अमेज़न के एक दिन बाद गूगल ने टॉर्चटीपीयू ओपन सोर्स किया, एनवीडिया पर दूसरा वार
इस ओपन-सोर्स टूल से डेवलपर पायटॉर्च पर बने मौजूदा एआई ऐप्स को दोबारा लिखे बिना, सिर्फ कॉन्फ़िगरेशन बदलकर गूगल के अपने चिप पर ले जा सकते हैं।
मुख्य बातें
- गूगल ने अपने चिप के लिए पायटॉर्च का अपना संस्करण टॉर्चटीपीयू ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट के रूप में जारी किया।
- यह कदम अमेज़न के ट्रेनियम चिप के लिए टॉर्चन्यूरॉन लाने के एक दिन बाद आया है।
- गूगल का कहना है कि उसने मेटा और हगिंग फेस समेत कई कंपनियों के साथ काम किया है।
गूगल ने पायटॉर्च प्रोग्रामिंग टूलकिट का अपना संस्करण टॉर्चटीपीयू ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट के रूप में उपलब्ध करा दिया है। अमेज़न ने अपने एआई चिप के लिए एक दिन पहले यही किया था। दोनों कंपनियां चाहती हैं कि डेवलपर ऐसा एआई सॉफ्टवेयर लिखना बंद करें जो डिफ़ॉल्ट रूप से एनवीडिया के ग्राफिक्स प्रोसेसर पर चलता है।
पायटॉर्च वह ओपन-सोर्स टूलकिट है जिससे ज़्यादातर डेवलपर एआई मॉडल बनाते, प्रशिक्षित करते और चलाते हैं। कुछ अनुमानों के मुताबिक 85% एआई ऐप्लिकेशन इसी पर बने हैं। मेटा ने, जब वह फेसबुक थी, 2016 में इसे बनाया था और 2022 में लिनक्स फाउंडेशन को सौंप दिया। लेकिन ज़्यादातर पायटॉर्च कोड एनवीडिया के हार्डवेयर के हिसाब से तैयार होता है।
टॉर्चटीपीयू इस कोड को गूगल के टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट पर चलने देता है। गूगल का कहना है कि डेवलपर किसी मौजूदा पायटॉर्च ऐप को बिना दोबारा लिखे, सिर्फ कॉन्फ़िगरेशन में छोटा बदलाव करके ले जा सकते हैं। इससे ऐप को गूगल क्लाउड पर ले जाना भी आसान हो जाता है।
गूगल ने कहा कि उसने मेटा, हगिंग फेस, वीएलएलएम बनाने वाली इन्फ़ेरैक्ट, एसजीलैंग बनाने वाली रेडिक्सआर्क और दूसरों के साथ सीधे काम किया, ताकि टॉर्चटीपीयू उनके टूल्स के साथ ठीक से चले। उसने डेवलपरों को ऐप्स ले जाने और रास्ते में गड़बड़ियां ठीक करने में मदद के लिए टीपीयू एजेंट सूट भी शुरू किया है। साथ ही फोन, लैपटॉप और छोटे उपकरणों पर एआई चलाने वाले अपने सॉफ्टवेयर लाइटआरटी को पायटॉर्च ऐप्स के लिए बेहतर बनाया है।
अमेज़न का टूल टॉर्चन्यूरॉन अमेज़न वेब सर्विसेज़ पर उसके ट्रेनियम चिप के लिए यही काम करता है। अमेज़न का कहना है कि वह मुख्य पायटॉर्च प्रोजेक्ट में भी कोड भेज रहा है, ताकि उसकी सुविधाएं एनवीडिया चिप से अलग हों और पायटॉर्च डिफ़ॉल्ट रूप से हर हार्डवेयर पर चले।
दो नए टूल्स की वजह से डेवलपर एक साथ एनवीडिया को छोड़ देंगे, ऐसा होने की संभावना कम है। लेकिन जब दो सबसे बड़ी क्लाउड कंपनियों में शुमार अमेज़न और गूगल एक ही हफ्ते में उसी बढ़त पर चोट कर रही हों, तो एआई सॉफ्टवेयर पर एनवीडिया की पकड़ पर दबाव बढ़ रहा है।