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एसआईआर तीसरा चरण: 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की मसौदा सूचियों से 6.15 करोड़ से ज़्यादा नाम बाहर
सबसे ज़्यादा नाम महाराष्ट्र में और सबसे बड़ा हिस्सा दिल्ली में कटा। चुनाव आयोग का कहना है कि ये अंतिम रूप से हटाए गए नाम नहीं हैं; विपक्षी दलों ने मताधिकार छीनने का आरोप लगाया है।

मुख्य बातें
- डेक्कन हेराल्ड के मुताबिक, 1 सितंबर तक प्रकाशित 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की मसौदा सूचियों में 6.15 करोड़ से ज़्यादा मतदाताओं के नाम नहीं हैं।
- संख्या के हिसाब से सबसे ज़्यादा नाम महाराष्ट्र में (2.07 करोड़) और अनुपात के हिसाब से सबसे ज़्यादा दिल्ली में (32.78%) छूटे।
- चुनाव आयोग का कहना है कि नाम इसलिए छूटे क्योंकि मतदाता अनुपस्थित थे, कहीं और चले गए थे, उनकी मृत्यु हो चुकी थी या वे दो जगह दर्ज थे, और ये अंतिम रूप से हटाए गए नाम नहीं हैं।
- राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं; चुनाव आयोग 'वोट चोरी' के आरोप को एक भ्रामक नैरेटिव का हिस्सा बताता है।
डेक्कन हेराल्ड ने 1 सितंबर को रिपोर्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तीसरे चरण में अब तक प्रकाशित मसौदा मतदाता सूचियों से 6.15 करोड़ से ज़्यादा नाम बाहर रह गए हैं। यह आंकड़ा उन 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का है जिनकी मसौदा सूचियां तब तक जारी हो चुकी थीं। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) का कहना है कि मसौदा सूची से छूटे नाम अंतिम रूप से हटाए गए नाम नहीं हैं और दावे दाखिल करके इन्हें फिर से जुड़वाया जा सकता है।
सबसे ज़्यादा नाम कहां कटे
पीटीआई के मुताबिक, 31 अगस्त को जारी महाराष्ट्र की मसौदा सूची से 2,06,88,487 लोगों के नाम छूटे, जो राज्य के 9.78 करोड़ मतदाताओं का 21.14% है। दिप्रिंट के मुताबिक, अनुपात के हिसाब से सबसे ज़्यादा नाम दिल्ली में कटे: 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47,56,722, यानी 32.78%। इनमें से ज़्यादातर को “स्थायी रूप से स्थानांतरित” दर्ज किया गया।
| राज्य या केंद्रशासित प्रदेश | मसौदा सूची से छूटे | पुरानी सूची में हिस्सा |
|---|---|---|
| दिल्ली | 47.57 लाख | 32.78% |
| महाराष्ट्र | 2.07 करोड़ | 21.14% |
| तेलंगाना | पुष्टि नहीं | करीब पांचवां हिस्सा |
| कर्नाटक | पुष्टि नहीं | करीब पांचवां हिस्सा |
| झारखंड | 43.62 लाख | 16.49% |
| हरियाणा | 33.8 लाख | 16.4% |
| आंध्र प्रदेश | 44.9 लाख | 10.8% |
| पंजाब | 20.66 लाख | 9.7% |
स्रोत: दिप्रिंट (दिल्ली; हिस्सा उसके आंकड़ों से निकाला गया); महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पीटीआई के ज़रिए; आउटलुक (तेलंगाना, कर्नाटक); झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, द पायनियर के ज़रिए; द वायर (हरियाणा, आंध्र प्रदेश); द ट्रिब्यून (पंजाब)।
आउटलुक ने पाया कि राज्यों के भीतर कुछ शहरी सीटों पर नाम ज़्यादा कटे। हैदराबाद की जुबली हिल्स सीट पर 1,79,510 नाम हटे, जिनमें से 83% को “स्थानांतरित” दर्ज किया गया, और बेंगलुरु की बोम्मनहल्ली सीट के 54.8% मतदाता मसौदा चरण में बाहर हो गए।
चुनाव आयोग क्या कहता है
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के एफएक्यू में आयोग का घोषित लक्ष्य है कि “कोई भी योग्य नागरिक छूटे नहीं और कोई भी अयोग्य व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो।” जब बूथ लेवल अधिकारी किसी मतदाता का गणना फॉर्म नहीं जुटा पाते, तो उसका नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरा (एएसडीडी) श्रेणी में मसौदा सूची से बाहर रह जाता है। उदाहरण के लिए, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड में छूटे 43.62 लाख नामों में 7.63 लाख मृत, 15.92 लाख स्थायी रूप से स्थानांतरित, 14.50 लाख ऐसे जिनका पता नहीं चला और 4.38 लाख एक से ज़्यादा जगह दर्ज मतदाता शामिल थे।
फ्री प्रेस जर्नल के मुताबिक, 2 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने इस दावे को भ्रामक बताया कि मतदाता सूचियों से 13 करोड़ मतदाता हटाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने कहा कि यह आंकड़ा जून 2025 से अब तक एसआईआर के सभी चरणों में मसौदा चरण पर अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरे दर्ज किए गए मतदाताओं का है, अंतिम सूचियों से हटाए गए नामों का नहीं। आयोग ने “वोट चोरी” के आरोप को एक भ्रामक नैरेटिव का हिस्सा बताया और कहा कि एसआईआर शुरू होने के बाद से 18 से 28 साल की उम्र के करीब 2.37 करोड़ मतदाता जोड़े गए हैं।
विपक्ष क्या कहता है
पीटीआई की ओर से किए गए उनकी हिंदी पोस्ट के अंग्रेज़ी अनुवाद के मुताबिक, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 1 सितंबर की एक पोस्ट में महाराष्ट्र में छूटे नामों को “वोट चोरी” बताया और आरोप लगाया कि इस कवायद का मकसद भाजपा की जीत सुनिश्चित करना है। द ट्रिब्यून के मुताबिक, पंजाब में कांग्रेस, भाजपा, आप और शिरोमणि अकाली दल, सभी ने कहा कि वे बूथ-दर-बूथ मसौदा सूचियों की जांच कर रहे हैं। आईएएनएस के मुताबिक, 8 अक्टूबर को पटना में एसआईआर के खिलाफ महागठबंधन के मार्च के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों में बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी शामिल थे।
आगे क्या होगा
अंतिम सूचियां राज्य-दर-राज्य प्रकाशित हो रही हैं। न्यूज़ ऑन एयर के मुताबिक, महाराष्ट्र में चुनाव आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय सीमा 12 अक्टूबर तक बढ़ा दी है, उनका निपटारा 10 नवंबर तक होना है और अंतिम सूची अब 16 नवंबर को आएगी। बिज़नेस टुडे के मुताबिक, दिल्ली में दावे और आपत्तियां अब 30 अक्टूबर तक दाखिल की जा सकती हैं। जिन मतदाताओं के नाम छूटे हैं, वे घोषणापत्र के साथ फॉर्म 6 भरकर नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। अपना नाम कैसे जांचें, यह हमारे लेख में बताया गया है।
मूल दस्तावेज़
- ECI revises Maharashtra electoral roll schedule, final list on Nov 16News On AIR (Prasar Bharati), 26 सितंबर 2026
- FAQ: Special Intensive Revision 2026Chief Electoral Officer, Delhi, 30 जून 2026