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गहलोत बोले, राजस्थान में सूखे की अनदेखी हो रही है; पशु शिविर और चारे की मांग

रविवार को जैसलमेर रवाना होने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले में हजारों गायों की मौत हो चुकी है, और पूछा कि भाजपा सरकार केंद्र से मदद क्यों नहीं मांग रही।

संपादकीय डेस्क से · जयपुरप्रकाशित
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (फ़ाइल फ़ोटो)
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Prime Minister's Office / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. गहलोत का दावा है कि जैसलमेर में चारे और पानी की कमी से हजारों गायों की मौत हुई है।
  2. उन्होंने कहा कि चारे की कीमत ₹20 प्रति किलो तक पहुंच गई है।
  3. उन्होंने मांग की कि राहत शुरू करने के लिए गिरदावरी जल्द पूरी की जाए।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को आरोप लगाया कि राज्य की भाजपा सरकार पश्चिमी जिलों में सूखे की गंभीरता नहीं समझ पा रही है। उन्होंने दावा किया कि जैसलमेर में चारे और पानी की कमी से हजारों गायों की मौत हो चुकी है।

जैसलमेर रवाना होने से पहले जयपुर में अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में गहलोत ने कहा, “राज्य गंभीर सूखे का सामना कर रहा है, लेकिन सरकार को अभी तक इसकी गंभीरता का एहसास नहीं हुआ है।” उन्होंने कहा कि जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर और जोधपुर में हालात खास तौर पर चिंताजनक हैं और चारे की कीमत ₹20 प्रति किलो तक पहुंच गई है।

उन्होंने सवाल किया कि सरकार केंद्र से मदद क्यों नहीं ले रही। “भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकार है। वह सहायता के लिए केंद्र सरकार के पास क्यों नहीं जा रही है?” उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं, जबकि राजस्थान सरकार को ग्रामीणों की मुश्किलों का अंदाजा ही नहीं लगता।

गहलोत ने मुख्यमंत्री से खुद हालात की निगरानी करने को कहा। उन्होंने मांग की कि फसल नुकसान का आकलन यानी गिरदावरी जल्द पूरी कर सूखा राहत कार्य शुरू किए जाएं, “पशुओं के लिए चारे और पेयजल की व्यवस्था की जाए, पशु राहत शिविर खोले जाएं” और प्रभावित गांवों में रोजगार दिया जाए। उन्होंने चेताया कि बांध सूख रहे हैं, जिससे पेयजल और सिंचाई दोनों पर संकट आ सकता है।

उन्होंने कहा, “लंबे भाषणों और घोषणाओं से समस्या का समाधान नहीं होगा।” गहलोत ने याद दिलाया कि उनके कार्यकाल में उनकी सरकार ने 16 अगस्त को सूखा राहत शुरू की थी, जो 10 से 11 महीने चली।