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परिसीमन और सीटों पर लगी रोक

राज्यों के बीच लोकसभा और विधानसभा सीटें कैसे बंटती हैं, 1971 की जनगणना पर टिकी रोक, और 2026 में इसे बदलने की नाकाम कोशिश।

संपादकीय डेस्क सेप्रकाशित

परिसीमन से तय होता है कि आबादी के हिसाब से हर राज्य को लोकसभा और विधानसभा की कितनी सीटें मिलेंगी, और निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं कैसे खींची जाएंगी। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के मुताबिक, 1976 से हर राज्य की सीटों का हिस्सा 1971 की जनगणना पर स्थिर है, और 2001 में यह रोक “2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के प्रकाशन तक” बढ़ा दी गई। अगली जनगणना, जिसकी संदर्भ तिथि ज़्यादातर भारत के लिए 1 मार्च 2027 है, वही होगी जिससे यह रोक खत्म होगी।

अभी क्या स्थिति है

अप्रैल 2026 में सरकार ने नियम बदलने की कोशिश की। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा की अधिकतम सीमा 550 से बढ़ाकर 850 सीटें कर देता, संसद को कानून बनाकर यह चुनने देता कि परिसीमन किस जनगणना पर हो, और नए परिसीमन के तुरंत बाद महिला आरक्षण शुरू करने की अनुमति देता। 17 अप्रैल को इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जो ज़रूरी दो-तिहाई बहुमत से कम था। इसके बाद सरकार ने साथ के विधेयक वापस ले लिए। विपक्षी दलों का तर्क था कि 2011 की जनगणना के इस्तेमाल से दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों का हिस्सा घट जाएगा। द ट्रिब्यून ने सितंबर में खबर दी थी कि एक संशोधित विधेयक पर विचार हो रहा है; 11 अक्टूबर तक ऐसा कोई विधेयक पेश होने की खबर नहीं थी।

पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने गिर चुकी योजना के कुछ और असर भी बताए थे। बड़ी लोकसभा होने से राज्यसभा के मुकाबले उसका अनुपात करीब 2.2:1 से बढ़कर 3.3:1 हो जाता, जिसका असर संयुक्त बैठकों और राष्ट्रपति चुनाव पर पड़ता है। केंद्रीय मंत्रिपरिषद की अधिकतम सीमा, जो लोकसभा के आकार के 15% से जुड़ी है, करीब 81 से बढ़कर 122 हो जाती। और परिसीमन का समय तय करना एक साधारण कानून के हाथ में चला जाता।

अहम तारीखें

  1. 1976सीटों का हिस्सा 1971 की जनगणना पर स्थिर किया गया।
  2. 2001रोक 2026 के बाद की पहली जनगणना तक बढ़ाई गई।
  3. 2008पिछले परिसीमन आदेशों को अंतिम रूप दिया गया।
  4. 16 अप्रैल 2026131वां संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक पेश।
  5. 17 अप्रैल 2026संशोधन 298 के मुकाबले 230 वोटों पर गिरा।
  6. 1 मार्च 2027ज़्यादातर भारत के लिए जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि।

अहम आंकड़े

  • 298 बनाम 230131वें संशोधन पर लोकसभा में वोट; 352 की ज़रूरत थी
  • 850लोकसभा की प्रस्तावित अधिकतम सीमा, अभी 550
  • 39 से 32मौजूदा आकार पर 2011 की जनगणना से बंटवारे में तमिलनाडु की सीटें (उदाहरण)
  • 80 से 89इसी उदाहरण में उत्तर प्रदेश की सीटें

मुख्य सवाल

लोकसभा सीटों की संख्या पर रोक क्यों लगी है? पीआरएस के मुताबिक, यह रोक जनसंख्या स्थिरीकरण को बढ़ावा देने के लिए थी, ताकि आबादी की बढ़त धीमी करने वाले राज्यों की सीटें न घटें।

131वां संशोधन विधेयक क्यों गिर गया? इसे मौजूद और वोट देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की ज़रूरत थी, लेकिन 528 में से 298 वोट ही मिले।

क्या इससे महिला आरक्षण में देरी होगी? हां। एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने वाला 2023 का कानून अगले परिसीमन के बाद ही लागू होगा। पीआरएस का कहना है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले ऐसा होने की संभावना कम है।

परिसीमन पर आगे क्या होगा? जब तक संविधान में संशोधन नहीं होता, सीटों का नया बंटवारा 2026 के बाद प्रकाशित होने वाली पहली जनगणना के आधार पर होगा। हमारा पूरा लेख पढ़ें।

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