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सीजेपी प्रदर्शन में बड़े पैमाने पर हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मेट्रो और इंटरनेट बहाल करने को कहा

10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मार्च रोकते हुए पुलिस ने ज़्यादातर अनुमानों के मुताबिक हज़ारों लोगों को हिरासत में लिया। रविवार की विशेष सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को कानूनी प्रक्रिया के बिना हिरासत में नहीं रखा जा सकता।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
जुलाई 2026 में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी (फाइल फोटो)
जुलाई 2026 में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी (फाइल फोटो)Alnitak-Alnilam-Mintaka / Wikimedia

मुख्य बातें

  1. 10 अक्टूबर को पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर-मंतर मार्च रोका; हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या करीब 1,000 (दिल्ली पुलिस सूत्र) और करीब 2,000 (गृह मंत्रालय के एक अधिकारी) से लेकर 15,000 से ज़्यादा (सीजेपी) तक बताई गई।
  2. सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को एहतियाती गिरफ्तारी में रखा गया और 11 अक्टूबर को एक साल तक शांति बनाए रखने के ₹50,000 के ज़मानती बॉन्ड पर छोड़ा गया।
  3. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलें, इंटरनेट चालू रहे और कानूनी प्रक्रिया के बिना किसी को हिरासत में न लिया जाए।
  4. कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त और डीएमआरसी प्रमुख को अवमानना नोटिस जारी किया; मामले की अगली सुनवाई मंगलवार, 13 अक्टूबर को होगी।

सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) ने रविवार को केंद्र से कहा कि दिल्ली मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहें और इंटरनेट सेवाएं चालू रहें। इससे एक दिन पहले पुलिस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में पहुंचने की कोशिश कर रहे हज़ारों लोगों को हिरासत में लिया था।

रविवार की विशेष सुनवाई में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा कि किसी को भी “कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया” के अलावा हिरासत में नहीं लिया जाए, खासकर निषेधाज्ञा वाले इलाके के बाहर शांतिपूर्ण और निहत्थे जमावड़ों में शामिल लोगों को। ये निर्देश कानून-व्यवस्था की स्थिति के अधीन हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को क्या आदेश दिया

  • मेट्रो और ट्रेनें सामान्य रूप से चलेंजब तक सार्वजनिक व्यवस्था के लिए नियमन ज़रूरी न हो।
  • इंटरनेट चालू रहेकानून-व्यवस्था की स्थिति के अधीन।
  • कानून के बाहर हिरासत नहींखासकर निषेधाज्ञा वाले इलाके के बाहर शांतिपूर्ण, निहत्थे जमावड़ों के लिए।
  • बैरिकेडों की समीक्षा होलोग यातायात नियमों के तहत बेरोक-टोक आ-जा सकें।
  • तीन अधिकारियों को अवमानना नोटिसकेंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त और डीएमआरसी प्रमुख।
  • 13 अक्टूबर को फिर सुनवाईअवमानना और हिरासत से जुड़ी याचिकाएं एक साथ सुनी जाएंगी।

10 अक्टूबर को क्या हुआ

मई में ऑनलाइन शुरू हुए युवा आंदोलन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग के लिए जंतर-मंतर तक मार्च बुलाया था। दिल्ली पुलिस ने यह कहते हुए अनुमति नहीं दी कि अनुरोध बहुत देर से आया और सीजेपी ने पिछले प्रदर्शनों में दिए वचन तोड़े थे।

पुलिस ने मध्य दिल्ली में बैरिकेडिंग की, मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद किए और स्टेडियमों समेत अस्थायी हिरासत केंद्र बनाए। प्रदर्शन स्थल के 4 किलोमीटर के दायरे में शनिवार रात तक मोबाइल इंटरनेट बंद रहा। दिन भर में हिरासत में लिए गए लोगों में अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी और पिनराई विजयन, छात्र नेता नेहा बोरा, योगेंद्र यादव और यूट्यूबर ध्रुव राठी के साथ कई वकील और पत्रकार भी थे।

कितने लोग हिरासत में लिए गए, इस पर अलग-अलग दावे हैं। दिल्ली पुलिस सूत्रों ने यह संख्या करीब 1,000, गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने करीब 2,000 बताई, जबकि सीजेपी का कहना है कि 15,000 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया या रोका गया। कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं हुआ है।

पुलिस ने आकाशवाणी भवन और कनॉट प्लेस के पास पथराव की बात कही, और 15 से ज़्यादा पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर है। दिल्ली पुलिस ने 20 एफआईआर दर्ज की हैं, जिनमें एक हिंदू रक्षा दल के चार सदस्यों के खिलाफ है, जिन पर छात्रों से मारपीट का आरोप है।

सीजेपी के नेता

सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके और नेता सौरव दास व आशुतोष रांका को मुंबई से दिल्ली पहुंची उनकी फ्लाइट में ही हिरासत में ले लिया गया। दिल्ली पुलिस ने एक्स पर लिखा: “Preventive arrest u/s 126/170 BNSS of Sh. Abhijeet Dipke, Sh. Ashutosh Ranka and Sh. Saurav Das was done on 10.10.2026.”

पुलिस के मुताबिक रविवार सुबह दिल्ली कैंट थाने में एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने तीनों को एक साल तक शांति बनाए रखने के ₹50,000 के ज़मानती बॉन्ड पर रिहा किया। सीजेपी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने एक्स पर लिखा: “Condition - no breach of peace for one year.”

आंकड़ों में यह सप्ताहांत

  • 303 में 45मेट्रो स्टेशन, जिनमें 10 अक्टूबर को प्रवेश रोका गया, सॉलिसिटर जनरल के मुताबिक
  • 20प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस की दर्ज एफआईआर
  • ₹50,000सीजेपी के तीनों नेताओं में से हर एक का ज़मानती बॉन्ड

कोर्ट ने क्या कहा

वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की अवमानना याचिका में कहा गया है कि अधिकारियों ने दिल्ली आने वाली मेट्रो और ट्रेन सेवाएं पूरी तरह बंद न करने के कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश की अनदेखी की। बेंच ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और डीएमआरसी की अध्यक्ष डी. थारा को नोटिस जारी कर हलफनामा और अनुपालन रिपोर्ट मांगी।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि 10 अक्टूबर को 303 में से 45 मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश रोका गया था और शनिवार रात 10 बजे से सभी स्टेशन खुले हैं। डीएमआरसी की एक अधिसूचना में शुक्रवार रात से 57 स्टेशन बंद करने को कहा गया था।

हम अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों पर अतिक्रमण रोकने के लिए कर्तव्यबद्ध हैं।

जस्टिस जॉयमाल्य बागची, सुप्रीम कोर्ट, 11 अक्टूबर 2026 (अंग्रेज़ी से अनुवाद)

दोनों पक्ष

सीजेपी का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रहेंगे। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे ने शनिवार को कहा, “आप जितने लोगों को हिरासत में लेंगे, हम ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक वापस नहीं जाएंगे।” रिहाई के बाद दिपके ने सोशल मीडिया पर लिखा: “Modi, as PM, is an embarrassment to India.”

चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर से दोहरे, मृत और अयोग्य मतदाताओं के नाम हटते हैं और इसका मकसद “विदेशी अवैध प्रवासियों” को वोट देने से रोकना है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रदर्शनकारियों को “अराजक तत्व” कहा और कहा: “जंतर-मंतर पर जो हो रहा है, जो आप टीवी और कुछ सोशल मीडिया हैंडल पर देख रहे हैं, वह भारत की कहानी नहीं है।”

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि “शांतिपूर्ण सभा का अधिकार पूरी तरह सम्मानित और लागू हो”। जिनेवा में भारत के मिशन ने ऐसी चिंताओं को “बेबुनियाद” और “भारत के आंतरिक मामलों में अनुचित दखल” बताया।

आगे क्या

रविवार को जंतर-मंतर पर कोई बड़ा जमावड़ा नहीं दिखा। राहुल गांधी ने सोमवार, 12 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन के सड़क प्रदर्शन का ऐलान किया है और कांग्रेस ने अपने सांसदों से दिल्ली में रहने को कहा है। गांधी ने कहा, “मोदी और उनकी सरकार जितनी सख्ती करेगी, जेन ज़ी और छात्रों का गुस्सा उतना ही बढ़ेगा।” सुप्रीम कोर्ट मंगलवार, 13 अक्टूबर को अवमानना याचिका और हिरासत से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करेगा।