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रवांडा में होगी फ़ॉर्मूला 1 रेस, 10 साल का करार, 1993 के बाद अफ़्रीका में पहली

राष्ट्रपति पॉल कागामे ने मंगलवार को किगाली में करार की घोषणा की। फ़ॉर्मूला 1 अफ़्रीकन ग्रां प्री नाम की यह रेस 2030 के दशक की शुरुआत से होने की उम्मीद है।

संपादकीय डेस्क से · किगालीप्रकाशित
रवांडा के राष्ट्रपति पॉल कागामे (फ़ाइल फ़ोटो)
रवांडा के राष्ट्रपति पॉल कागामे (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Вени Марковски | Veni Markovski / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. रवांडा ने फ़ॉर्मूला 1 अफ़्रीकन ग्रां प्री की मेज़बानी के लिए 10 साल का करार किया है।
  2. रेस 2030 के दशक की शुरुआत से होने की उम्मीद है।
  3. 1993 में कयालामी में हुई साउथ अफ़्रीकन ग्रां प्री के बाद से एफ़1 अफ़्रीका में नहीं दौड़ा है।

राष्ट्रपति पॉल कागामे ने मंगलवार को किगाली में घोषणा की कि रवांडा के साथ 10 साल के करार के तहत फ़ॉर्मूला 1 अफ़्रीका लौटेगा। इससे तीन दशक से ज़्यादा पुराना इंतज़ार ख़त्म होगा।

इस रेस का नाम फ़ॉर्मूला 1 अफ़्रीकन ग्रां प्री होगा और इसके 2030 के दशक की शुरुआत में कैलेंडर में जुड़ने की उम्मीद है। घोषणा के मौके पर फ़ॉर्मूला 1 के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

कागामे ने कहा, “आज का दिन अफ़्रीका का है।” उन्होंने कहा कि विश्व चैंपियनशिप दशकों से इस महाद्वीप के बिना दौड़ती रही है, और “इस करार से यह बदल जाएगा।”

वापसी का लंबा रास्ता

1993 में कयालामी में हुई साउथ अफ़्रीकन ग्रां प्री के बाद अफ़्रीका ने कोई ग्रां प्री नहीं देखी। हाल के वर्षों में फ़ॉर्मूला 1 ने कयालामी में रेस फिर शुरू करने की कोशिश की थी, लेकिन स्थानीय प्रमोटर से जुड़ी दिक्कतों के कारण बातचीत टूट गई।

रवांडा ने दिसंबर 2024 में अपनी दावेदारी सार्वजनिक की थी, जब कागामे ने किगाली में एफ़आईए की आम सभा का उद्घाटन करते हुए कहा था कि देश “रेसिंग का रोमांच अफ़्रीका में वापस लाना” चाहता है। तब पेश योजना के मुताबिक राजधानी के बाहर नए बुगेसेरा हवाई अड्डे के पास एक स्थायी सर्किट बनना था, जिसे पूर्व एफ़1 ड्राइवर और तब ग्रां प्री ड्राइवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे अलेक्जेंडर वुर्ज़ डिज़ाइन कर रहे थे।

सात बार के विश्व चैंपियन लुईस हैमिल्टन लंबे समय से अफ़्रीका में रेस की मांग करते रहे हैं और 2024 में उन्होंने रवांडा की योजना का समर्थन किया था। कागामे के विरोधियों ने इस दावेदारी की आलोचना भी की थी। उनका आरोप है कि सरकार बड़े खेल आयोजनों के ज़रिये विदेश में अपनी छवि चमकाती है, जबकि देश में राजनीतिक आज़ादी पर पाबंदियां लगाती है।