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बिना ज़्यादा बहस के कानून पास करने वाले मानसून सत्र के बाद भारत की संसद: क्या लंबित है, क्या आने वाला है, और कौन से आंकड़े मायने रखते हैं।

संपादकीय डेस्क सेप्रकाशित

संसद के दो सदन हैं: लोकसभा, जिसे जनता सीधे चुनती है, और राज्यसभा, जिसे राज्यों के विधायक चुनते हैं। मौजूदा 18वीं लोकसभा का कार्यकाल दो साल पूरा कर चुका है। कानून बनने के लिए दोनों सदनों की मंजूरी और राष्ट्रपति की मंजूरी ज़रूरी है।

अभी क्या स्थिति है

मानसून सत्र (20 जुलाई से 13 अगस्त 2026) इस लोकसभा का अब तक का सबसे कम कामकाज वाला सत्र रहा। पीआरएस के हिसाब से सदन ने तय समय का 15% काम किया, सरकार के हिसाब से 19%, और अपने 11 में से नौ विधेयक ऐसे पास किए जिन पर सिर्फ मंत्री ही बोले। अप्रैल में लोकसभा ने परिसीमन से जुड़ा एक संविधान संशोधन 298 के मुकाबले 230 वोटों से गिरा दिया था।

दो बड़े प्रस्ताव संयुक्त समितियों के पास हैं: एफसीआरए संशोधन और एक देश, एक चुनाव विधेयक। दोनों की रिपोर्ट शीतकालीन सत्र में आनी है, जिसकी तारीखें घोषित नहीं हुई हैं। लोकसभा में सात साल से ज़्यादा समय से, जून 2019 से, कोई उपाध्यक्ष नहीं है (पीआरएस)।

2026 में संसद

  1. 17 अप्रैलपरिसीमन संशोधन के पक्ष में लोकसभा में 298-230 वोट, दो-तिहाई से कम; संशोधन गिरा।
  2. 18 अप्रैलबजट सत्र खत्म; लोकसभा ने तय समय का 86% काम किया (पीआरएस)।
  3. 18 जुलाईलोकसभा अध्यक्ष ने शिवसेना के विलय को मंजूरी दी और टीएमसी के 20 बागी सांसदों को अलग बैठाया।
  4. 20 जुलाईमानसून सत्र शुरू।
  5. 12 अगस्तएफसीआरए संशोधन विधेयक संयुक्त समिति को भेजा गया।
  6. 13 अगस्तदोनों सदन अनिश्चित काल के लिए स्थगित।
  7. 25 अगस्तकेरल का नाम आधिकारिक तौर पर केरलम हुआ।

अहम आंकड़े

  • 15%लोकसभा का कामकाज (उत्पादकता), मानसून सत्र 2026
  • 21%18वीं लोकसभा में अब तक समितियों को भेजे गए विधेयक
  • 9 मिनटपूरे मानसून सत्र में लोकसभा का प्रश्नकाल
  • 8हमारे ट्रैकर में अभी समितियों के पास विधेयक

मुख्य सवाल

संसद के कामकाज के दो अलग आंकड़े क्यों हैं? पीआरएस तय समय के मुकाबले असल में हुए काम को मापता है: लोकसभा के लिए 15%। सरकार ने 19% बताया। हमने जो स्रोत पढ़े, उनमें सरकार का तरीका नहीं बताया गया है।

संसद में कौन से विधेयक लंबित हैं? हमारे ट्रैकर में आठ विधेयक समितियों के पास हैं, जिनमें एफसीआरए संशोधन, एक देश, एक चुनाव विधेयक और 30 दिन हिरासत में रहने वाले मंत्रियों को हटाने वाला विधेयक शामिल हैं।

संसद का अगला सत्र कब है? अभी घोषित नहीं हुआ है। एफसीआरए समिति को शीतकालीन सत्र के पहले हफ्ते के आखिर तक और एक देश, एक चुनाव समिति को उसके आखिरी हफ्ते के पहले दिन तक रिपोर्ट देनी है।

दल-बदल के मामलों का फैसला कौन करता है? लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति, जिनके फैसलों की अदालत सीमित समीक्षा कर सकती है। दल-बदल विरोधी कानून पर हमारा लेख देखें।

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