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सुरक्षा चिंताएँ दूर न हों तो स्टारलिंक को रोके केंद्र: स्वदेशी जागरण मंच
आरएसएस से जुड़े संगठन के अश्विनी महाजन का कहना है कि स्टारलिंक के उपग्रहों के बीच लेज़र लिंक भारतीय इंटरनेट ट्रैफ़िक को वैध निगरानी की पहुँच से बाहर ले जा सकते हैं।

मुख्य बातें
- एसजेएम के सह-संयोजक अश्विनी महाजन चाहते हैं कि सुरक्षा शर्तें पूरी न होने पर स्टारलिंक की अनुमति रोकी जाए।
- उनके मुताबिक उपग्रहों के बीच लेज़र लिंक भारतीय ट्रैफ़िक को विदेशी ढांचे से गुज़ार सकते हैं।
- महाजन ने कहा कि स्टारलिंक की अर्ज़ी न मंज़ूर हुई है, न ख़ारिज।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच ने केंद्र से कहा है कि अगर एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएँ दूर नहीं करती, तो उसे भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड बेचने की अनुमति न दी जाए।
राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने मंगलवार को कहा कि सुरक्षा के आधार पर इनकार करने का भारत को पूरा अधिकार है और ऐसा करने से अमेरिका जैसे व्यापारिक साझेदारों को भी एक संदेश जाएगा। उन्होंने कहा कि स्टारलिंक की लाइसेंस अर्ज़ी अभी मंज़ूर नहीं हुई है, पर ख़ारिज भी नहीं हुई है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि कंपनी शायद कुछ ख़ास नियामकीय शर्तें पूरी नहीं कर पा रही या करना नहीं चाहती।
सुरक्षा का तर्क
महाजन की मुख्य आपत्ति तकनीकी है। स्टारलिंक के उपग्रह आपस में लेज़र से डेटा भेजते हैं। उनका तर्क है कि इससे भारतीय इंटरनेट ट्रैफ़िक विदेशी ढांचे से होकर गुज़र सकता है और वैध निगरानी मुश्किल हो सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि भारतीय ट्रैफ़िक भारत की ज़मीन पर बने गेटवे से होकर जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि सैटेलाइट इंटरनेट का इस्तेमाल दुश्मन ताक़तें, तस्कर और उग्रवादी गुट कर सकते हैं, और यह उन इंटरनेट बंदियों में भी रुकावट बन सकता है जो प्रशासन कभी-कभी क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगाता है।
महाजन ने भारत के 5जी ट्रायल में चीनी कंपनियों हुआवेई और ज़ेडटीई की भागीदारी के ख़िलाफ़ मंच के पुराने अभियान की याद दिलाई और कहा कि बाद में भारतीय डेवलपरों ने ख़ुद 5जी बनाया। उनका तर्क है कि स्टारलिंक को बाहर रखने से इसी तरह देसी सैटेलाइट इंटरनेट को बढ़ावा मिल सकता है, जो सस्ते में दिया जा सकता है।
बढ़ता विवाद
यह बयान मस्क और सरकार के बीच कई दिनों से चल रही तीखी बयानबाज़ी के बाद आया है। मस्क ने “कुछ कुलीन कारोबारियों” पर स्टारलिंक को रोकने का आरोप लगाया, मुकेश अंबानी को “प्रधानमंत्री अंबानी” कहा, और सप्ताहांत में ऐसी रिपोर्टें साझा कीं जिनमें रिलायंस से पैसा पाने वाली फ़र्मों और भाजपा के अभियानों के बीच संबंध के आरोप थे। रिलायंस ने सार्वजनिक रूप से कोई जवाब नहीं दिया है।
महाजन ने भारतीय कारोबारियों और सरकार के बारे में मस्क की टिप्पणियों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। सरकार कह चुकी है कि सैटेलाइट सेवाओं के लिए उसकी अनुमति प्रक्रिया निष्पक्ष और भेदभाव-रहित है, और चुनिंदा बर्ताव के आरोपों को उसने निराधार और भ्रामक बताया है।