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फ्लिपकार्ट ग्रुप की आय 18% बढ़कर ₹1.45 लाख करोड़, घाटा थोड़ा घटा

जिस साल फ्लिपकार्ट ने अपनी होल्डिंग कंपनी भारत वापस लाई, उसमें कामकाज सुधरा, लेकिन बढ़ी ब्याज लागत के चलते शुद्ध घाटा ₹8,468 करोड़ पर रहा।

संपादकीय डेस्क से · बेंगलुरुप्रकाशित
बेंगलुरु में फ्लिपकार्ट का मुख्यालय (फ़ाइल फ़ोटो)
बेंगलुरु में फ्लिपकार्ट का मुख्यालय (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Gpkp / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. 2025-26 में परिचालन से समेकित आय 18.2% बढ़कर ₹1.45 लाख करोड़ हुई।
  2. वित्त लागत लगभग दोगुनी होने से शुद्ध घाटा सिर्फ 2.1% घटकर ₹8,468 करोड़ रहा।
  3. लॉजिस्टिक्स और भंडारण खर्च 28.9% बढ़कर ₹15,154 करोड़ हो गया।

फ्लिपकार्ट ग्रुप की परिचालन आय 2025-26 में 18.2% बढ़कर ₹1.45 लाख करोड़ हो गई, जो एक साल पहले ₹1.23 लाख करोड़ थी। वहीं समेकित शुद्ध घाटा मामूली 2.1% घटकर ₹8,646 करोड़ से ₹8,468 करोड़ पर आया।

उसी साल के आखिरी महीने, मार्च में, कंपनी ने अपनी होल्डिंग संरचना सिंगापुर से वापस भारत लाने की प्रक्रिया पूरी की। यह देश में संभावित लिस्टिंग से पहले हुआ। ग्रुप में मिंत्रा, क्लियरट्रिप और लॉजिस्टिक्स व प्लेटफॉर्म सेवाओं के कारोबार शामिल हैं।

मार्जिन बेहतर, घाटा लगभग जस का तस

फ्लिपकार्ट के मुताबिक साल भर में सकल मार्जिन 23% बढ़ा और एडजस्टेड एबिटडा में करीब ₹1,500 करोड़ का सुधार हुआ। एडजस्टेड ऑपरेटिंग मार्जिन माइनस 7.7% से सुधरकर माइनस 5.4% हुआ और एडजस्टेड ऑपरेटिंग घाटा करीब 17% घटा।

शुद्ध घाटा इसलिए ज्यादा नहीं घटा क्योंकि वित्त लागत ₹649 करोड़ से लगभग दोगुनी होकर ₹1,209 करोड़ हो गई। कंपनी ने पिछले वर्षों की डेफर्ड टैक्स परिसंपत्तियों को बट्टे खाते में डालने और कुछ असाधारण मदों का भी हवाला दिया। फ्लिपकार्ट ने कहा कि ये नतीजे “कारोबार की मौजूदा स्थिति नहीं, बल्कि उसकी ऐतिहासिक तस्वीर पेश करते हैं।”

कुल खर्च 16% बढ़कर ₹1.54 लाख करोड़ रहा। दोबारा बेचने के लिए सामान की खरीद ₹1.17 लाख करोड़ के साथ सबसे बड़ा खर्च रही। लॉजिस्टिक्स और भंडारण शुल्क 28.9% बढ़कर ₹15,154 करोड़ हो गया, जो बाकी खर्चों के आधे से ज्यादा है, जबकि कर्मचारियों पर खर्च लगभग स्थिर ₹8,376 करोड़ रहा।

मार्केटप्लेस इकाई घाटे में

उपभोक्ता मार्केटप्लेस चलाने वाली फ्लिपकार्ट इंटरनेट की आय 19.3% घटकर ₹16,295 करोड़ रह गई। उसका घाटा पिछले साल के संशोधित आंकड़े ₹1,694 करोड़ से बढ़कर ₹5,498 करोड़ हो गया।