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विषयचुनाव आयोग

भारत का चुनाव आयोग

भारत में चुनाव कराने वाली तीन सदस्यों की संस्था, उसके सदस्यों के चयन पर विवाद, और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की विपक्ष की कोशिशें।

संपादकीय डेस्क सेप्रकाशित

भारत का चुनाव आयोग (ईसीआई) देश में चुनाव कराता है और मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का आदेश देता है। आयोग के अपने शब्दों में, यह “एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था के रूप में काम करता है”। इसके तीन सदस्य हैं: मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार, जिनका कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक है, और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी।

अभी क्या स्थिति है

मौजूदा विवाद का बड़ा हिस्सा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़ा है। 23 सितंबर को इंडियन एक्सप्रेस ने खबर दी कि संधू और जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार एसआईआर से जुड़े फैसलों पर लिखित आपत्ति दर्ज की। ईसीआई ने जवाब दिया कि लिखित टिप्पणियां सामान्य प्रक्रिया हैं और उसके फैसले सर्वसम्मत थे। विपक्षी दल, जो दो बार सीईसी को हटाने की कोशिश कर चुके हैं, कहते हैं कि तीसरा नोटिस तैयार हो रहा है। 6 और 7 अक्टूबर के प्रदर्शनों के बाद दिल्ली पुलिस ने विपक्षी नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कीं; किसी अदालत ने उन पर अभी फैसला नहीं दिया है। आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा कानून अब संविधान पीठ के पास जाने वाला है।

आगे तीन बातों पर नज़र रहेगी: क्या मुख्य न्यायाधीश नियुक्ति कानून पर संविधान पीठ गठित करते हैं; फॉर्म 6 में बदलाव किसने किया और क्या सीईसी आयोग की शक्तियों का अकेले इस्तेमाल कर सकते हैं, इस पर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई; और क्या विपक्षी दल हटाने का तीसरा नोटिस दाखिल करते हैं। दूसरा नोटिस, जिस पर 73 सांसदों के हस्ताक्षर हैं और जिसमें नौ आरोप हैं, 24 अप्रैल से राज्यसभा में लंबित है।

अहम तारीखें

  1. 2 मार्च 2023सुप्रीम कोर्ट ने संसद के कानून बनाने तक मुख्य न्यायाधीश को चयन समिति में शामिल किया।
  2. दिसंबर 2023संसद ने कानून पारित कर मुख्य न्यायाधीश की जगह एक कैबिनेट मंत्री को रखा।
  3. फरवरी 2025ज्ञानेश कुमार सीईसी नियुक्त; राहुल गांधी ने असहमति नोट दिया।
  4. 6 अप्रैल 2026सीईसी को हटाने के पहले नोटिस स्वीकार नहीं किए गए।
  5. 24 अप्रैल 2026राज्यसभा में दूसरा नोटिस दाखिल; लंबित।
  6. 23 सितंबर 2026असहमति पर रिपोर्ट; सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने नियुक्ति कानून को चुनौती का मामला संविधान पीठ के लिए मुख्य न्यायाधीश को भेजा।
  7. 5 अक्टूबर 2026सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने फॉर्म 6 में किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी, और सीईसी की शक्तियों पर एक याचिका पर नोटिस जारी किया।

अहम आंकड़े

  • 3आयोग के सदस्य
  • 1410 महीनों में दो आयुक्तों की आपत्तियां, इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार
  • 193मार्च 2026 के हटाने के नोटिसों पर हस्ताक्षर करने वाले सांसद (लोकसभा 130, राज्यसभा 63)

मुख्य सवाल

मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति कौन करता है? राष्ट्रपति, एक समिति की सलाह पर, जिसमें प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और प्रधानमंत्री द्वारा चुने गए एक कैबिनेट मंत्री होते हैं। हमारा लेख देखें।

क्या मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाया जा सकता है? सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह, साबित कदाचार या अक्षमता के आधार पर, दोनों सदनों में विशेष बहुमत से।

क्या चुनाव आयुक्तों ने असहमति जताई थी? इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक उन्होंने 14 बार आपत्ति की। ईसीआई का कहना है कि अलग-अलग राय विचार-विमर्श का हिस्सा है और हर अंतिम फैसला सर्वसम्मत था।

क्या चुनाव आयोग को असहमति सार्वजनिक करनी चाहिए? यह हमारा संपादकीय मत है; पूरा तर्क पढ़ें।

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