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टेक के बाहर की कंपनियों को एआई से अब तक कोई कमाई नहीं: अपोलो के टॉर्स्टन स्लोक

अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के मुख्य अर्थशास्त्री के मुताबिक सात बड़ी टेक कंपनियों को हटाकर देखें तो एसएंडपी 500 की बाकी कंपनियों का मुनाफा मार्जिन और प्रति कर्मचारी राजस्व जस का तस है।

संपादकीय डेस्क से · न्यूयॉर्कप्रकाशित
वॉल स्ट्रीट पर न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (फ़ाइल फ़ोटो)
वॉल स्ट्रीट पर न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Dietmar Rabich / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. टॉर्स्टन स्लोक का कहना है कि टेक के बाहर अमेरिकी कंपनियों को एआई से शून्य वित्तीय फायदा हुआ है।
  2. उन्होंने एसएंडपी 493 को देखा, यानी अल्फाबेट, एमेज़ॉन, ऐपल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया और टेस्ला के बिना सूचकांक।
  3. उनकी दलील है कि कारोबार विवेक से चलता है, जो एआई के पास नहीं है।

निवेश कंपनी अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के मुख्य अर्थशास्त्री टॉर्स्टन स्लोक के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने अब तक “टेक के बाहर अमेरिकी कॉरपोरेट जगत को शून्य वित्तीय फायदा” दिया है।

अपोलो की ओर से प्रकाशित एक नोट में स्लोक ने उसे देखा जिसे वे एसएंडपी 493 कहते हैं: अमेरिका की बड़ी कंपनियों का एसएंडपी 500 सूचकांक, उसकी सात सबसे बड़ी टेक कंपनियों अल्फाबेट, एमेज़ॉन, ऐपल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया और टेस्ला के बिना। उन्होंने पाया कि इस समूह में मुनाफा मार्जिन और प्रति कर्मचारी राजस्व जस के तस हैं। आंकड़ों में उन्हें ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि एआई इन कंपनियों की उत्पादकता बढ़ा रहा है।

स्लोक इस तर्क से सहमत नहीं हैं कि आम कंपनियां टेक दिग्गजों से बस कुछ साल पीछे हैं और जल्द बराबरी कर लेंगी। उनकी दलील है कि सस्ते एआई को ज्यादा राजस्व और बेहतर मार्जिन में बदलना मुश्किल होगा, क्योंकि ज्यादातर कारोबारी फैसले उन खूबियों पर टिके होते हैं जो इस सॉफ्टवेयर में नहीं हैं।

उन्होंने लिखा, “एआई एक बढ़िया कैलकुलेटर हो सकता है, लेकिन कारोबार में समझदारी ज्यादातर विवेक का नाम है। एआई जवाबदेही, भरोसा, संस्कृति, अनलिखे नियम, नैतिक दुविधाएं या निष्पक्षता नहीं समझता।”

उनका निष्कर्ष हाल के कई अध्ययनों से मेल खाता है, जिनमें पाया गया है कि एआई से व्यापक अर्थव्यवस्था की उत्पादकता में अब तक कोई बड़ी बढ़त नहीं हुई है।

जिन सात कंपनियों को उन्होंने अलग रखा, उनमें एआई चिप, क्लाउड कंप्यूटिंग और चैटबॉट बनाने और बेचने वाली सबसे बड़ी कंपनियां शामिल हैं। स्लोक का कहना है कि बाकी अमेरिकी कॉरपोरेट जगत, यानी वे कंपनियां जिन्हें इनका ग्राहक होना है, उसके पास इस तकनीक से मुनाफे के मोर्चे पर दिखाने को अभी बहुत कम है।