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25 अक्टूबर से ब्रिक्स सांसदों की मेजबानी करेंगे ओम बिरला, मोदी करेंगे फोरम का उद्घाटन
ब्रिक्स देशों के सांसद अगले हफ्ते संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में जुटेंगे। सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयकों के लिए विशेष सत्र पर भी विचार कर रही है, लेकिन तारीखें तय नहीं हैं।

मुख्य बातें
- 12वां ब्रिक्स संसदीय फोरम 25 अक्टूबर से संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में तीन दिन चलेगा।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 अक्टूबर को इसका उद्घाटन करेंगे, और यह संयुक्त बयान के साथ खत्म होगा।
- सरकारी सूत्रों के मुताबिक संविधान संशोधन विधेयकों के लिए विशेष सत्र फोरम के आसपास रखा जा सकता है।
संसद अगले हफ्ते ब्रिक्स देशों के सांसदों की मेजबानी करेगी, जब नई दिल्ली में पुराने संसद भवन, यानी संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में 12वां ब्रिक्स संसदीय फोरम शुरू होगा।
लोकसभा सचिवालय के मुताबिक यह बैठक रविवार, 25 अक्टूबर से तीन दिन चलेगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार, 26 अक्टूबर को इसका उद्घाटन करेंगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला फोरम की अध्यक्षता करेंगे, जिसका समापन संयुक्त बयान को स्वीकार करने के साथ होगा।
यह फोरम ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलनों का विधायी रूप है और भारत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के करीब एक महीने बाद हो रहा है। सदस्य और साझेदार देशों के पीठासीन अधिकारियों, संसदीय नेताओं और प्रतिनिधियों के आने की उम्मीद है। सचिवालय इस फोरम को ऐसा मंच बताता है जहां सदस्य देशों की संसदें अपने विधायी एजेंडे में तालमेल बिठाती हैं, लोकतांत्रिक संवाद बढ़ाती हैं और ग्लोबल साउथ की आवाज उठाती हैं। भारत ने ऐसे आयोजन की पिछली मेजबानी अक्टूबर 2023 में की थी, जब यहां नौवां जी20 संसदीय अध्यक्ष शिखर सम्मेलन (पी20) हुआ था।
एजेंडे में क्या है
अधिकारियों ने सितंबर में बताया था कि बैठक का विषय “जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना” होगा, जिसमें चार उच्चस्तरीय पूर्ण सत्र होंगे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व डिजिटल तकनीक पर जोर रहेगा। औपचारिक सत्रों से पहले आने वाले प्रतिनिधिमंडलों के सचिव संयुक्त घोषणा के मसौदे पर काम करेंगे।
विशेष सत्र का सवाल
यह फोरम संसद के कैलेंडर से जुड़े एक बड़े हिसाब-किताब का हिस्सा बन गया है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि केंद्र इसी महीने परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक लाने के लिए विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रहा है, और सांसदों को करीब एक हफ्ते के नोटिस पर इसकी तारीखें ब्रिक्स बैठक के आसपास रखी जा सकती हैं।
मानसून सत्र 13 अगस्त को खत्म हुआ था, लेकिन उसका सत्रावसान नहीं हुआ है, इसलिए विशेष बैठक की गुंजाइश बनी हुई है। बताया जा रहा है कि सरकार डीएमके से, जो तमिलनाडु चुनावों के बाद इंडिया गठबंधन से अलग हो गई थी, और छोटे विपक्षी दलों से संपर्क कर रही है।
असली मुश्किल संख्या की है। संविधान संशोधन के लिए विशेष बहुमत चाहिए, और लोकसभा में एनडीए अपने दम पर दो-तिहाई से पीछे है। पिछली कोशिश, यानी संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, जो लोकसभा की सीटों की अधिकतम सीमा 850 करता, 17 अप्रैल को 230 के मुकाबले 298 वोट पाकर भी दो-तिहाई बहुमत से चूक गया। उस विधेयक के जरिए संसद कानून बनाकर यह भी तय कर सकती थी कि निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण कब हो और किस जनगणना के आधार पर।
सरकार ने सत्र बुलाए जाने की पुष्टि नहीं की है और कोई तारीख घोषित नहीं हुई है।