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सुप्रीम कोर्ट परिसर में इंडिया गठबंधन की भीड़ पर वकीलों की याचिका, एफआईआर में राहुल गांधी का नाम
सोमवार रात अदालत परिसर में जुटी भीड़ पर याचिकाओं की सुनवाई गुरुवार को होगी। पुलिस सूत्र अब मार्च पर चार एफआईआर बता रहे हैं, और एक अलग अवमानना याचिका कांग्रेस नेताओं के खिलाफ है।

मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट सोमवार रात अपने परिसर में जुटी भीड़ पर वकीलों की याचिकाएं गुरुवार को सुनेगा।
- पुलिस सूत्रों के मुताबिक मार्च पर चार एफआईआर दर्ज हैं, तिलक मार्ग की एक एफआईआर में राहुल गांधी का नाम है।
- एक अलग याचिका में मुख्य न्यायाधीश पर पोस्ट को लेकर कांग्रेस, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ आपराधिक अवमानना की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को उन याचिकाओं पर सुनवाई करेगा जो सोमवार शाम उसके परिसर में जुटी भीड़ को लेकर दायर की गई हैं। उस समय चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च के आखिर में इंडिया गठबंधन के नेता और उनके समर्थक अदालत परिसर में दाखिल हो गए थे।
वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया और महेश जेठमलानी ने मंगलवार सुबह मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सामने वकीलों की ये याचिकाएं रखीं और जल्द सुनवाई की मांग की। मुख्य न्यायाधीश ने इन्हें गुरुवार, 15 अक्टूबर को सूचीबद्ध करने पर सहमति दी। उसी दिन अदालत दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान हुई हिरासतों से जुड़ी याचिकाएं भी सुनेगी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक चार एफआईआर
दिल्ली पुलिस ने इन मामलों पर कोई बयान जारी नहीं किया है, लेकिन पुलिस सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि मार्च को लेकर चार एफआईआर दर्ज हुई हैं: दो तिलक मार्ग थाने में और एक-एक मंदिर मार्ग और बाराखंबा रोड थाने में। पहले की खबरों में यह संख्या दो बताई गई थी।
मामलों में आरोप है कि मार्च ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत लगी निषेधाज्ञा तोड़ी, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने के लिए एक मिनी ट्रक का इस्तेमाल किया और मध्य दिल्ली की सड़कों पर ग्रैफिटी बनाई। तिलक मार्ग की एफआईआर अदालत परिसर में घुसे प्रदर्शनकारियों से जुड़ी है और इसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत इंडिया गठबंधन के नेताओं के नाम हैं। नामजद लोगों की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं हुई है।
मुख्य न्यायाधीश पर पोस्ट को लेकर अवमानना याचिका
चार अधिवक्ताओं ने मंगलवार को एक अलग याचिका दायर कर कांग्रेस, राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है।
याचिका में कांग्रेस की केरलम इकाई के एक्स हैंडल से सोमवार को मुख्य न्यायाधीश को संबोधित पोस्ट का हवाला है: “प्रिय सूर्यकांत, अगर कानून-व्यवस्था आपका क्षेत्र नहीं है, तो अभी इस्तीफा दीजिए। हम आपकी जगह ऐसा व्यक्ति ढूंढ लेंगे जो इसे संभाल सके।” इकाई ने बाद में पोस्ट हटा दी। याचिका में उसी शाम महुआ मोइत्रा की पोस्ट का भी जिक्र है: “सूर्य साफ तौर पर नहीं कर सकते। तो हम करेंगे।” याचिका चाहती है कि राजनीतिक दलों को लंबित मामलों पर जजों के खिलाफ सार्वजनिक अभियान चलाने से रोकने के लिए दिशानिर्देश बनें।
मार्च और मुख्य मामला
“लोकतंत्र के लिए मार्च” सोमवार दोपहर कॉन्स्टिट्यूशन क्लब से शुरू हुआ और भगवान दास रोड पर एक बैरिकेड पर रोक दिया गया। बाद में जब समूह अदालत परिसर में गया तो राहुल गांधी, खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार मौजूद नेताओं में थे। कांग्रेस ने 2.5 लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया।
गठबंधन मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा चाहता है। उसके नेताओं ने सोमवार शाम इस प्रक्रिया पर रोक की मांग करते हुए रिट याचिका दायर की थी। मंगलवार को अदालत ने उस पर कोई आदेश नहीं दिया।
सोमवार को राहुल गांधी पीछे नहीं हटे थे। मार्च के बाद उन्होंने कहा, “आप हमें पीट नहीं सकते, धमका नहीं सकते, डरा नहीं सकते।” भाजपा ने मार्च को राजनीतिक नाटक बताया। राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने कहा, “यह निराधार है... वे झूठ बोल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट एसआईआर की संवैधानिकता पर पहले ही फैसला दे चुका है।”
आगे क्या
गुरुवार की सुनवाई में वकीलों की याचिकाएं, हिरासत और अवमानना से जुड़ी याचिकाएं और पत्रकारों के मामले एक साथ अदालत के सामने होंगे। कांग्रेस नेताओं के खिलाफ अवमानना याचिका की सुनवाई की कोई तारीख सामने नहीं आई है।
अपडेट 14 अक्टूबर 2026, सुबह 8:30 बजे: यह खबर पहली बार प्रकाशित होने के बाद अपडेट की गई।