विज्ञान-तकनीकटेलीकॉम
स्टारलिंक को अब भी सुरक्षा मंजूरी का इंतजार, मस्क बोले 'कुछ अमीर घराने' रोक रहे हैं
सरकार का कहना है कि जियो समेत सैटेलाइट इंटरनेट की तीनों लाइसेंसधारी कंपनियां एक ही चरण में हैं। एलन मस्क ने पूछा है कि क्या मुकेश अंबानी 'भारत के असली बॉस' हैं।

मुख्य बातें
- सरकार के मुताबिक स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और जियो, तीनों सैटकॉम लाइसेंसधारियों की सुरक्षा जांच चल रही है।
- एलन मस्क ने आरोप लगाया कि "कुछ ऑलिगार्क" स्टारलिंक को रोक रहे हैं, और बाद की पोस्ट में मुकेश अंबानी का नाम लिया।
- स्पेसएक्स के मुताबिक भारत में 20 गेटवे साइट तैयार हैं; स्पेक्ट्रम सुरक्षा मंजूरी के बाद ही मिलेगा।
एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक भारत में सैटेलाइट इंटरनेट बेचने से पहले अब भी सुरक्षा मंजूरी का इंतजार कर रही है, और मस्क ने इस इंतजार को खुली लड़ाई में बदल दिया है। पिछले हफ्ते दो दिनों में उन्होंने आरोप लगाया कि “कुछ ऑलिगार्क” (प्रभावशाली अमीर घराने) इस सेवा को रोक रहे हैं, और फिर एक्स पर पूछा कि क्या रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी “भारत के असली बॉस” हैं। सरकार ने यह आरोप खारिज कर दिया और कहा कि उसके नियम हर कंपनी पर बराबर लागू होते हैं।
सरकार क्या कहती है
संचार मंत्रालय ने 8 अक्टूबर को कहा कि भारत में लाइसेंस की व्यवस्था “निष्पक्ष और भेदभाव रहित” है, और किसी के साथ अलग बर्ताव की बात को “निराधार और गलत” बताया। ऐसे तीन ऑपरेटरों के पास लाइसेंस है जिनके उपग्रह किसी एक जगह के ऊपर टिके रहने के बजाय पृथ्वी के चक्कर लगाते हैं: स्टारलिंक, भारती समर्थित यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस। मंत्रालय ने कहा कि इस प्रक्रिया के तहत “तीनों लाइसेंसधारियों के मामले में सुरक्षा आकलन फिलहाल चल रहा है।” उसके मुताबिक तीनों मोटे तौर पर एक ही चरण में हैं।
संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि दूरसंचार विभाग सभी को लाइसेंस और अस्थायी स्पेक्ट्रम दे चुका है। आखिरी कदम गृह मंत्रालय की मंजूरी है। उन्होंने कहा, “जैसे ही मंजूरी मिलेगी, उन्हें यह मिल जाएगा।” और जोड़ा, “इसका किसी एक कंपनी से कोई लेना-देना नहीं है।”
संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को कहा कि हर कंपनी “जैसे-जैसे अलग-अलग सुरक्षा शर्तें पूरी करेगी”, वैसे-वैसे काम शुरू कर सकेगी। उन्होंने कहा, “भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की इजाजत नहीं देता।”
मस्क का आरोप
मस्क की पहली पोस्ट 7 अक्टूबर की देर शाम आई, उसी दिन सुबह स्पेसएक्स की एक अधिकारी ने नई दिल्ली में इंडिया मोबाइल कांग्रेस में कहा था कि स्टारलिंक सेवा शुरू करने को तैयार है। मस्क ने लिखा, “दुर्भाग्य से, कुछ ऑलिगार्क अपना एकाधिकार वाला शिकंजा बनाए रखने के लिए हमें रोक रहे हैं”, और इसे “भारत के लोगों के खिलाफ अपराध” बताया। अगले दिन उन्होंने कहा कि स्टारलिंक के पास “165 से ज्यादा देशों में लाइसेंस है और उसने पांच साल तक हर एक कानून का पालन किया है”, और अंबानी का नाम लिया। उन्होंने कोई सबूत नहीं दिया।
रिलायंस ने इस आरोप पर कोई जवाब नहीं दिया। इंडिया मोबाइल कांग्रेस में रिलायंस जियो के चेयरमैन आकाश अंबानी ने कहा कि उन्होंने मस्क की टिप्पणी नहीं देखी है। भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने कहा कि एयरटेल का अपना सैटेलाइट उपक्रम भी मंजूरी का इंतजार कर रहा है।
जल्द ही मामला राजनीतिक हो गया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लिखा: “भारत में स्वागत है, एलन। दूसरे वाले के बारे में जानने तक रुकिए।” मस्क ने जवाब दिया: “शुक्रिया, राहुल। यह सचमुच चिंताजनक है।” भाजपा नेता राम माधव ने पलटवार करते हुए पूछा, “ये ‘सरेंडर गांधी’ कैसे बन गए?”, और कहा कि स्पेक्ट्रम का आवंटन कानून के मुताबिक होना चाहिए, बाहरी दबाव में नहीं।
सुरक्षा पर ही क्यों अटका है मामला
सैटेलाइट ब्रॉडबैंड में इंटरनेट उपग्रहों से सीधे घर पर लगे छोटे डिश तक पहुंचता है, इसीलिए इसे दूरदराज और कम कनेक्टिविटी वाले इलाकों के लिए पेश किया जाता है। लेकिन यह ट्रैफिक भारत की जमीन पर बने अर्थ स्टेशनों से होकर गुजरता है, जिन्हें गेटवे कहते हैं। ये सैटेलाइट नेटवर्क को भारतीय टेलीकॉम नेटवर्क से जोड़ते हैं, और सरकार यहीं नियंत्रण चाहती है। दूरसंचार विभाग के मई में जारी दिशानिर्देश ऑपरेटरों से ट्रैफिक की रियल-टाइम निगरानी, देश के भीतर डेटा सेंटर, और सेवा शुरू होने के पांच साल के भीतर जमीनी उपकरणों में कम से कम 20% स्वदेशी हिस्सेदारी मांगते हैं।
स्पेसएक्स में स्टारलिंक बिजनेस ऑपरेशंस की उपाध्यक्ष लॉरेन ड्रेयर ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस में बताया कि सैकड़ों एंटेना वाली 20 गेटवे साइट तैयार हैं। उन्होंने कहा, “हमने भारत की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खास तौर पर भारत के लिए स्टारलिंक का संचालन तैयार किया है।” उन्होंने कहा, “भारत जब तैयार होगा, हम उसकी सेवा के लिए तैयार खड़े हैं।”
आगे क्या
सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद ही किसी कंपनी को स्पेक्ट्रम दिया जा सकता है। सैटेलाइट ऑपरेटर स्पेक्ट्रम के लिए कितना भुगतान करेंगे, इस पर केंद्रीय मंत्रिमंडल का फैसला अभी बाकी है, और सरकार ने कोई समयसीमा नहीं बताई है। स्टारलिंक ने भारत के लिए अपनी कीमतों की घोषणा नहीं की है।