समझिएमतदाता सूची
मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), और अपना नाम कैसे जांचें
एसआईआर क्या है, मसौदा सूची से नाम क्यों छूट रहे हैं, और अगर आपका नाम गायब है या उसमें गलती है तो कौन-सा फॉर्म भरें।
संक्षेप में
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मतदाता सूची के हर नाम की घर-घर जाकर दोबारा जांच है, जो अब अपने तीसरे चरण में 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहा है। आप voters.eci.gov.in या ECINET ऐप पर अपने ईपीआईसी नंबर या पंजीकृत मोबाइल नंबर से अपना नाम जांच सकते हैं, या अपने बूथ लेवल अधिकारी से पूछ सकते हैं। नाम न हो तो घोषणा पत्र के साथ फॉर्म 6 भरें।
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) क्या है?
यह मतदाता सूची की हर प्रविष्टि की नए सिरे से, घर-घर जाकर होने वाली जांच है, जिसमें बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) सूची में दर्ज हर मतदाता से एक फॉर्म लेते हैं। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के FAQ के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) “हर चुनाव से पहले या ज़रूरत के हिसाब से” मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण करता है, और गहन पुनरीक्षण में नई गणना के ज़रिए सूची दोबारा तैयार की जाती है। FAQ में इसका मकसद बताया गया है: “कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से छूटे नहीं और कोई भी अपात्र व्यक्ति उसमें शामिल न हो।” चुनाव आयोग ने पलायन से जुड़े दोहरे पंजीकरण और ऐसे मृत मतदाताओं का हवाला दिया है जिनके नाम नहीं हटाए गए थे।
एसआईआर जून 2025 में बिहार से शुरू हुआ। The News Minute के अनुसार, चुनाव आयोग ने 14 मई 2026 को तीसरे चरण का ऐलान किया, जिसमें 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 36.73 करोड़ मतदाता शामिल हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) ने बिहार एसआईआर के आदेश को सही ठहराया।
एसआईआर की प्रक्रिया कैसे चलती है?
बीएलओ हर मतदाता को पहले से छपा हुआ गणना फॉर्म देते हैं और उसे वापस लेते हैं; जिनके फॉर्म वापस नहीं मिलते, उनके नाम मसौदा सूची में नहीं आते। बीएलओ कम से कम तीन बार घर आते हैं, और मतदाता के पास पावती की एक प्रति रहती है। फॉर्म voters.eci.gov.in पर ऑनलाइन भी भरे जा सकते हैं। दिल्ली FAQ के अनुसार, “गणना चरण के दौरान मतदाता को कोई दस्तावेज़ देने की ज़रूरत नहीं है,” और आधार नंबर देना वैकल्पिक है। अगर कोई घर से बाहर है, तो परिवार का कोई वयस्क सदस्य उसका फॉर्म भर सकता है।
फॉर्म में पिछले गहन पुनरीक्षण वाली सूची (दिल्ली में 2002; पंजाब में 2003) का ब्योरा मांगा जाता है, या तो मतदाता का अपना, या माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी का। जिन मतदाताओं का उस सूची से संबंध नहीं जुड़ पाता, उन्हें नोटिस मिल सकता है, जिसमें चुनाव आयोग के बताए 12 दस्तावेज़ों में से कोई एक मांगा जाएगा।
मसौदा मतदाता सूची से इतने नाम क्यों गायब हैं?
क्योंकि जिसका फॉर्म वापस नहीं मिलता, उसका नाम मसौदा सूची से बाहर रह जाता है, और इसके कारणों को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरा नाम, इन श्रेणियों में बांटा जाता है। Deccan Herald ने 1 सितंबर को बताया कि 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मसौदा सूचियों में 6.15 करोड़ से ज़्यादा नाम छूटे। चुनाव आयोग का कहना है कि यह अंतिम रूप से नाम हटाना नहीं है, और दावों की अवधि में नाम वापस जुड़ सकते हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं; हमारी खबर में दोनों पक्षों की बात और राज्यवार आंकड़े हैं।
आंकड़ों में एसआईआर (अक्टूबर 2026 तक)
- 36.73 करोड़तीसरे चरण में शामिल मतदाता
- 6.15 करोड़17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तीसरे चरण की मसौदा सूचियों से छूटे नाम
- 12निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) का नोटिस मिलने पर मान्य दस्तावेज़
- 1950टोल-फ्री मतदाता हेल्पलाइन
मतदाता सूची में अपना नाम कैसे जांचें?
voters.eci.gov.in या ECINET मोबाइल ऐप पर खोजें, अपने राज्य के सीईओ की वेबसाइट पर मसौदा सूची देखें, या अपने बीएलओ से पूछें।
- voters.eci.gov.in या ECINET ऐप पर चुनाव आयोग की मतदाता खोज (इलेक्टोरल सर्च) खोलें।
- अपना राज्य चुनें और ईपीआईसी (वोटर आईडी) नंबर से, या चुनाव आयोग में पंजीकृत मोबाइल नंबर से खोजें, और कैप्चा भरें।
- कोई नतीजा न आए, तो अपने राज्य के सीईओ की वेबसाइट पर, या बीएलओ या मतदाता केंद्र पर, अपने मतदान केंद्र की मसौदा सूची देखें।
- फिर भी नाम न मिले? अपने राज्य में दावों की आखिरी तारीख से पहले घोषणा पत्र के साथ फॉर्म 6 भरें। मदद के लिए 1950 पर फोन करें।
दिल्ली FAQ के अनुसार, आप “Book a Call with BLO” (बीएलओ से कॉल बुक करें) विकल्प का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
मतदाता सूची में मेरा नाम नहीं है, अब क्या करूं?
अपने राज्य में दावे और आपत्तियों की अवधि के दौरान घोषणा पत्र और सहायक दस्तावेज़ों के साथ फॉर्म 6 भरें। ThePrint के अनुसार, आप voters.eci.gov.in या ECINET ऐप के ज़रिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, या कागज़ पर अपने बीएलओ, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी या निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को दे सकते हैं। अगर आप स्थायी रूप से कहीं और चले गए हैं, तो नए पते पर फॉर्म 6 भरने से आपका नाम वहां स्थानांतरित हो जाता है।
दो और फॉर्म अहम हैं। PTI ने महाराष्ट्र की मसौदा सूची पर अपने एक्सप्लेनर में बताया कि फॉर्म 7 किसी प्रविष्टि पर आपत्ति के लिए है, जैसे सूची में अब भी दर्ज किसी मृत मतदाता का नाम, और फॉर्म 8 नाम या पते जैसे ब्योरे में सुधार के लिए है।
अंतिम मतदाता सूची में भी नाम न हो तो क्या करें?
दिल्ली FAQ के अनुसार, आप 15 दिनों के भीतर ज़िला निर्वाचन अधिकारी या ज़िलाधिकारी के पास अपील कर सकते हैं। अंतिम सूचियां पूरे शरद ऋतु में राज्य-दर-राज्य प्रकाशित हो रही हैं, और कई राज्यों में तारीखें बदली हैं, इसलिए मौजूदा कार्यक्रम के लिए अपने राज्य के सीईओ की वेबसाइट देखें।
फॉर्म 6 के घोषणा पत्र पर विवाद क्या है?
चुनाव आयोग ने फॉर्म 6 में एसआईआर से जुड़ा एक घोषणा पत्र जोड़ा, और इसकी वैधता की अब सुप्रीम कोर्ट जांच कर रहा है। PTI के अनुसार, 25 सितंबर को चुनाव आयोग ने उन राज्यों में ऑनलाइन फॉर्म 6 से यह अतिरिक्त घोषणा पत्र हटा लिया जहां पुनरीक्षण पूरा हो चुका था। 5 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा, “फॉर्म 6 में किसी भी बदलाव को हमने मंज़ूरी नहीं दी है।” 26 सितंबर के प्रेस नोट में चुनाव आयोग का रुख है कि “एसआईआर के लिए फॉर्म 6 के साथ जोड़े गए घोषणा पत्र को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है।” जब तक कोर्ट फैसला नहीं देता, दावे दाखिल करने वाले मतदाताओं को वही फॉर्म और घोषणा पत्र इस्तेमाल करना चाहिए जो उनके राज्य के सीईओ ने अभी तय किया है।
मूल दस्तावेज़
- FAQ: Special Intensive Revision 2026Chief Electoral Officer, Delhi, 30 जून 2026