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दिल्ली में जुटे ब्रिक्स सांसद, वोलोदिन पहुंचे, ईरान के गालिबाफ नहीं आएंगे
12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का संयुक्त बयान तय करने के लिए प्रतिनिधिमंडलों के सचिव रविवार को बैठक कर रहे हैं। मंच सोमवार को संविधान सदन में शुरू होगा।

मुख्य बातें
- 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच 26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में होगा।
- रूसी ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन नई ड्यूमा के प्रमुख के तौर पर पहली विदेश यात्रा पर हैं।
- ईरान के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ अप्रत्याशित परिस्थितियों के चलते नहीं आएंगे।
ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देशों के सांसद 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के लिए नई दिल्ली में जुट रहे हैं। मंच सोमवार को संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में शुरू होगा। रविवार को आए हुए प्रतिनिधिमंडलों के सचिव मंच का संयुक्त बयान तय करने के लिए बैठक कर रहे हैं।
दो दिन की इस बैठक की अध्यक्षता करने वाले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि सदस्य संसदें बयान के मसौदे के लिए सुझाव भेज रही हैं। उन्होंने कहा, “अब तक 18 देशों से सुझाव मिले हैं, और उसी के अनुसार चर्चा होगी।” मंच का विषय है “जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को मजबूत करना”। बिरला के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इसमें शामिल होने और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मिलने की उम्मीद है।
वोलोदिन आए, गालिबाफ नहीं
रूस की स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन शनिवार को रूसी सांसदों के एक दल के साथ दिल्ली पहुंचे। नई ड्यूमा की कमान संभालने के बाद यह उनकी पहली विदेश यात्रा है। मंच के सत्रों के अलावा वे भारतीय अधिकारियों और सांसदों से आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी सहयोग तथा दोनों संसदों के बीच नजदीकी बढ़ाने पर बात करेंगे।
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ नहीं आएंगे। नई दिल्ली में ईरानी दूतावास ने कहा कि वे “कुछ अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण” अनुपस्थित रहेंगे, और जोड़ा: “यह भी स्पष्ट किया जाता है कि इस्लामी गणराज्य ईरान का संसदीय प्रतिनिधिमंडल बैठक में हिस्सा लेगा।” दूतावास ने यह नहीं बताया कि दल की अगुवाई कौन करेगा। गालिबाफ ऐसे समय में दूर रह रहे हैं जब ईरान पर अमेरिकी हमलों की नई धमकियां हैं और सऊदी अरब पर हूती मिसाइल हमले जारी हैं।
भारत के लिए यह मंच उस संसदीय कूटनीति का प्रदर्शन है जिसकी बात बिरला करते हैं। उन्होंने बताया कि संसद ने 64 देशों के साथ मैत्री समूह बनाए हैं। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, राज्य विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारी और केंद्रीय मंत्री भी इसमें हिस्सा लेंगे, और साथ में द्विपक्षीय बैठकें भी होंगी।