नीतिलद्दाख
केंद्र ने बदले लद्दाख हिल काउंसिल के नियम, प्रशासन तय करेगा 7 से 24 निर्वाचित सीटें
संशोधित विनियमन में महिलाओं और कम प्रतिनिधित्व वाले समुदायों से चार तक सदस्य मनोनीत करने और चुनाव व्यावहारिक न होने पर कार्यकाल बढ़ाने का प्रावधान है।

मुख्य बातें
- हर हिल काउंसिल में अब प्रशासन के फैसले के मुताबिक 7 से 24 निर्वाचित सदस्य हो सकेंगे।
- महिलाओं और कम प्रतिनिधित्व वाले समुदायों से चार तक सदस्य मनोनीत किए जा सकेंगे।
- चुनाव व्यावहारिक न लगने पर परिषद का पांच साल का कार्यकाल बढ़ाया जा सकेगा।
केंद्र ने लद्दाख की स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषदों (हिल काउंसिल) से जुड़े नियमों में संशोधन किया है। अब केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन तय करेगा कि हर परिषद में कितने निर्वाचित सदस्य होंगे। यह संख्या 7 से 24 के बीच होगी।
लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (संशोधन) विनियमन परिषदों की संरचना, शब्दावली और चुनाव से जुड़े प्रावधानों को जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के अनुरूप बनाता है। इसी कानून के तहत लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश बना था।
नए नियमों के तहत प्रशासन महिलाओं और कम प्रतिनिधित्व वाले समुदायों में से चार तक सदस्य मनोनीत कर सकेगा, जो आबादी से जुड़ी एक सीमा के अधीन होगा। हर परिषद का कार्यकाल उसकी पहली बैठक के लिए तय तारीख से पांच साल का होगा, बशर्ते उसे पहले भंग न किया जाए। अगर चुनाव कराना व्यावहारिक न माना जाए, तो यह कार्यकाल बढ़ाया जा सकेगा।
लद्दाख से लोकसभा के मौजूदा सांसद हर जिले की परिषद के पदेन सदस्य होंगे। पुराने पाठ में जहां “राज्य” लिखा था, वहां अब “लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश” होगा, और “राज्यपाल” की जगह “प्रशासक”।
अभी यह क्यों अहम है
यह बदलाव ऐसे समय आया है जब केंद्र और लद्दाख के दो प्रमुख राजनीतिक संगठनों के बीच बातचीत अटकी हुई है। लेह एपेक्स बॉडी और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने शुक्रवार को गृह मंत्रालय का वह मसौदा ठुकरा दिया, जिसमें पूरे केंद्र शासित प्रदेश के लिए सीधे चुनी जाने वाली संस्था का प्रस्ताव है। केंद्र के मुताबिक जो सवाल अभी खुले हैं, उनमें यह भी है कि वह संस्था मौजूदा हिल काउंसिलों के साथ कैसे काम करेगी।
दोनों पक्ष 22 अक्टूबर को नई दिल्ली में फिर मिलेंगे।