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जियो प्लेटफॉर्म्स ने आईपीओ का प्राइस बैंड ₹1,065 से ₹1,119 तय किया, बन सकता है देश का सबसे बड़ा इश्यू

रिलायंस की डिजिटल इकाई 27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी। ऊपरी दाम पर करीब ₹30,200 करोड़ जुटेंगे और कंपनी का मूल्यांकन लगभग ₹10.3 लाख करोड़ होगा।

संपादकीय डेस्क से · मुंबईप्रकाशित
मुंबई का जियो वर्ल्ड सेंटर
मुंबई का जियो वर्ल्ड सेंटरDesiBoy101 / Wikimedia

मुख्य बातें

  1. जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने आईपीओ के लिए ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है।
  2. आम निवेशक 21 से 23 अक्टूबर तक बोली लगा सकेंगे, एंकर निवेशकों की बोली 19 अक्टूबर को होगी।
  3. जुटाई गई रकम में से ₹27,500 करोड़ तक रिलायंस जियो इन्फोकॉम का कर्ज चुकाने में जाएंगे।

मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेलीकॉम और डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बनने की राह पर है।

रिलायंस ने बुधवार को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में यह प्राइस बैंड बताया। जियो 27 करोड़ तक नए शेयर जारी करेगी, जो बढ़ी हुई इक्विटी का करीब 2.93% है। ऊपरी दाम पर इससे लगभग ₹30,200 करोड़ आएंगे और कंपनी का मूल्यांकन करीब ₹10.3 लाख करोड़ होगा। निचले दाम पर भी इश्यू करीब ₹28,755 करोड़ जुटाएगा, जो अक्टूबर 2024 में हुंडई मोटर इंडिया के ₹27,870 करोड़ के मौजूदा रिकॉर्ड से ज़्यादा है।

कब क्या होगा

एंकर निवेशक 19 अक्टूबर को बोली लगाएंगे। इश्यू आम निवेशकों के लिए 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा। शेयरों की ट्रेडिंग 28 अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है। जियो ने इस बिक्री के लिए 19 बैंक लगाए हैं, जिनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, मॉर्गन स्टैनली, बैंक ऑफ अमेरिका, एक्सिस कैपिटल, बीएनपी पारिबा और सिटीग्रुप शामिल हैं।

ऑफर में ₹2,500 करोड़ तक का हिस्सा रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए रखा गया है। ₹500 करोड़ कर्मचारियों के लिए आरक्षित हैं, जिन्हें हर शेयर पर ₹54 की छूट मिलेगी।

पैसा कहां जाएगा

प्रॉस्पेक्टस के मुताबिक ₹27,500 करोड़ तक की रकम समूह की मोबाइल कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम का कर्ज चुकाने में लगेगी। बाकी पैसा सामान्य कॉरपोरेट कामों के लिए है।

यह मूल्यांकन साल की शुरुआत में चर्चा में रहे करीब ₹11 लाख करोड़ से कम है, क्योंकि हाल में शेयरों में आई बिकवाली ने उम्मीदें ठंडी कर दीं। फिर भी यह 2020 के ₹4.91 लाख करोड़ के मूल्यांकन से दोगुने से ज़्यादा है, जब जियो ने वैश्विक निवेशकों से 20 अरब डॉलर से अधिक जुटाए थे। उस साल मेटा ने 5.7 अरब डॉलर लगाए थे और गूगल ने 4.5 अरब डॉलर का वादा किया था।

कंपनी का कारोबार

जियो 2016 में मुफ्त डेटा और सस्ते प्लान के साथ आई थी और इसने भारतीय टेलीकॉम बाजार को हिला दिया था। अब इसकी कीमतें प्रतिद्वंद्वियों के बराबर हैं। 31 मार्च को इसके 52.4 करोड़ से ज़्यादा ग्राहक थे, जो भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और सरकारी बीएसएनएल से आगे है। कंपनी ने ब्रॉडबैंड, क्लाउड सेवाओं और दूसरे डिजिटल कारोबार में भी विस्तार किया है।

प्रॉस्पेक्टस के अनुसार अप्रैल से जून तिमाही में कंपनी की आय ₹39,170 करोड़ रही, जो एक साल पहले से करीब 12% ज़्यादा है। शुद्ध मुनाफा 9% बढ़कर ₹7,760 करोड़ रहा।

शोर भरा माहौल

यह लिस्टिंग ऐसे समय आ रही है जब एलन मस्क अंबानी पर हमले तेज़ कर रहे हैं और उन पर स्टारलिंक को भारत से बाहर रखने की कोशिश का आरोप लगा रहे हैं। भारतीय अधिकारियों ने मस्क के दावों को खारिज किया है। जियो और एयरटेल दोनों ने मार्च 2025 में मस्क की स्पेसएक्स के साथ भारत में स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा बांटने के करार किए थे, जो नियामकीय मंजूरी पर निर्भर हैं।

बेचे जाने वाले शेयरों की सही संख्या समेत अंतिम शर्तें इस महीने के आखिर में बुक बंद होने पर तय होंगी।