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छोटा दल, बड़ी झोली: पैरा एशियाई खेलों में 114 पदकों के साथ भारत ने हांगझोउ को पीछे छोड़ा
भारत आइची-नागोया में 168 खिलाड़ी लेकर गया, जो हांगझोउ के दल का करीब आधा था, फिर भी तीन पदक ज्यादा लेकर लौटा। एथलेटिक्स और तैराकी ने फर्क पैदा किया।

मुख्य बातें
- भारत ने 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य जीते, 2023 में हांगझोउ में यह संख्या 29, 31 और 51 थी।
- पैरा एथलेटिक्स से 65 पदक आए, जो 55 से ज्यादा और कुल का आधे से अधिक हैं।
- पैरा तैराकी में पदक एक से बढ़कर 11 और पैरा टेबल टेनिस में दो से सात हुए।
आइची-नागोया पैरा एशियाई खेलों में भारत का रिकॉर्ड प्रदर्शन पुराना रिकॉर्ड बनाने वाले दल से कहीं छोटे दल के साथ आया। देश ने 168 खिलाड़ी भेजे, जिनमें 112 पुरुष और 56 महिलाएं थीं, जबकि तीन साल पहले हांगझोउ में करीब 300 खिलाड़ी गए थे। इसके बावजूद भारत ने 114 पदक जीते: 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य। 2023 में यह आंकड़ा 111 था, जिसमें 29 स्वर्ण, 31 रजत और 51 कांस्य थे। पदक तालिका में भारत चौथे स्थान पर रहा।
दल छोटा होने की मुख्य वजह यह रही कि हांगझोउ में जिन कई खेलों में भारत ने पदक जीते थे, उनमें से ब्लाइंड शतरंज, पैरा रोइंग और पैरा कैनोइंग जैसे खेल कार्यक्रम से हटा दिए गए। कोटा नियम भी सख्त थे। 2023 में अकेले शतरंज से आठ और कैनोइंग से चार पदक आए थे।
पदक कहां से आए
पैरा एथलेटिक्स ने टीम का बोझ उठाया। इसके 65 पदक, जिनमें 22 स्वर्ण थे, हांगझोउ से 10 ज्यादा रहे और भारत के कुल पदकों के आधे से अधिक इसी से आए। स्वर्ण जीतने वालों में सुमित अंतिल, हेनी, प्रणव सूरमा और संदीप शामिल रहे, कुछ ने विश्व या खेलों का रिकॉर्ड भी बनाया।
सबसे बड़ी छलांग तैराकी और टेबल टेनिस में लगी। पैरा तैराकी में 2023 के एक कांस्य के मुकाबले इस बार 11 पदक आए, तीन रजत और आठ कांस्य, जबकि पैरा टेबल टेनिस में दो कांस्य से बढ़कर सात पदक हुए।
पैरा बैडमिंटन में पदक 21 से घटकर 16 रह गए, हालांकि नितेश कुमार, नवीन शिवकुमार, तुलसीमति मुरुगेसन और मानसी जोशी ने एक से ज्यादा पदक जीते। तीरंदाजी (छह), निशानेबाजी (पांच) और पावरलिफ्टिंग (दो) में एक-एक पदक कम रहा, जबकि जूडो में हांगझोउ जितने ही दो पदक आए। निशानेबाजी में मोना अग्रवाल का स्वर्ण विश्व रिकॉर्ड के साथ आया।