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राजस्थान पंचायत चुनाव: जोधपुर में आरोप तय वाले प्रत्याशियों के पर्चे खारिज, पहले चरण की तस्वीर साफ

पहले चरण के लिए नाम वापसी गुरुवार को बंद हो गई, मतदान से एक हफ्ता पहले। जोधपुर में विपक्ष के तीन प्रत्याशी इसलिए बाहर हो गए क्योंकि अदालतें उन पर पहले ही आरोप तय कर चुकी हैं।

संपादकीय डेस्क से · जयपुरप्रकाशित
जोधपुर, राजस्थान
जोधपुर, राजस्थानPhoto: Jakub Hałun / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. राजस्थान में करीब 1.55 लाख ग्रामीण पदों के लिए 22 अक्टूबर से 16 नवंबर तक चार चरणों में मतदान होगा।
  2. जांच के बाद जोधपुर जिला परिषद के 43 वार्डों में 148 नामांकन वैध रहे।
  3. आरएलपी के दो और कांग्रेस के एक प्रत्याशी का पर्चा इसलिए खारिज हुआ क्योंकि उन पर आरोप तय हो चुके हैं।

राजस्थान में गांव और जिला स्तर की पंचायतों के पहले दौर के चुनाव की तस्वीर गुरुवार दोपहर साफ हो गई, जब नाम वापसी का समय दोपहर 3 बजे खत्म हुआ। इस चरण में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए 22 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे।

प्रदेश में ग्रामीण निकायों के चुनाव 22 अक्टूबर से 16 नवंबर के बीच चार चरणों में हो रहे हैं। 41 जिला परिषदों, 457 पंचायत समितियों और 14,403 ग्राम पंचायतों में कुल करीब 1.55 लाख पदों के लिए चुनाव है, और 4.03 करोड़ से ज्यादा लोग वोट डालने के पात्र हैं। धनतेरस से तारीखें टकराने की चिंता के बाद पहले तीन चरणों का मतदान एक दिन पहले कर दिया गया था।

जोधपुर में पर्चे खारिज

अब तक का सबसे अहम फैसला जोधपुर से आया, जहां बुधवार को जिला परिषद के 43 वार्डों के नामांकनों की जांच हुई। दाखिल 208 पर्चों में से 148 जांच में वैध पाए गए।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के वार्ड 11 और 13 के दो प्रत्याशियों और कांग्रेस के वार्ड 20 के एक प्रत्याशी के पर्चे इसलिए खारिज हुए क्योंकि लंबित आपराधिक मामलों में अदालतें उन पर आरोप तय कर चुकी हैं। यह जानकारी उन्होंने खुद अपने शपथपत्र में दी थी। आरएलपी के एक और प्रत्याशी का पर्चा अधूरा होने से खारिज हुआ: उसमें प्रस्तावक का ब्योरा और जमानत राशि नहीं थी।

अतिरिक्त जिला कलेक्टर जवाहर चौधरी ने बताया कि पांच साल या उससे ज्यादा की सजा वाले अपराध में आरोप तय होने पर लागू प्रावधानों के तहत प्रत्याशी की पात्रता प्रभावित होती है। उन्होंने कहा, “इस प्रक्रिया के बाद कुल 148 नामांकन वैध रह गए हैं।”

जांच सुबह 11 बजे से जिला मुख्यालय पर रिटर्निंग अधिकारी की अध्यक्षता में हुई, प्रत्याशियों की मौजूदगी में और वीडियोग्राफी के साथ। जिले की छह पंचायत समितियों के 90 वार्डों के लिए भी नामांकन आए, जहां ज्यादातर जगह जांच पूरी हो गई। प्रशासन ने कहा है कि वह हर पद के लिए तय सीमा के मुकाबले प्रत्याशियों के खर्च पर नजर रखेगा।

पार्टियां मैदान में

आरएलपी के लिए एक ही जिले में वोटिंग से पहले तीन प्रत्याशी खो देना शुरुआती झटका है। कांग्रेस अपना प्रचार जिलों तक ले जा चुकी है। बुधवार को झालावाड़ के भवानी मंडी में पार्टी नेता गोविंद सिंह डोटासरा और टीकाराम जूली ने कार्यकर्ताओं से इन चुनावों में पुराना प्रदर्शन दोहराने को कहा।

ग्रामीण मतदान एक महीने तक चलेगा और त्योहारों के मौसम से गुजरेगा। इससे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार और विपक्ष, दोनों को गांवों का मिजाज समझने का मौका मिलेगा।

आगे क्या

पंच और सरपंच पदों का चुनाव अलग चलेगा, जिसमें पहले चरण का मतदान 24 अक्टूबर को है। बारां, श्रीगंगानगर, करौली और कोटा में जिला प्रमुख और उप प्रधान, और इनके तहत आने वाली पंचायत समितियों में प्रधान के चुनाव दिसंबर में होंगे, जब मौजूदा पदाधिकारियों का कार्यकाल खत्म होगा।