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पंजाब में पराली जलाने के मामले पिछले साल से आगे, तरनतारन और अमृतसर सबसे ऊपर

इस सीज़न पंजाब में उपग्रहों ने 574 जगह पराली जलती पकड़ी है। यह पिछले साल से थोड़ा ज़्यादा लेकिन 2024 से दो-तिहाई कम है, और आप सरकार व भाजपा एक-दूसरे पर दोष डाल रहे हैं।

संपादकीय डेस्क से · चंडीगढ़प्रकाशित
पंजाब के तरनतारन में गुरुद्वारा श्री तरनतारन साहिब (फ़ाइल फ़ोटो)
पंजाब के तरनतारन में गुरुद्वारा श्री तरनतारन साहिब (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Unknown author / Wikimedia Commons, Public domain

मुख्य बातें

  1. 15 सितंबर से 24 अक्टूबर के बीच पंजाब में पराली जलाने की 574 घटनाएं दर्ज हुईं।
  2. कुल घटनाओं में 72 प्रतिशत से ज़्यादा तरनतारन और अमृतसर में हैं।
  3. पुलिस इस सीज़न किसानों पर 91 एफआईआर दर्ज कर चुकी है।

पंजाब में पराली जलाने के मामले पिछले साल के आंकड़े से आगे निकल गए हैं। उपग्रहों ने 15 सितंबर से 24 अक्टूबर के बीच खेतों में आग की 574 घटनाएं पकड़ीं। यह 2025 की इसी अवधि के 561 मामलों से 2.3 प्रतिशत ज़्यादा है, हालांकि 2024 के 1,678 मामलों से अब भी 65.8 प्रतिशत कम है।

आग की ज़्यादातर घटनाएं माझा इलाके में हैं। तरनतारन में 270 मामले दर्ज हुए, जो पिछले साल 175 थे, और अमृतसर में 144, जबकि पिछले साल 135 थे। सीमा से लगे ये दो ज़िले मिलकर राज्य के कुल मामलों के 72 प्रतिशत से ज़्यादा हैं। इसके बाद गुरदासपुर में 37, कपूरथला में 27 और जालंधर में 12 मामले हैं।

राज्य ने सख्ती बढ़ाई है। 23 अक्टूबर तक पुलिस किसानों पर 91 एफआईआर दर्ज कर चुकी थी, अधिकारी 182 मामलों में ज़मीन के रिकॉर्ड में रेड एंट्री कर चुके थे, और 305 नोडल अधिकारियों को चेतावनी या कारण बताओ नोटिस दिए गए थे। 22 अक्टूबर तक ₹9.30 लाख का पर्यावरण मुआवज़ा लगाया गया, जिसमें से ₹4.93 लाख वसूले गए।

आरोप-प्रत्यारोप

इन आंकड़ों ने सियासी तकरार तेज़ कर दी है। भाजपा ने आम आदमी पार्टी सरकार पर आग पर काबू न कर पाने का आरोप लगाया। दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने लिखा कि “दिल्ली आज भी घुट रही है।”

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पलटवार करते हुए कहा कि राज्य ने किसानों को ₹800 करोड़ से ज़्यादा की मशीनें दी हैं, और भाजपा पर किसानों को “धमकाने और बदनाम करने की कोशिश” का आरोप लगाया।

कुछ लोगों का कहना है कि सज़ा सही रास्ता नहीं है। फगवाड़ा में अपने पंजाब संभालो मुहिम अभियान के तहत डॉ. अवतार सिंह करीमपुरी ने कहा कि “सिर्फ किसानों पर केस दर्ज करने, जुर्माना लगाने” या रिकॉर्ड में प्रतिकूल एंट्री से समस्या हल नहीं होगी। उन्होंने सरकार से अपने खर्च पर पराली इकट्ठा कर हटाने, न जलाने वाले किसानों को प्रति एकड़ बोनस देने और फसल अवशेष इस्तेमाल करने वाले बायोमास और कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्रों को बढ़ावा देने की मांग की।