राजनीतितमिलनाडु
'2026 में ऐसा क्या खास है?' आरएसएस मार्च रोकने पर मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य से सवाल किए
जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन ने कहा कि जुलूसों की अनुमति न देकर राज्य नागरिकों को दुश्मन की तरह देख रहा है। आरएसएस 18 अक्टूबर या बाद की तारीखों पर मार्च करना चाहता है।

मुख्य बातें
- जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन ने राज्य से पूछा कि अदालत हर साल मार्च की अनुमति देती है तो आरएसएस को मना क्यों किया गया।
- आरएसएस सदस्य की याचिका में 18 अक्टूबर, 25 अक्टूबर या 1 नवंबर को पथ संचलन की अनुमति मांगी गई है।
- याचिकाकर्ताओं को राज्य लोक अभियोजक से मिलने को कहा गया, और मामले की सुनवाई गुरुवार को फिर होगी।
मद्रास हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को इस महीने पथ संचलन की अनुमति न देने पर तमिलनाडु सरकार से तीखे सवाल किए। अदालत ने कहा कि राज्य अपने ही नागरिकों को खतरे की तरह देखता लग रहा है।
जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन ने कहा, “हर साल वे (आरएसएस) (रैलियों की अनुमति मांगने) आते हैं, हर साल अदालत अनुमति देती है। 2026 में ऐसा क्या खास है?”
याचिका
आरएसएस सदस्य वी जी जगदीशन की याचिका में अदालत से मांग की गई है कि वह पुलिस को उनके आवेदन पर विचार करने और 18 अक्टूबर, 25 अक्टूबर, 1 नवंबर या दूसरी तारीखों पर वर्दी और बैंड के साथ पथ संचलन और उसके बाद एक जनसभा की अनुमति देने का निर्देश दे। संगठन अपना स्थापना दिवस मनाना चाहता है, जो विजयादशमी को पड़ता है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील एन एल राजा ने कहा कि पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला दिया था। उन्होंने दलील दी कि जुलूसों पर अदालत के पुराने दिशानिर्देश कोई सख्त वैधानिक नियम नहीं हैं, पुलिस को आवेदन खारिज करने के बजाय स्पष्टीकरण मांगना चाहिए, और अस्वीकृति आदेशों में प्रस्तावित रास्तों पर मस्जिदों के जिक्र पर आपत्ति जताई। उन्होंने यह भी पूछा कि जिन छोटे समूहों के पास अदालत आने के साधन नहीं हैं, वे क्या करें।
राज्य का जवाब
महाधिवक्ता ने कहा कि अनुमति इसलिए नहीं दी गई क्योंकि आरएसएस ने ऐसी जगह पर मार्च और सभा की अनुमति मांगी थी जो जनसभाओं के लिए अधिसूचित नहीं है। उन्होंने त्योहारों के मौसम में पुलिस पर बोझ और लोगों को होने वाली असुविधा का भी हवाला दिया।
जज इससे संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने पूछा, “क्या अब तक उनके मार्च में कोई हिंसा हुई है? राज्य नागरिकों को दुश्मन की तरह देख रहा है, क्या करें?” उन्होंने कहा कि सत्ता में कोई भी सरकार हो, जवाब हमेशा इनकार ही होता है, और सरकार आरएसएस के साथ-साथ द्रविड़ कड़गम को भी अनुमति नहीं दे रही।
उन्होंने राज्य से कहा कि अगर वह मना करने पर अड़ा है तो “एक कानून बना दीजिए कि किसी को भी जुलूस या मार्च निकालने का अधिकार नहीं होगा। आप ऐसा क्यों कर रहे हैं? बेवजह की मुकदमेबाजी।”
अदालत ने याचिकाकर्ता पक्ष के पांच सदस्यों से बुधवार दोपहर राज्य लोक अभियोजक जॉन सत्यन से मिलकर कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से कराने का रास्ता निकालने को कहा, और राज्य से रिपोर्ट मांगी। सुनवाई गुरुवार को जारी रहेगी।