LokVox

नीतिव्यापार

किसानों और छोटे कारोबारियों के निर्यात के लिए व्यापार समझौते राज्यों तक ले जा रहे गोयल

वाणिज्य मंत्री ने कहा कि वाणिज्य विभाग राज्य सरकारों के साथ मिलकर अभियान चला रहा है ताकि एमएसएमई, किसान और छोटे कारोबार भारत के मुक्त व्यापार समझौतों का फायदा उठा सकें।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (फ़ाइल फ़ोटो)
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Europäische Kommission - Audiovisueller Dienst, CE - Service audiovisuel, EC - Audiovisual Service, Dati Bendo / Wikimedia Commons, CC BY 4.0

मुख्य बातें

  1. वाणिज्य विभाग निर्यातकों के लिए राज्य सरकारों के साथ एफटीए आउटरीच कर रहा है।
  2. पीयूष गोयल ने गोवा में आउटरीच कार्यक्रम में शामिल होने पर मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की सराहना की।
  3. वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक भारत के अब 38 देशों के साथ नौ एफटीए हैं।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि सरकार भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) को राज्यों तक ले जा रही है। इसके तहत ऐसे आउटरीच कार्यक्रम चल रहे हैं जिनसे किसानों, कामगारों, महिलाओं, युवाओं, एमएसएमई और छोटे कारोबारों को निर्यात के नए बाज़ार मिल सकें।

गोयल ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वाणिज्य विभाग ये पहल राज्य सरकारों के साथ मिलकर चला रहा है। उन्होंने लिखा कि लक्ष्य “व्यापार साझेदारियों को देशभर के लोगों के लिए सार्थक अवसरों में बदलना” है।

उन्होंने कहा, “हाल के वर्षों में हुए कई एफटीए ने हमारे निर्यातकों के लिए अपार अवसर खोले हैं।”

गोयल ने गोवा में एक आउटरीच कार्यक्रम में हिस्सा लेने और स्थानीय कारोबारियों को विदेशी बाज़ारों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने पर मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत का आभार जताया। उन्होंने कहा कि देशभर में ऐसे और कार्यक्रम होंगे ताकि हर राज्य अपनी निर्यात क्षमता का इस्तेमाल कर सके।

वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक भारत के 38 देशों के साथ नौ मुक्त व्यापार समझौते हैं। यह सूची तेज़ी से बढ़ी है: 2021 में मॉरीशस और मई 2022 में यूएई के साथ समझौते, दिसंबर 2022 से लागू ऑस्ट्रेलिया समझौता, 1 अक्टूबर 2025 से लागू ईएफटीए समझौता, जुलाई 2025 में हुआ ब्रिटेन समझौता और दिसंबर 2025 का ओमान समझौता। न्यूज़ीलैंड समझौता मंगलवार, 20 अक्टूबर को लागू हुआ और यूरोपीय संघ के साथ समझौते की घोषणा इस साल जनवरी में हुई।

यह अभियान इस कोशिश का हिस्सा है कि इन समझौतों का फायदा बड़े निर्यातकों से आगे बढ़कर राज्यों के छोटे उत्पादकों तक पहुंचे।