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ऑपरेशन ट्राइडेंट: पूर्वोत्तर में म्यांमार ड्रग नेटवर्क पर वार, 1,424 खाते फ्रीज, 18 गिरफ्तार

अमित शाह ने असम, मिजोरम और मणिपुर में 38 जगहों पर छापों को 'ड्रग्स पर एक और घातक प्रहार' बताया। प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक चुराचांदपुर के एक मिनी-एटीएम काउंटर से 175 करोड़ रुपये भेजे गए।

संपादकीय डेस्क से · आइजोलप्रकाशित
म्यांमार सीमा पर मिज़ोरम के चंफाई के पास पहाड़ियां (फ़ाइल फ़ोटो)
म्यांमार सीमा पर मिज़ोरम के चंफाई के पास पहाड़ियां (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Major Anthony Gilchrist Mccall / Wikimedia Commons, CC0

मुख्य बातें

  1. 23 अक्टूबर के छापों में एजेंसियों ने 1,424 बैंक खाते फ्रीज किए और 500 डेटोनेटर जब्त किए।
  2. ईडी ने छह लोगों को गिरफ्तार किया और चम्फाई का 17.82 करोड़ रुपये का होटल कुर्क किया।
  3. ईडी के मुताबिक चुराचांदपुर के एक काउंटर से 175.03 करोड़ रुपये के 2,947 ट्रांसफर हुए।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को बताया कि पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में केंद्रीय एजेंसियों और पुलिस ने म्यांमार सीमा के आर-पार नशीले पदार्थ और पैसा पहुंचाने वाले एक नेटवर्क पर संयुक्त कार्रवाई कर 1,424 बैंक खाते फ्रीज किए हैं और 18 लोगों को गिरफ्तार किया है।

ऑपरेशन ट्राइडेंट नाम से ये छापे 23 अक्टूबर को असम, मिजोरम और मणिपुर में 38 जगहों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और राज्य पुलिस ने मारे। शाह के मुताबिक इनमें करीब 100 करोड़ रुपये के हवाला लेन-देन का पता चला और 500 डेटोनेटर व 12 लाख रुपये नकद बरामद हुए। अधिकारियों ने यह नहीं बताया है कि डेटोनेटर किस काम के लिए थे।

शाह ने एक्स पर लिखा, “मोदी सरकार ने ऑपरेशन ट्राइडेंट से ड्रग्स पर एक और घातक प्रहार किया है।” उन्होंने नशा-विरोधी टीमों को बधाई दी और 31 दिसंबर 2029 तक ड्रग नेटवर्क खत्म करने के सरकार के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा, “भारत तब तक प्रहार करता रहेगा जब तक ड्रग कार्टेल के ताबूत में आखिरी कील नहीं ठुक जाती।”

पैसे का पीछा

ऑपरेशन के मनी लॉन्ड्रिंग वाले हिस्से की जांच ईडी के आइजोल और इंफाल दफ्तरों ने की। ईडी ने बताया कि उसने छह लोगों को गिरफ्तार किया है, तीन मिजोरम से और तीन मणिपुर से। इनमें से दो पहले से नशीले पदार्थों के मामलों में न्यायिक हिरासत में थे। ईडी ने चम्फाई के जियोन वेंग में पांच मंजिला होटल जेटीएस को अस्थायी रूप से कुर्क किया है, जिसकी कीमत 17.82 करोड़ रुपये है और जो एजेंसी के मुताबिक एक हवाला ऑपरेटर के पति के नाम पर है। फ्रीज खातों से पहले सुरक्षित की गई रकम मिलाकर एजेंसी की कुल कार्रवाई 26 करोड़ रुपये से ज्यादा की है।

ईडी के अनुसार इस पूरे सिलसिले के केंद्र में चुराचांदपुर का गो अल्फा ट्रिप नाम का मिनी-एटीएम और मनी ट्रांसफर काउंटर था। 2024 से जून 2026 के बीच इसने 175.03 करोड़ रुपये के 2,947 ट्रांसफर किए। लोग अपने बैंक खाते हर लाख रुपये पर 500 रुपये के बदले किराये पर देते थे, और पैसा कुछ ही दिनों में ऑनलाइन आगे भेज दिया जाता था, नकद बहुत कम निकाला जाता था। एजेंसी ने बताया कि चम्फाई की एक गृहिणी के खाते में 15.48 करोड़ रुपये आए, जबकि परिवार की मासिक आय करीब 27,000 रुपये थी।

ईडी का कहना है कि ऑपरेटर म्यांमार की मुद्रा क्यात में सप्लायरों का बकाया चुकाने के लिए कमीशन लेते थे, और भारत की एक फर्म ने करीब 32 टन कैफीन एनहाइड्रस और 10 टन एल्युमिनियम क्लोराइड मिजोरम में फर्जी प्राप्तकर्ताओं को भेजा। एजेंसी को शक है कि ये रसायन सीमा पार गोलियां बनाने वाली इकाइयों तक पहुंचे।

‘डेथ ट्रायंगल’

ये मामले तीन जब्तियों से शुरू हुए: मार्च 2025 में चम्फाई में 4.7 किलो हेरोइन, अगस्त 2025 में सेलिंग के पास 49 किलो मेथामफेटामाइन की गोलियां, और इस साल जुलाई में चुराचांदपुर में ब्राउन शुगर और 31.43 लाख रुपये नकद।

पूर्वोत्तर की म्यांमार से 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है। नशीले पदार्थ आम तौर पर जोखावथर से सीमा पार कर चम्फाई और आइजोल होते हुए असम और त्रिपुरा भेजे जाते हैं। शाह कहते रहे हैं कि जिस ड्रग उत्पादक इलाके को गोल्डन ट्रायंगल कहा जाता है, उसे “डेथ ट्रायंगल” कहा जाना चाहिए।

ईडी ने कहा कि अब वह बैंक अधिकारियों और कस्टमर सर्विस पॉइंट ऑपरेटरों की भूमिका की जांच कर रही है, और काउंटर के बाकी ग्राहकों और म्यांमार में पैसा पाने वालों का पता लगा रही है।