आजमाया हुआ मॉडल

बल शून्य से शुरुआत नहीं कर रहा। हवाई अड्डों, परमाणु प्रतिष्ठानों और अंतरिक्ष केंद्रों की सुरक्षा करीब 25 साल से कार्यात्मक आधार पर हो रही है, और सीआईएसएफ के मुताबिक इसी अनुभव से यह फैसला निकला। गृह मंत्रालय को प्रस्ताव भेजने से पहले बल ने अपनी फील्ड इकाइयों, मुख्यालय की शाखाओं और वरिष्ठ अधिकारियों से सलाह ली।

सीआईएसएफ हवाई अड्डों और दिल्ली मेट्रो से लेकर रिफाइनरियों, बिजलीघरों और परमाणु ठिकानों तक भारत के अहम ढांचे के बड़े हिस्से की सुरक्षा करता है। हाल के वर्षों में इसकी भूमिका बढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय आईएसपीएस संहिता के तहत यह बंदरगाहों के लिए मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन है, जम्मू-कश्मीर की उच्च सुरक्षा वाली जेलों की सुरक्षा भी इसे मिली है, और अहम ढांचे को हवाई खतरों से बचाने के लिए यह नोडल एजेंसी है।

बल अपनी साइबर सुरक्षा और ड्रोन व ड्रोन-रोधी क्षमताएं भी बढ़ा रहा है।

आगे क्या

नया ढांचा 1 नवंबर से लागू होगा। बल ने यह नहीं बताया है कि इससे अलग-अलग प्रतिष्ठानों पर तैनाती बदलेगी या नहीं, और हर नए सेक्टर में कितनी इकाइयां होंगी।