नीतिकृषि
11 करोड़ फार्मर आईडी का लक्ष्य पूरा, मार्च 2027 की समय सीमा से पांच महीने पहले
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि लक्ष्य शुक्रवार रात पूरा हुआ। यह डिजिटल पहचान कर्ज़, फसल बीमा, राहत और एमएसपी पर बिक्री की एक ही चाबी बनाई जा रही है।

मुख्य बातें
- सरकार ने 11 करोड़ फार्मर आईडी बना ली हैं, जिनका लक्ष्य 31 मार्च 2027 तक का था।
- फरवरी में यह संख्या 8.47 करोड़ थी, चौहान ने राज्यसभा को बताया था।
- मंत्रालय के मुताबिक आईडी आधारित व्यवस्था से 6 करोड़ से ज़्यादा किसानों को लाभ मिल चुका है।
केंद्र सरकार ने 11 करोड़ फार्मर आईडी बना ली हैं और मार्च 2027 तक का लक्ष्य पांच महीने पहले पूरा कर लिया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को यह जानकारी दी।
एक वीडियो संदेश और एक्स पर पोस्ट में चौहान ने बताया कि यह आंकड़ा शुक्रवार रात पार हुआ। यह लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तय किया था और इसकी समय सीमा 31 मार्च 2027 थी। मंत्री ने कहा कि लक्ष्य “तय समय से पांच महीने पहले” पूरा हुआ है। उन्होंने केंद्र, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और ज़िला प्रशासन के अधिकारियों का धन्यवाद किया और इसे सहकारी संघवाद का उदाहरण बताया।
फार्मर आईडी एक विशिष्ट डिजिटल पहचान है, जो किसान को सत्यापित रिकॉर्ड से जोड़ती है। इसे डिजिटल कृषि मिशन के तहत बनाया जा रहा है, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2 सितंबर 2024 को मंज़ूरी दी थी।
8.47 करोड़ से 11 करोड़ तक
इस साल संख्या तेज़ी से बढ़ी है। फरवरी में राज्यसभा में सवालों के जवाब में चौहान ने बताया था कि 8.47 करोड़ से कुछ ज़्यादा फार्मर आईडी जारी हो चुकी हैं। तब 19 राज्यों में आईडी बन रही थीं और 2.9 करोड़ किसान राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल से जुड़ चुके थे। उसके बाद के आठ महीनों में करीब 2.5 करोड़ आईडी और जुड़ी हैं।
मंत्रालय के मुताबिक आईडी आधारित व्यवस्था से अब तक 6 करोड़ से ज़्यादा किसानों को लाभ मिल चुका है।
आईडी से क्या होगा
सरकार का तर्क है कि एक सत्यापित पहचान से किसानों को अलग-अलग दफ्तरों में बार-बार वही बातें साबित नहीं करनी पड़ेंगी। मंत्रालय के अनुसार इससे बैंक कर्ज़ और किसान क्रेडिट कार्ड लेना आसान होगा, दस्तावेज़ों की बार-बार जांच कम होगी, और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में नुकसान का आकलन ज़्यादा पारदर्शी होगा, जिसमें दावे की रकम सीधे किसानों के बैंक खाते में जाएगी।
इसका मकसद योग्य किसानों तक आपदा राहत जल्दी पहुंचाना और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद में बिचौलियों को हटाना भी है, ताकि किसानों को अपनी उपज का पूरा दाम मिले। मंत्रालय का कहना है कि कृषि सेवाओं से जुड़ा सत्यापित डेटाबेस धोखाधड़ी और दोहरी जांच को कम करता है और सरकार को यह देखने देता है कि योजनाएं ज़मीन पर कैसे काम कर रही हैं।
बटाईदार और असल किसान
मंत्रालय ने माना कि सिर्फ भूमि रिकॉर्ड से खेती करने वाले सभी लोग दर्ज नहीं होते। उसने कहा कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने नियमों के तहत बटाईदार किसानों और असल खेती करने वालों को इस प्लेटफॉर्म पर लाने के कदम उठा रहे हैं। यह कितना आगे बढ़ता है, इसी से तय होगा कि आईडी उन किसानों तक पहुंचती है या नहीं जो दूसरों की ज़मीन पर खेती करते हैं।
चौहान ने कहा कि मकसद यह है कि लाभ सही किसानों तक पहुंचे और आधुनिक तकनीक से खेती आसान हो। मंत्रालय ने 11 करोड़ आईडी का राज्यवार ब्योरा जारी नहीं किया।
मूल दस्तावेज़
- 11 Crore Farmer IDs Created Five Months Ahead of Schedule, Marking Major Milestone in Digital Agriculture: Shri Shivraj Singh ChouhanPress Information Bureau (Ministry of Agriculture and Farmers Welfare), 24 अक्टूबर 2026