राजनीतिप्रदर्शन
जंतर-मंतर में घुसने पर सीजेपी के सौरव दास और आशुतोष रांका न्यायिक हिरासत में भेजे गए
दिल्ली की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने बुधवार को कॉकरोच जनता पार्टी के दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। एक दिन पहले वे सूची से हटाए गए प्रदर्शन स्थल का ताला लगा गेट फांद गए थे।

मुख्य बातें
- दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा।
- जंतर-मंतर में घुसने पर पुलिस ने उन पर गैरकानूनी जमावड़े और सरकारी आदेश की अवहेलना का आरोप लगाया है।
- सुप्रीम कोर्ट प्रदर्शनकारियों की हिरासत से जुड़े मामलों पर गुरुवार, 15 अक्टूबर को सुनवाई करेगा।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के दो नेताओं, सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। एक दिन पहले वे राष्ट्रीय ध्वज लेकर जंतर-मंतर के ताला लगे गेट पर चढ़कर अंदर गए थे।
रिमांड का आदेश दिल्ली की एक स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट अदालत ने दिया। दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को दोनों और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें गैरकानूनी जमावड़े और लोक सेवक के जारी आदेश की अवहेलना का आरोप है। उनके अंदर जाने से एक दिन पहले ही जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाया गया था।
दोनों को मंगलवार को पहले जाफरपुर कलां थाने में रखा गया और बुधवार तड़के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने ले जाया गया। सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने कहा कि उन्हें देर रात तक अपने वकीलों से मिलने नहीं दिया गया और उन्हें तिहाड़ जेल भेजा जा सकता है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे और टीम के कई दूसरे सदस्य भी मंगलवार को पकड़े गए थे। पुलिस ने यह नहीं बताया है कि उनके साथ क्या हुआ।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हुई सामूहिक हिरासत से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) गुरुवार को सुनवाई करेगा।
गेट के ऊपर से
दिपके के पोस्ट किए वीडियो में दास और रांका तिरंगा लिए गेट पर चढ़ते दिखते हैं, जबकि समूह “भारत माता की जय” और “ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो” के नारे लगा रहा है। दिपके ने एक्स पर लिखा, “तिरंगा लिए कॉकरोच आज तड़के जंतर-मंतर में घुस गए, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें उठा लिया।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए उन्होंने जोड़ा: “आप प्रतिरोध को डीनोटिफाई नहीं कर सकते।”
दास, रांका और दिपके को 10 अक्टूबर को भी हिरासत में लिया गया था। उन्हें रविवार को एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर ₹50,000 के मुचलके पर रिहा किया गया था।
हाईकोर्ट में
मंगलवार को ही दिल्ली हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) के जस्टिस अमित महाजन ने भारतीय युवा कांग्रेस के प्रमुख उदय भानु चिब की याचिका सुनी। चिब को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी।
दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि जगह को सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश के आधार पर सूची से हटाया गया, जिसमें अधिकारियों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए उपयुक्त वैकल्पिक जगहें पहचानने पर विचार करने को कहा गया था। उन्होंने कहा, “अदालत ने कहा था कि उपयुक्त जगहों की पहचान कर उन्हें तय किया जाए, और हमने ठीक यही किया है।” इसकी जगह रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और सीबीडी ग्राउंड तय किए गए हैं, और शर्मा ने दलील दी कि याचिका अब निरर्थक हो चुकी है।
जज ने यह नहीं माना कि मामला खत्म हो गया है। एएसजी की आपत्ति के बावजूद उन्होंने चिब की तीन मांगों पर नोटिस जारी किया। इनमें प्रदर्शन के लिए 10 दिन पहले सूचना देने के पुलिस नियम को चुनौती, और यह मांग शामिल है कि 2022 के एक स्थायी आदेश का इस्तेमाल शांतिपूर्ण जमावड़ों पर यांत्रिक ढंग से रोक के लिए नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत के मामले टाले
सुप्रीम कोर्ट में सप्ताहांत की कार्रवाई से जुड़ी हिरासत और अवमानना याचिकाएं मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ के सामने आनी थीं। जस्टिस मोहना की तबीयत ठीक न होने से पक्षकारों ने इन्हें गुरुवार, 15 अक्टूबर को सुनने पर सहमति दी। सॉलिसिटर जनरल के अनुरोध पर अदालत ने सरकार को अपने पहले के निर्देशों पर अनुपालन रिपोर्ट और अवमानना याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए तब तक का समय दिया।
दूसरी अदालतों में
प्रदर्शन दूसरे हाईकोर्ट तक भी पहुंच गए हैं। मुंबई में मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी की अगुवाई वाली पीठ ने 10 और 11 अक्टूबर को सीईसी-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने का अंतरिम आदेश देने से इनकार किया। पीठ ने कहा, “हम ऐसे व्यापक आदेश पारित नहीं कर सकते। आप जो भी मामले रिकॉर्ड पर लाएंगे, हम उन्हें देखेंगे।” मामला सोमवार को सुना जाएगा।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को बताया गया कि सीजेपी प्रदर्शन में जाते समय इटारसी जंक्शन पर हिरासत में ली गई एक महिला को उसके परिवार के पास लौटा दिया गया है। पीठ ने राज्य से यह दिखाने को कहा कि ऐसे सभी लोगों को घर भेज दिया गया है।
अपडेट 15 अक्टूबर 2026, सुबह 7:30 बजे: यह खबर पहली बार प्रकाशित होने के बाद अपडेट की गई।