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अयोध्या, काशी और मथुरा घूमने वालों से लिया जा सकता है पर्यटन शुल्क

लखनऊ में प्रदेश के महापौरों की बैठक में अयोध्या के महापौर ने यह सुझाव रखा। श्रद्धालुओं की भीड़ संभालने के लिए नगर निगम पैसे का इंतजाम खोज रहे हैं। कोई राशि या फैसला घोषित नहीं हुआ है।

संपादकीय डेस्क से · लखनऊप्रकाशित
अयोध्या के घाट और मंदिर
अयोध्या के घाट और मंदिरPhoto: रूही / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. अयोध्या, काशी और मथुरा आने वालों पर पर्यटन शुल्क लगाने का सुझाव आया है।
  2. अयोध्या के महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने कहा कि इस पैसे से सफाई, पानी और कचरा प्रबंधन हो सकता है।
  3. लखनऊ में 17 नगर निगमों के महापौरों ने शहरों की आर्थिक आत्मनिर्भरता पर चर्चा की।

अयोध्या, वाराणसी और मथुरा आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आगे चलकर इन शहरों में घूमने के लिए शुल्क देना पड़ सकता है। यह विचार लखनऊ में उत्तर प्रदेश के महापौरों की एक बैठक में रखा गया, जहां नगर निकाय भीड़ संभालने के लिए पैसे के इंतजाम पर बात कर रहे थे।

अयोध्या के महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने कहा कि इन शहरों में हर साल करोड़ों श्रद्धालु आते हैं, और इसका दबाव सफाई, पेयजल और कचरा प्रबंधन पर दिखता है। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रावधानों के तहत पर्यटन शुल्क लगाकर इन सेवाओं के लिए संसाधन जुटाए जा सकते हैं। कोई राशि नहीं बताई गई है, और किसी प्राधिकरण ने यह नहीं कहा है कि वह इस प्रस्ताव पर विचार करेगा।

यह सुझाव बुधवार को गोमती नगर के एक होटल में हुए सम्मेलन में आया, जहां 17 नगर निगमों के महापौरों ने प्रदेश के शहरों की समस्याओं और नगर निकायों की आर्थिक आत्मनिर्भरता पर चर्चा की। सम्मेलन छठे राज्य वित्त आयोग ने यूनिसेफ और डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के साथ मिलकर आयोजित किया था।

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बात की दिशा तय की। उन्होंने कहा, “नगर निकायों की वित्तीय आत्मनिर्भरता सशक्त और आधुनिक शहरों के विकास का आधार है।”

महापौरों ने संपत्ति कर का दायरा बढ़ाने, बकाया कर की वसूली सुधारने, सेवाओं पर यूजर चार्ज और म्युनिसिपल बॉन्ड से पैसा जुटाने पर भी बात की। बैठक में छठे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष और अपर मुख्य सचिव (वित्त) दीपक कुमार, आयोग के सचिव सिद्धार्थ श्रीवास्तव और यूनिसेफ के डॉ. सौमेन बागची मौजूद थे।

फिलहाल पर्यटन शुल्क सिर्फ एक सुझाव है, और राज्य सरकार ने यह नहीं बताया है कि वह इस पर विचार करेगी या नहीं।