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नई इस्पात नीति का मसौदा: 2047 तक 604 मिलियन टन क्षमता का लक्ष्य

इस्पात मंत्रालय का यह मसौदा 2017 की नीति की जगह लेगा। इसमें मौजूदा से करीब तीन गुना क्षमता, तीन गुना कोकिंग कोल और प्रति टन उत्सर्जन में 39% कटौती की योजना है।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
दुर्गापुर स्टील प्लांट, पश्चिम बंगाल
दुर्गापुर स्टील प्लांट, पश्चिम बंगालP.K. Niyogi / Wikimedia

मुख्य बातें

  1. राष्ट्रीय इस्पात नीति-विज़न 2047 के मसौदे में 604 मिलियन टन कच्चे इस्पात की क्षमता का लक्ष्य है, जो अभी करीब 220 मिलियन टन है।
  2. मसौदे के मुताबिक तैयार इस्पात की खपत 505 मिलियन टन और प्रति व्यक्ति खपत 302 किलो होगी, जो आज 116 किलो है।
  3. कोकिंग कोल की मांग 72 से बढ़कर 236 मिलियन टन होगी, जबकि भारत अभी अपनी ज़रूरत का करीब 92% आयात करता है।
  4. 2047 तक प्रति टन कच्चे इस्पात पर उत्सर्जन 2.54 से घटाकर 1.54 टन CO2 करने का लक्ष्य है।

इस्पात मंत्रालय ने राष्ट्रीय इस्पात नीति-विज़न 2047 का मसौदा जारी किया है। इसमें 2047 तक देश में 604 मिलियन टन (एमटी) कच्चे इस्पात की उत्पादन क्षमता बनाने की योजना है। अभी स्थापित क्षमता करीब 220 एमटी है, यानी लक्ष्य मौजूदा स्तर का लगभग तीन गुना है।

यह मसौदा 2017 की राष्ट्रीय इस्पात नीति की जगह लेगा, जिसमें 2030-31 तक 300 एमटी क्षमता और 160 किलो प्रति व्यक्ति खपत का लक्ष्य था। मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर उद्योग से सुझाव मांगे हैं।

मुख्य आंकड़े

मसौदे के अनुमान के मुताबिक 2047 तक कच्चे इस्पात का उत्पादन 531 एमटी और तैयार इस्पात की खपत 505 एमटी होगी। प्रति व्यक्ति खपत आज के 116 किलो से बढ़कर 302 किलो हो जाएगी। ये अनुमान करीब 7% सालाना जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि और 88% क्षमता उपयोग मानकर लगाए गए हैं।

निर्यात का लक्ष्य 45 एमटी है। भारत ने 2025-26 में करीब 170 एमटी कच्चा इस्पात बनाया, जो 2014-15 में करीब 89 एमटी था। इसी दौरान तैयार इस्पात की खपत 77 एमटी से बढ़कर 164 एमटी हो गई।

इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक ने 29 सितंबर को कहा था कि 2017 के बाद कई नए मुद्दे सामने आए हैं और क्षमता व खपत जैसे मामलों में सुधार की ज़रूरत है। उन्होंने मसौदे का मकसद भी बताया।

यह राष्ट्रीय इस्पात नीति 2047 में भारत को विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचाने के विज़न के साथ तैयार की जा रही है।

संदीप पौंड्रिक, इस्पात सचिव, 29 सितंबर 2026

कच्चा माल सबसे बड़ी चुनौती

इस्पात बनाने की लागत का 65-70% हिस्सा कच्चे माल का होता है, और मसौदे का बड़ा हिस्सा इसी पर है। भारत लौह अयस्क में काफ़ी हद तक आत्मनिर्भर है, लेकिन अपनी करीब 92% कोकिंग कोल आयात करता है।

इस्पात योजना की ज़रूरतेंकच्चे माल की मांग, अभी और 2047 में (मिलियन टन)
इस्पात योजना की ज़रूरतें. कच्चे माल की मांग, अभी और 2047 में (मिलियन टन)
मदमान
लौह अयस्क, 2025299
लौह अयस्क, 2047772
कोकिंग कोल, 202572
कोकिंग कोल, 2047236
स्क्रैप, 2025-2636
स्क्रैप, 2047-48123

कोयले का आयात घटाने के लिए मसौदे में घरेलू खनन बढ़ाने, ज़्यादा वॉशरी लगाने, विदेश में खनन संपत्तियां ख़रीदने, लंबी अवधि के आपूर्ति अनुबंध और कोयले के मिश्रण को बेहतर बनाने के लिए एआई टूल्स का प्रस्ताव है। वॉशरी की मौजूदा क्षमता करीब 39 एमटी सालाना है, लेकिन करीब 17 एमटी कोयला डालने पर सिर्फ़ करीब 6 एमटी धुला कोयला निकलता है।

मसौदा स्लरी पाइपलाइन से लौह अयस्क की ढुलाई भी बहुत बढ़ाना चाहता है, करीब 18 एमटी सालाना से 299 एमटी से ज़्यादा तक। आज सिर्फ़ करीब 1% लौह अयस्क इस तरह ढोया जाता है। मसौदा मानता है कि स्लरी पाइपलाइन में “काफ़ी पानी लगता है और पर्यावरण से जुड़ी चिंताएं हैं”, और इसके लिए सिंगल-विंडो मंज़ूरी और वायबिलिटी गैप फ़ंडिंग का प्रस्ताव करता है।

उत्सर्जन और स्क्रैप

भारत के CO2 उत्सर्जन में इस्पात क्षेत्र का हिस्सा 10-12% है। मसौदे का लक्ष्य 2047 तक उत्सर्जन तीव्रता को प्रति टन कच्चे इस्पात पर 2.54 टन CO2 से घटाकर 1.54 टन करना है, यानी करीब 39% की कटौती। वैश्विक औसत करीब 1.92 टन है।

योजना चरणों में है: पहले ऊर्जा दक्षता, अक्षय ऊर्जा और ज़्यादा स्क्रैप, फिर उन्नत तकनीक का व्यापक इस्तेमाल, और बाद में ग्रीन हाइड्रोजन आधारित डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन और बचे हुए उत्सर्जन के लिए कार्बन कैप्चर।

स्क्रैप की उपलब्धता 2025-26 के 36 एमटी से बढ़कर 2047-48 में 123 एमटी होने का अनुमान है। मसौदे में स्वच्छ भारत की तर्ज़ पर मिशन मोड में स्क्रैप जुटाने का अभियान और पुराने वाहनों, निर्माण कचरे और उपभोक्ता टिकाऊ सामान के लिए विस्तारित उत्पादक ज़िम्मेदारी का प्रस्ताव है।

छोटे उत्पादक, सुरक्षा और आयात

करीब 2,550 छोटी इकाइयों वाले सेकेंडरी इस्पात क्षेत्र के पास कच्चे इस्पात की लगभग 47% क्षमता है। पौंड्रिक ने सितंबर में कहा था कि मंत्रालय छोटे उत्पादकों के लिए ₹5,000 करोड़ की विकसित भारत इस्पात (ISPAT) योजना का प्रस्ताव कर रहा है, जिसमें प्रोत्साहन उत्पादन और उत्सर्जन में कटौती से जुड़े होंगे। इसे अभी मंज़ूरी नहीं मिली है।

मसौदे में इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद, घटिया आयात पर एआई आधारित निगरानी और एक राष्ट्रीय इस्पात डेटा प्लेटफ़ॉर्म का भी प्रस्ताव है।