विज्ञान-तकनीकटेक नीति
एआई के खतरे एक सीमा पार कर चुके, भारत को कानून चाहिए: अश्विनी वैष्णव
आईटी मंत्री ने कहा कि आने वाले हफ्तों में एक परामर्श पत्र जारी होगा। अब तक भारत एआई से मौजूदा कानूनों और नियमों में बदलाव के जरिए निपटना पसंद करता रहा है।

मुख्य बातें
- वैष्णव ने कहा कि एआई के खतरे एक सीमा पार कर चुके हैं, जिसके लिए कानून और नए नियम जरूरी हैं।
- आने वाले हफ्तों में एक परामर्श पत्र आएगा, जिसमें नागरिकों, उद्योग और विशेषज्ञों से राय मांगी जाएगी।
- फरवरी में आईटी नियमों में बदलाव कर प्लेटफॉर्म के लिए चिह्नित डीपफेक तीन घंटे में हटाना जरूरी किया गया था।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के लिए एक अलग कानून की जरूरत है। यह सरकार के अब तक के उस रुख से बदलाव का संकेत है, जिसमें मौजूदा कानूनों और उनमें जरूरी संशोधनों पर भरोसा किया जाता रहा है।
शुक्रवार को नई दिल्ली में एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में वैष्णव ने कहा कि एआई के खतरे “उस सीमा को पार कर चुके हैं जहां हमें एक कानून और नए नियम लाने चाहिए।” उन्होंने कहा, “हम आने वाले हफ्तों में एक परामर्श पत्र जारी करेंगे।”
सरकार इस तकनीक के नियमन का तरीका तय करने से पहले इस पत्र के जरिए नागरिकों, उद्योग, विशेषज्ञों और दूसरे हितधारकों से राय लेगी। वैष्णव ने कहा कि मंत्रालय खास तौर पर उन क्षेत्रों की बात सुनना चाहता है जो पहले से एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं, जैसे बैंकिंग, मैन्युफैक्चरिंग, सेवाएं, वित्त और बीमा।
उन्होंने जोर दिया कि एआई इंसान के नियंत्रण में रहना चाहिए और अप्रत्याशित ढंग से काम करने वाले सिस्टम के लिए सुरक्षा उपाय होने चाहिए, जिनमें बेकाबू हो रहे सिस्टम को रोकने का तरीका भी शामिल हो। उन्होंने कहा, “इनोवेशन की दौड़ को इंसानों की सुरक्षा के हिसाब से संतुलित करना होगा।” एआई सिस्टम सीमाओं से परे काम करते हैं, इसलिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भी बात की।
8 अक्टूबर को वैष्णव ने कहा था कि परामर्श पत्र एक महीने के भीतर आ जाएगा, और इसमें सुरक्षा व डीपफेक से होने वाले नुकसान पर ध्यान रहेगा।
अब तक भारत ने एआई से जुड़े मसलों को मौजूदा नियमों में बदलाव के जरिए संभाला है। फरवरी में सरकार ने आईटी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधन कर डीपफेक समेत एआई से बनी और कृत्रिम सामग्री को इसके दायरे में लाया। अब प्लेटफॉर्म को अदालत या सक्षम प्राधिकारी के निर्देश के तीन घंटे के भीतर चिह्नित सामग्री हटानी होती है, जबकि पहले यह समय 36 घंटे था।