विज्ञान-तकनीकभौतिकी
दक्षिणी ध्रुव की बर्फ को न्यूट्रिनो टेलीस्कोप बनाने वाले फ्रांसिस हालज़ेन को भौतिकी का नोबेल
अंटार्कटिका की एक घन किलोमीटर बर्फ में दबी आइसक्यूब वेधशाला ने सौरमंडल के बाहर से आए उच्च ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो पहली बार पकड़े, और उनमें से कुछ को दूर की आकाशगंगाओं तक ट्रेस किया।

मुख्य बातें
- यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन के 82 वर्षीय फ्रांसिस हालज़ेन 1992 के बाद भौतिकी का नोबेल अकेले जीतने वाले पहले वैज्ञानिक हैं।
- आइसक्यूब बर्फ में लगे 5,160 प्रकाश सेंसरों से उन हल्की चमकों को पकड़ता है जो न्यूट्रिनो के परमाणुओं से टकराने पर बनती हैं।
- इसने उच्च ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो का स्रोत दो दूर की आकाशगंगाओं और हमारी मिल्की वे में खोजा है।
बेल्जियम में जन्मे भौतिक विज्ञानी फ्रांसिस हालज़ेन, जिन्होंने दशकों लगाकर अंटार्कटिका की बर्फ के एक विशाल टुकड़े को टेलीस्कोप में बदल दिया, को 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने 6 अक्टूबर को घोषणा की कि यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन के 82 वर्षीय हालज़ेन को यह सम्मान “आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला में निर्णायक योगदान और खगोलीय स्रोतों से आने वाले उच्च ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो की खोज के लिए” दिया जा रहा है।
1992 में जॉर्ज शार्पाक के बाद वह भौतिकी का नोबेल अकेले जीतने वाले पहले व्यक्ति हैं। इटली से फोन पर नोबेल समिति से बात करते हुए हालज़ेन ने कहा, “यह बहुत बड़ा आश्चर्य था, और ज़ाहिर है मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी।”
‘भूत कणों’ को पकड़ना
न्यूट्रिनो हर जगह हैं, फिर भी इन्हें पकड़ना लगभग नामुमकिन है। इन पर कोई विद्युत आवेश नहीं होता और इनका द्रव्यमान बेहद कम होता है, इसलिए ये पदार्थ के आर-पार लगभग बिना टकराए निकल जाते हैं। सूरज जैसे तारों से बने खरबों न्यूट्रिनो हर सेकंड हर इंसान के शरीर से होकर गुजरते हैं।
यही खूबी इन्हें काम का भी बनाती है। नोबेल भौतिकी समिति के अध्यक्ष मार्क पीयर्स ने कहा, “न्यूट्रिनो के गुण बड़े अनोखे हैं, यह तथ्य कि यह पदार्थ से बहुत कम ही क्रिया करता है।” चूंकि इन्हें बहुत कम चीजें रोक पाती हैं, ये दूर के ब्रह्मांडीय स्रोतों से ऐसी जानकारी लेकर आते हैं जो किसी और तरीके से नहीं मिल सकती।
जो चीज कभी-कभार ही किसी से टकराती हो, उसे पकड़ने के लिए बहुत बड़ा निशाना चाहिए। हालज़ेन और उनके एक सहयोगी को 1988 में दक्षिणी ध्रुव के नीचे की बर्फ इस्तेमाल करने का विचार आया। वैज्ञानिकों ने बर्फ पिघलाकर करीब 100 छेद बनाए और पानी के दोबारा जमने से पहले उनमें प्रकाश सेंसरों की लड़ियां उतार दीं। 2010 के अंत में पूरा हुआ आइसक्यूब 86 लड़ियों पर लगे 5,160 सेंसरों से बना है, जो सतह से बहुत नीचे करीब एक घन किलोमीटर बर्फ में फैले हैं।
जब कोई न्यूट्रिनो बर्फ के किसी परमाणु के नाभिक से टकराता है, तो उससे आवेशित कण बनते हैं जो एक हल्की नीली चमक छोड़ते हैं, जिसे चेरेनकोव प्रकाश कहते हैं। सेंसर इस चमक को दर्ज करते हैं, और उसके पैटर्न से पता चलता है कि न्यूट्रिनो किस दिशा से आया। नोबेल समिति की सदस्य ईवा ओल्सन ने कहा कि हालज़ेन ने “समझा कि दक्षिणी ध्रुव की बर्फ इन न्यूट्रिनो संदेशवाहकों को दिखा सकती है।”
बर्फ ने क्या देखा
2013 में, पूरी तरह काम शुरू करने के दो साल बाद, आइसक्यूब ने 28 न्यूट्रिनो दर्ज किए, जिनमें से हर एक की ऊर्जा कम से कम 30 टेराइलेक्ट्रॉनवोल्ट थी। ये सौरमंडल के बाहर से आए पहले उच्च ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो थे जो पकड़े गए। तब से टीम इनमें से कुछ को उनके स्रोतों तक ट्रेस कर चुकी है: करीब 4 अरब प्रकाश वर्ष दूर एक ब्लेज़ार, यानी ऐसी आकाशगंगा जिसके केंद्र में एक महाविशाल ब्लैक होल है; सक्रिय आकाशगंगा एनजीसी 1068; और हमारी अपनी मिल्की वे।
आइसक्यूब: विचार से नोबेल तक
- 1988हालज़ेन और एक सहयोगी ने न्यूट्रिनो पकड़ने के लिए दक्षिणी ध्रुव की बर्फ के इस्तेमाल का प्रस्ताव रखा।
- दिसंबर 2010आइसक्यूब पूरा हुआ: 86 लड़ियों पर 5,160 सेंसर।
- 2013सौरमंडल के बाहर से आए पहले उच्च ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो: 28 घटनाएं।
- 2018सितंबर 2017 में पकड़े गए एक न्यूट्रिनो को ब्लेज़ार TXS 0506+056 से जोड़ा गया।
- 20224.7 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर आकाशगंगा एनजीसी 1068 को स्रोत के रूप में पहचाना गया।
- 2023पता चला कि मिल्की वे से भी उच्च ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो निकलते हैं।
- 6 अक्टूबर 2026हालज़ेन को भौतिकी का नोबेल पुरस्कार।
अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिक्स के मुख्य कार्यकारी माइकल मोलोनी ने कहा, “अंटार्कटिका का यह प्रयोग ब्रह्मांड को समझने का एक क्रांतिकारी तरीका है, जो पहले हमारे पास नहीं था।”
पूरी टीम का सम्मान
आइसक्यूब पर करीब 27.9 करोड़ डॉलर की लागत आई। इसे यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन चलाती है और अमेरिका की नेशनल साइंस फाउंडेशन इसका खर्च उठाती है। इसके सहयोगी समूह में 14 देशों के 58 संस्थानों के करीब 450 वैज्ञानिक हैं। हालज़ेन 2001 से इसके प्रमुख अन्वेषक (प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर) हैं।
आखिरकार उस सम्मान को दिला पाना मेरे लिए बड़ी राहत है जिसका यह शानदार सहयोगी समूह हकदार है।
आगे क्या
इस साल की शुरुआत में टीम ने डिटेक्टर के बीच के पास पांच नए छेदों में 600 से ज्यादा नए सेंसर लगाए, और इस अपग्रेड से पहला वैज्ञानिक डेटा 2026 में ही आने की उम्मीद है। वैज्ञानिकों ने आइसक्यूब-जेन2 का भी प्रस्ताव रखा है, जिसकी ऑप्टिकल व्यवस्था आठ गुना बड़ी होगी। हालज़ेन ने मजाक में श्रोताओं से कहा कि वह “एक प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं” और उम्मीद है कि यह पुरस्कार उसे मंजूरी दिलाने में मदद करेगा।
पुरस्कार की राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर है और यह 10 दिसंबर को स्टॉकहोम में दिया जाएगा।
मूल दस्तावेज़
- AIP Congratulates 2026 Nobel Prize Winner in PhysicsAmerican Institute of Physics, 6 अक्टूबर 2026
- University of Wisconsin–Madison Professor Francis Halzen named 2026 Nobel laureate in physicsUniversity of Wisconsin–Madison, 6 अक्टूबर 2026
- Francis Halzen, IceCube principal investigator, wins 2026 Physics Nobel PrizeIceCube Neutrino Observatory, 6 अक्टूबर 2026
- APOD: Ice Fishing for Cosmic NeutrinosNASA, 11 अक्टूबर 2026