LokVox

राज्यबिहार

सम्राट चौधरी के भगवान राम वाले बयान को प्रशांत किशोर ने बताया 'अहंकार', विधान परिषद चुनाव में सबक सिखाने की अपील

जन सुराज के संस्थापक का कहना है कि मुख्यमंत्री की मोदी-प्रशंसा उन्हें भगवान बनाने की कोशिश है, और उन्होंने विधान परिषद चुनाव में मतदाताओं से एनडीए को 'सबक' सिखाने को कहा।

संपादकीय डेस्क से · पटनाप्रकाशित
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (फ़ाइल फ़ोटो)
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: ETV Andhra Pradesh / Wikimedia Commons, CC BY 4.0

मुख्य बातें

  1. किशोर ने कहा कि भगवान राम और मोदी पर चौधरी का बयान प्रधानमंत्री को भगवान बनाने की कोशिश है।
  2. जन सुराज विधान परिषद की सभी आठ सीटों पर लड़ रहा है; भाजपा और जदयू चार-चार पर।
  3. उन्होंने राहुल गांधी के मार्च का समर्थन किया और कहा कि लोगों का चुनाव आयोग से भरोसा उठ गया है।

जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर अहंकार का आरोप लगाया है। मामला चौधरी के उस बयान का है, जिसमें उन्होंने भगवान राम को घर देने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। किशोर ने मतदाताओं से आगामी विधान परिषद चुनाव में सत्ताधारी गठबंधन को सबक सिखाने को कहा।

गुरुवार देर रात पटना के पास बिहटा में पत्रकारों से बात करते हुए किशोर ने कहा कि चौधरी ने मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर हुए एक कार्यक्रम में कहा था कि भगवान राम 400 साल तक तंबू में रहे, और गरीबों को घर दे रहे मोदी ने भगवान को भी रहने की जगह दी। किशोर ने कहा, “यह अहंकार नहीं तो क्या है।” उन्होंने इसे मोदी को “भगवान बनाने की” भाजपा की कोशिश का हिस्सा बताया।

जन सुराज विधान परिषद की सभी आठ सीटों पर चुनाव लड़ रहा है, जबकि भाजपा और जनता दल (यूनाइटेड) चार-चार सीटों पर। किशोर ने कहा कि एनडीए उम्मीदवारों की हार गठबंधन के लिए “सबक” होगी, और सरकार पर रोज़गार व शिक्षा के मोर्चे पर नाकाम रहने का आरोप लगाया।

उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च का भी बचाव किया और कहा कि लोगों का “चुनाव आयोग से भरोसा उठ गया है”। उन्होंने कहा, “जब लोगों को लगता है कि इंसाफ नहीं हो रहा, तो वे सड़कों पर उतरेंगे।” उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश की “कॉकरोच” वाली टिप्पणी की आलोचना की, जिसके बारे में उनका कहना है कि उसी से युवाओं का आंदोलन भड़का, और कहा कि अदालत ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वोटरों को रिश्वत के आरोप वाली उनकी पार्टी की याचिका सुनने से इनकार कर दिया था।

शुक्रवार दोपहर तक चौधरी या भाजपा की ओर से कोई जवाब नहीं आया था।