सुनील मित्तल की चेतावनी, एआई के नियम बनाने के लिए 'हादसे' का इंतज़ार न करें
नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में एयरटेल चेयरमैन ने कहा कि एआई को दबाना नहीं चाहिए, वहीं ओपनएआई ने कहा कि भारतीय कंपनियां अब प्रयोग नहीं, नतीजे चाहती हैं।

मुख्य बातें
- भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील मित्तल ने कहा कि एआई नियमों पर वैश्विक बातचीत उतनी तेज़ी से नहीं हो रही जितनी होनी चाहिए।
- ओपनएआई की भारत नीति प्रमुख प्रज्ञा मिश्रा ने कहा कि एआई का अगला दौर प्रयोग नहीं, नतीजों का है।
- उनके मुताबिक कार्स24 हर महीने ओपनएआई मॉडल पर करीब दस लाख मिनट की बातचीत चलाती है।
भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील मित्तल ने बुधवार को कहा कि सरकारों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के लिए नियम कुछ गलत होने से पहले बना लेने चाहिए, हालांकि उन्होंने इसकी बढ़त रोकने के खिलाफ भी आगाह किया।
13 से 15 अक्टूबर तक नई दिल्ली में चल रहे ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में मित्तल ने कहा, “हमें नियमन के बारे में सोचना होगा। मुझे नहीं लगता कि हमें इसे दबाना या इसकी बढ़त रोकनी चाहिए।” लेकिन, उन्होंने जोड़ा, “किसी के लिए भी यह सोचना मूर्खता होगी कि हम इसे यूं ही बहने दे सकते हैं।” उन्होंने पूछा, “क्या हम तभी जागेंगे जब कोई हादसा हो जाएगा, या उससे पहले कुछ करेंगे।”
उन्होंने कहा कि अचानक “सरकारी गलियारों में हड़बड़ी” दिख रही है कि जब एआई ज़िंदगी के हर हिस्से में पहुंच रहा है तो देशों को सुरक्षित कैसे रखा जाए, और अंतरराष्ट्रीय बातचीत पीछे चल रही है। उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से, यह बातचीत उस रफ्तार से नहीं हो रही जिससे होनी चाहिए।”
भारतीय कारोबार से ओपनएआई की बात
इसी फोरम में भारत में ओपनएआई की सार्वजनिक नीति और रणनीति की प्रमुख प्रज्ञा मिश्रा ने कहा कि कंपनियां पायलट से आगे निकल चुकी हैं। उन्होंने कहा, “एआई का अगला दौर दरअसल प्रयोगों का नहीं, बल्कि नतीजे देने का होगा।” उन्होंने ऐसे नतीजों की बात की जिन्हें कंपनियां “अपनी शेयरधारक रिपोर्ट में लिख सकें”।
उन्होंने बताया कि पुरानी कारों का प्लेटफॉर्म कार्स24 हर महीने करीब दस लाख मिनट की बातचीत ओपनएआई से चलने वाले एक एजेंट के ज़रिये करता है, जो बेचने वालों को कारें लिस्ट करने में मदद करता है। इससे कंपनी से दूर हो चुके करीब 12% विक्रेता लौट रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक भारतीय हेल्थकेयर कंपनी ने ओपनएआई के कोडिंग टूल कोडेक्स को तीन हफ्ते आज़माने के बाद अपना ग्राहक प्रबंधन सिस्टम खुद बना लिया, बजाय ऐसा सिस्टम खरीदने के जिसकी लागत “करीब 80 लाख रुपये” आती।
मिश्रा ने कहा कि ओपनएआई अब भारत में डेटा रेज़िडेंसी और स्थानीय प्रोसेसिंग की सुविधा देता है। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि एआई उतना ही आम हो जितनी आज बिजली है, जहां इंटेलिजेंस सच में हर किसी को उपलब्ध हो।”