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विजयेंद्र का दावा: कांग्रेस नेता कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार को हटाने की तैयारी में
राज्य भाजपा अध्यक्ष ने कथित असंतोष को हाल के स्टिंग वीडियो से जोड़ा और कहा कि इस हफ्ते के विधान परिषद चुनाव के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बैठक करेंगे।

मुख्य बातें
- बी वाई विजयेंद्र ने कहा कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं का भरोसा मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार से उठ गया है।
- उन्होंने दावा किया कि स्टिंग ऑपरेशन का तंत्र 'केपीसीसी कार्यालय से विधान सौधा पहुंच गया है'।
- कर्नाटक में विधान परिषद की चार सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान है।
कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र ने रविवार को दावा किया कि कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार को हटाने की कोशिश चल रही है। उन्होंने इसे उन स्टिंग वीडियो से जोड़ा जिन्होंने राज्य की सत्ताधारी पार्टी को हिला दिया है।
विजयेंद्र ने हुब्बल्ली में पत्रकारों से कहा, “कांग्रेस के कई वरिष्ठ राज्य नेताओं का मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार से भरोसा उठ गया है।” उन्होंने कहा कि “शिवकुमार को पद छोड़ने के लिए कांग्रेस पार्टी के भीतर उच्च स्तरीय बैठकें चल रही हैं”, और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विधान परिषद चुनाव के बाद बैठक कर मुख्यमंत्री पद पर फैसला कर सकते हैं।
स्टिंग वीडियो
विजयेंद्र ने कहा कि हाल के स्टिंग ऑपरेशन में मंत्रियों और कांग्रेस विधायकों को निशाना बनाया गया, और आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा कि इन्हें किसने करवाया, निशाने पर कौन था और क्यों। उन्होंने दावा किया कि यह तंत्र “केपीसीसी कार्यालय से विधान सौधा पहुंच गया है”।
उन्होंने अपनी पुरानी भविष्यवाणी भी दोहराई कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पद छोड़ना पड़ेगा, और कांग्रेस पर उन्हें अपमानित करने का आरोप लगाया।
रविवार शाम तक इन दावों पर कांग्रेस या मुख्यमंत्री कार्यालय की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
परिषद चुनाव और किसान
विजयेंद्र ने कहा कि भाजपा और जद(एस) मिलकर प्रचार कर रहे हैं और 23 अक्टूबर के चुनाव में विधान परिषद की चारों सीटें एनडीए उम्मीदवार जीतेंगे।
उन्होंने राज्य सरकार पर गन्ना किसानों की समस्या केंद्र, बैंकों और चीनी मिलों पर डालने का आरोप लगाया और राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) पर विचार करने को कहा, जैसा उनके मुताबिक हरियाणा और उत्तर प्रदेश देते हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या ₹2,500 की सूखा राहत काफी है।
उन्होंने कर्नाटक लोक सेवा आयोग की भर्तियों में कथित गड़बड़ी और देरी की निष्पक्ष जांच की मांग की, आयोग को खत्म करने के किसी भी कदम का विरोध किया और कहा कि भाजपा के शासनकाल की गड़बड़ियों की भी जांच हो। उन्होंने पूछा कि कांग्रेस ने जिन करीब 2.5 लाख पदों का वादा किया था, उनमें से कितने भरे गए।