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₹1 लाख करोड़ की शोध योजना के दायरे में आए उन्नत रसायन और पेट्रोरसायन

नए रसायनों, पेट्रोरसायनों और सामग्रियों पर काम करने वाली कंपनियां अब अनुसंधान, विकास और नवाचार योजना से लंबी अवधि का वित्त मांग सकेंगी।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
गुजरात के दहेज में ओपल पेट्रोकेमिकल परिसर
गुजरात के दहेज में ओपल पेट्रोकेमिकल परिसरDRajkhowa / Wikimedia

मुख्य बातें

  1. उन्नत रसायन, पेट्रोरसायन और सामग्री तकनीक अब आरडीआई फंडिंग के योग्य क्षेत्र हैं।
  2. यह बदलाव 8 अक्टूबर 2026 से लागू है।
  3. नवंबर 2025 में शुरू हुई इस योजना का कोष ₹1 लाख करोड़ है।

सरकार ने उन्नत रसायन, पेट्रोरसायन और सामग्री तकनीक को अपनी ₹1 लाख करोड़ की अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना से पैसा पाने वाले क्षेत्रों की सूची में जोड़ दिया है। इससे रसायन उद्योग के लिए लंबी अवधि के शोध वित्त का बड़ा स्रोत खुल गया है।

रसायन और पेट्रोरसायन विभाग ने यह बदलाव प्रस्तावित किया था और योजना चलाने वाले विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने इसे मंजूरी दी। यह 8 अक्टूबर से लागू है और इसकी घोषणा बुधवार को हुई।

आरडीआई योजना नवंबर 2025 में निजी कंपनियों को शोध और विकास में लाने के लिए शुरू की गई थी। यह बड़े असर वाली परियोजनाओं को आसान शर्तों पर लंबी अवधि का वित्त और पुनर्वित्त देती है, ताकि उन्नत तकनीक जल्दी अपनाई जाए और अहम व उभरते क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बने। मंत्रालय ने कहा कि इस फैसले से रसायन और पेट्रोरसायन में शोध मज़बूत होगा और उन्नत औद्योगिक इस्तेमाल के लिए स्वदेशी तकनीक विकसित करने में मदद मिलेगी।

स्वास्थ्य और रसायन मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे उद्योग के लिए अहम कदम बताया। उन्होंने कहा, “इस निर्णय से अनुसंधान और नवाचार को बहुत आवश्यक प्रोत्साहन मिलेगा।” उन्होंने जोड़ा कि इससे रसायन, पेट्रोरसायन उत्पाद और पॉलिमर बनाने के ज़्यादा उन्नत, कुशल और किफ़ायती तरीकों को बढ़ावा मिलेगा।

योजना के तहत डीप-टेक कंपनियों में पैसा लगाने के लिए फंड मैनेजर पहले ही चुने जा चुके हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उसी दिन आईआईटी कानपुर के फंड अभियान की शुरुआत पर निजी निवेश को शोध में लाने के तरीके के तौर पर इस योजना का ज़िक्र किया।

मूल दस्तावेज़