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मल्लखंब, कपोएरा और गोरोदकी: अहमदाबाद में ब्रिक्स पारंपरिक खेलों की शुरुआत

ब्रिक्स देशों के दलों ने सोमवार को अहमदाबाद में अपने देसी खेलों का प्रदर्शन किया। खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने पारंपरिक खेलों को सहेजने के लिए एक साझा रिपॉज़िटरी का प्रस्ताव रखा।

संपादकीय डेस्क से · अहमदाबादप्रकाशित
मलखंब के खंभे पर एक खिलाड़ी (फ़ाइल फ़ोटो)
मलखंब के खंभे पर एक खिलाड़ी (फ़ाइल फ़ोटो)Tamizhan Mallakhamb / Wikimedia

मुख्य बातें

  1. 12 अक्टूबर को अहमदाबाद में ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी खेल प्रदर्शन खेल आयोजित हुए।
  2. मांडविया ने पारंपरिक खेलों का इतिहास, नियम और उपकरण दर्ज करने के लिए स्वैच्छिक ब्रिक्स रिपॉज़िटरी का प्रस्ताव रखा।
  3. यह आयोजन प्रतिस्पर्धी नहीं था: दलों ने गोरोदकी से लेकर कपोएरा और कलारीपयट्टु तक का प्रदर्शन किया।

भारत के मल्लखंब खिलाड़ी, ब्राज़ील के कपोएरा और लॉग रेस के खिलाड़ी और चीन के वुशु कलाकार सोमवार को अहमदाबाद के एक ही मैदान पर दिखे। मौक़ा था वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी खेल प्रदर्शन खेलों का।

एक दिन का यह आयोजन भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने गुजरात सरकार के साथ मिलकर किया। यह कोई प्रतियोगिता नहीं थी। ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देशों के दल यह दिखाने आए थे कि उनके खेल कैसे खेले जाते हैं, और इन्हें ज़िंदा कैसे रखा जाए।

पुराने खेलों से भरा मैदान

भारत ने मल्लखंब, योगासन और कलारीपयट्टु पेश किए। चीन वुशु, लायन डांस और हेल्थ चीगोंग लेकर आया, जबकि ब्राज़ील ने कपोएरा, आदिवासी ब्लोपाइप का प्रदर्शन, लॉग रेस और पैरा जिउ-जित्सु दिखाया।

रूस ने साम्बो और गोरोदकी दिखाए, और बेलारूस ने भी गोरोदकी पेश किया। ईरान के खिलाड़ियों ने ज़ूरख़ाने, हफ़्त संग और ग़ानिये का प्रदर्शन किया। कज़ाख़स्तान क़ज़ाक़ कुरेसी, असिक अतु और तोग़िज़कुमालक लेकर आया। बोलीविया के कार्यक्रम में लुचा दे चोलितास, तिंकू और त्रोम्पो शामिल थे, और दक्षिण अफ़्रीका ने क्गाती और इंतोंगा दिखाए। संयुक्त अरब अमीरात ने अल तब्बाह पेश किया।

प्रदर्शनों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए और आख़िर में सभी दलों को सम्मानित किया गया।

मांडविया के तीन प्रस्ताव

केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी की मौजूदगी में खेलों के उद्घाटन की घोषणा की और इस मौक़े पर ब्रिक्स समूह के सामने तीन सुझाव रखे।

पहला, हमें पारंपरिक और स्वदेशी खेलों की एक स्वैच्छिक ब्रिक्स रिपॉज़िटरी बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।

मनसुख मांडविया, केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री, 12 अक्टूबर 2026

इस रिपॉज़िटरी में हर खेल का इतिहास, उसका सांस्कृतिक महत्व, नियम, उपकरण और खेल के मैदान की ज़रूरतें दर्ज होंगी। उनके बाकी दो प्रस्ताव थे: सदस्य देशों के खिलाड़ियों, कोचों, शोधकर्ताओं और सांस्कृतिक विशेषज्ञों के बीच आदान-प्रदान, और आगे होने वाले ब्रिक्स खेल आयोजनों में पारंपरिक खेलों का नियमित प्रदर्शन।

संघवी ने भी पाँच सुझाव दिए, जिनमें एक साझा बहुभाषी डिजिटल आर्काइव बनाना और पारंपरिक खेलों को पढ़ाई के पाठ्यक्रम में शामिल करना शामिल है।

भारत की बात

मांडविया ने भारत के खेल कार्यक्रम की भी चर्चा की। उन्होंने कहा, “भारत खेल को राष्ट्र निर्माण के केंद्र में रख रहा है।” उन्होंने बताया कि सरकार ने खेलो इंडिया के तहत बुनियादी ढांचे, ज़मीनी स्तर पर भागीदारी, कोचिंग, खेल विज्ञान और खिलाड़ियों के कल्याण के लिए क़रीब 3.76 अरब डॉलर देने का वादा किया है।

उन्होंने कहा, “फ़िट इंडिया मूवमेंट के ज़रिए हम फ़िटनेस को जीवनशैली बना रहे हैं।” उन्होंने संडेज़ ऑन साइकिल अभियान का ज़िक्र किया, जिसमें उनके मुताबिक़ 3 लाख से ज़्यादा जगहों पर 50 लाख से ज़्यादा लोग साइकिल चलाते हैं। इस अभियान के अब तक 94 संस्करण हो चुके हैं।

आगे क्या

ये प्रस्ताव ब्रिक्स सदस्यों के सामने सहयोग के स्वैच्छिक क्षेत्रों के रूप में रखे गए। अहमदाबाद आयोजन के दौरान खेल और पारंपरिक खेलों पर द्विपक्षीय बैठकें भी तय थीं।

मूल दस्तावेज़