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क्षुद्रग्रह बेन्नू की धूल सौरमंडल के भीतरी और बाहरी हिस्सों का मिश्रण: अध्ययन

नासा के ओसाइरिस-रेक्स से लाए गए क्षुद्रग्रह के आधे ग्राम नमूने का अध्ययन करने वाले ईटीएच ज़्यूरिख के वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सौरमंडल के मूल रासायनिक मिश्रण की अब तक की सबसे करीबी झलक हो सकती है।

संपादकीय डेस्क से · ज़्यूरिखप्रकाशित
नासा के ओसाइरिस-रेक्स यान से ली गई क्षुद्रग्रह बेन्नू की तस्वीर (फाइल) (फ़ाइल फ़ोटो)
नासा के ओसाइरिस-रेक्स यान से ली गई क्षुद्रग्रह बेन्नू की तस्वीर (फाइल) (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: NASA/Goddard/University of Arizona / Wikimedia Commons, Public domain

मुख्य बातें

  1. लोहा, टाइटेनियम और क्रोमियम के समस्थानिक दिखाते हैं कि बेन्नू का पदार्थ न पूरी तरह भीतरी, न बाहरी सौरमंडल से मेल खाता है।
  2. बेन्नू, क्षुद्रग्रह र्युगु और सीआई उल्कापिंडों की छाप एक जैसी है, जो प्राचीन धूल के साझा भंडार की ओर इशारा करती है।
  3. टीम ने 2023 में यूटा में उतरे करीब 120 ग्राम नमूने में से आधे ग्राम पर काम किया।

नासा द्वारा तीन साल पहले धरती पर लाई गई क्षुद्रग्रह बेन्नू की धूल सौरमंडल के भीतरी और बाहरी हिस्सों के पदार्थ का मिश्रण है। ईटीएच ज़्यूरिख के वैज्ञानिकों ने यह पाया है।

ईटीएच ज़्यूरिख में समस्थानिक भू-रसायन की प्रोफेसर और साइंस एडवांसेज़ जर्नल में छपे अध्ययन की पहली लेखिका मारिया शोनबैख्लर ने कहा, “बेन्नू एक मिश्रित पिंड है: इसका पदार्थ साफ तौर पर न भीतरी सौरमंडल से मेल खाता है, न बाहरी से।”

उनकी टीम ने लोहा, टाइटेनियम और क्रोमियम के समस्थानिकों को मापा, जो किसी पिंड के कच्चे माल के शुरुआती सौरमंडल में स्रोत की रासायनिक छाप की तरह काम करते हैं। लोहा और टाइटेनियम बेन्नू के पदार्थ में एक समान फैले पाए गए।

यह छाप जापान के हायाबुसा2 मिशन से जांचे गए क्षुद्रग्रह र्युगु और सीआई उल्कापिंडों से काफी मिलती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे पता चलता है कि ये सब प्राचीन ब्रह्मांडीय धूल के एक ही भंडार से बने।

मिश्रण कहां हुआ

लेखकों का प्रस्ताव है कि ये पिंड वॉटर-आइस लाइन के पास बने, यानी शुरुआती सौरमंडल की वह सीमा जिसके आगे पानी जम जाता था और जहां भीतरी और बाहरी इलाकों का पदार्थ मिलता था।

उनके मुताबिक इसमें बृहस्पति की भूमिका रही। यह विशाल ग्रह सूर्य के जन्म के करीब दस लाख साल के भीतर बनना शुरू हो गया था, और इसके बढ़ते गुरुत्व ने शायद बड़े कणों को रोके रखा, जबकि बारीक धूल आपस में घुलती-मिलती रही। इससे समझ आ सकता है कि बेन्नू का रसायन सूर्य जैसा क्यों है।

शोनबैख्लर ने कहा, “बेन्नू हमें रासायनिक तत्वों के मूल मिश्रण की सबसे अच्छी झलक दे सकता है।”

ईटीएच ज़्यूरिख की प्रयोगशाला को बेन्नू के उस करीब 120 ग्राम नमूने में से आधा ग्राम मिला था, जो 23 सितंबर 2023 को अमेरिका के यूटा रेगिस्तान में उतरा था। बेन्नू हर 1.2 साल में सूर्य का एक चक्कर लगाता है और करीब हर छह साल में धरती से लगभग 3,00,000 किलोमीटर की दूरी से गुज़रता है।

टीम अब जानना चाहती है कि क्या दूसरे क्षुद्रग्रहों में भी यही छाप है। शोनबैख्लर ने कहा, “अब हम सोच रहे हैं कि क्या दूसरे क्षुद्रग्रहों का समस्थानिक हस्ताक्षर भी बेन्नू और र्युगु जैसा है।”