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आंध्र प्रदेश निकाय चुनाव: जगन ने राज्यपाल नज़ीर से केंद्रीय बल और सीसीटीवी निगरानी की मांग की

वाईएसआरसीपी प्रमुख अपनी पार्टी के उम्मीदवारों पर कथित हमलों की सूची लेकर लोक भवन पहुंचे और कहा कि वे इन चुनावों को लेकर अदालत जाएंगे, जिन्हें उन्होंने लोकतंत्र पर कलंक बताया।

संपादकीय डेस्क से · अमरावतीप्रकाशित
वाईएसआरसीपी प्रमुख वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी (फ़ाइल फ़ोटो)
वाईएसआरसीपी प्रमुख वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Anitha Gedel / Wikimedia Commons, CC BY-SA 2.0

मुख्य बातें

  1. वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने राज्यपाल एस अब्दुल नज़ीर से निकाय चुनावों के लिए केंद्रीय बल और सीसीटीवी निगरानी की मांग की।
  2. उनका आरोप है कि पुलिवेंदुला में 36 वार्डों के लिए सिर्फ 19 नामांकन दाखिल हो सके।
  3. 100 शहरी निकायों में 28 अक्टूबर को मतदान होगा और नतीजे 30 अक्टूबर को आएंगे।

वाईएसआरसीपी अध्यक्ष वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने रविवार को आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस अब्दुल नज़ीर से राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों में केंद्रीय बल तैनात करने और हर बूथ पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग की। उन्होंने सत्ताधारी टीडीपी के नेतृत्व वाले गठबंधन पर पुलिस का इस्तेमाल कर उनकी पार्टी के उम्मीदवारों को मैदान से बाहर रखने का आरोप लगाया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने लोक भवन में राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें शहरी निकाय चुनावों की नामांकन प्रक्रिया के दौरान पूरे राज्य में हुए कथित हमलों, नामांकन पत्र छीने जाने और पुलिस की धमकियों का ब्योरा था। नामांकन की अवधि अब खत्म हो चुकी है।

इसके बाद ताडेपल्ली स्थित अपने कार्यालय में उन्होंने पत्रकारों से कहा कि एनडीए गठबंधन हार के डर से “स्थानीय निकाय चुनावों में विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोक रहा है”। उन्होंने कहा, “जो लोग चुनाव लड़ना चाहते हैं, उन्हें यह मौका न देना लोकतंत्र पर कलंक है।”

जगन के आरोप

वाईएसआरसीपी के मुताबिक आठ जगहों पर नामांकन बिल्कुल दाखिल नहीं हो सके और आठ अन्य जगहों पर उसके उम्मीदवारों के नामांकन पत्र फाड़ दिए गए। उन्होंने कहा कि उनके अपने गढ़ पुलिवेंदुला में 36 वार्डों के लिए सिर्फ 19 नामांकन दाखिल हुए, और आरोप लगाया कि वहां पुलिस ने हवा में गोली चलाई और उम्मीदवारों पर पत्थर फेंके गए। उन्होंने इस गोलीबारी को अभूतपूर्व बताया।

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के सांसदों अविनाश रेड्डी, पी वी मिधुन रेड्डी और एम गुरुमूर्ति के साथ नामांकन केंद्रों पर दुर्व्यवहार हुआ, और नियमों में तय चार लोगों के साथ आने पर भी वाईएसआरसीपी कार्यकर्ताओं को लौटा दिया गया, जबकि टीडीपी समर्थक भीड़ में जमा थे। उन्होंने कडपा, पुंगनूर और तिरुपति को उन जगहों में गिनाया जहां नामांकन पत्र छीने गए या लिए नहीं गए, वाहनों पर हमले हुए और समर्थकों की पिटाई हुई। उन्होंने कहा कि आखिरी दिन भी तिरुपति, कडपा, रायचोटी, पुंगनूर, दर्शी, गुरजाला, पिडुगुराल्ला, बद्वेल और राजमपेट जैसे शहरों में उम्मीदवार नामांकन नहीं भर सके।

टीडीपी की ओर से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

निशाने पर चुनाव आयोग

रेड्डी ने राज्य चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा। उन्होंने मौजूदा आयुक्त को टीडीपी का वफादार बताया और राजनीतिक सत्ता द्वारा चुनाव कराने वालों को चुनने की व्यवस्था पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पूर्व आयुक्त एन रमेश कुमार के समय में भी, जिन्हें उन्होंने टीडीपी का कट्टर समर्थक बताया, वाईएसआरसीपी 90 प्रतिशत से ज्यादा की सफलता दर से जीती थी।

उन्होंने शिकायत की कि वार्ड आरक्षण जारी होने के अगले ही दिन कार्यक्रम घोषित कर दिया गया, जिससे विपक्ष को तैयारी का कम वक्त मिला, वार्डों का परिसीमन एनडीए के फायदे के लिए किया गया, और सरकार ने बिना संशोधित मतदाता सूची पर चुनाव कराना चुना, जबकि उनके मुताबिक विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में 46 लाख फर्जी मतदाता पाए गए थे।

आगे क्या

रेड्डी ने कहा कि वाईएसआरसीपी कानूनी रास्ता अपनाएगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से लड़ते रहने को कहा और चेतावनी दी कि जिम्मेदार लोगों से हिसाब लिया जाएगा।

चुनाव अगले सात हफ्तों में होंगे। 100 शहरी निकायों में 28 अक्टूबर को मतदान होगा और नतीजे 30 अक्टूबर को आएंगे। मंडल और जिला परिषद क्षेत्रों (एमपीटीसी और जेडपीटीसी) में 3 नवंबर को मतदान और 5 नवंबर को मतगणना होगी, जबकि ग्राम पंचायतों में 26 नवंबर, 29 नवंबर और 2 दिसंबर को तीन चरणों में मतदान होगा और हर चरण के नतीजे उसी दिन घोषित होंगे।