LokVox

समझिएराजनीति

कॉकरोच जनता पार्टी क्या है और वह क्या चाहती है?

मई 2026 के मध्य में शुरू हुआ एक व्यंग्य भरा ऑनलाइन पेज आज देश के सबसे चर्चित युवा आंदोलनों में है। नाम कहां से आया, इसे कौन चलाता है और यह मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ क्यों उतरा है।

संपादकीय डेस्क सेप्रकाशित

संक्षेप में

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) एक युवा प्रदर्शन आंदोलन है, जिसे अभिजीत दिपके ने मई 2026 में ऑनलाइन शुरू किया, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी में कुछ युवाओं की तुलना कॉकरोच से की गई। यह पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है। नीट पेपर लीक पर इसके प्रदर्शनों के बाद जुलाई में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया, और सितंबर के आखिर से यह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

कॉकरोच जनता पार्टी क्या है?

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) एक युवा प्रदर्शन आंदोलन है, जो मई 2026 के मध्य में एक व्यंग्य भरे ऑनलाइन पेज के रूप में शुरू हुआ और अब दिल्ली व दूसरे शहरों में सड़क प्रदर्शनों की अगुवाई कर रहा है। यह खुद को “A political front of the youth, by the youth, for the youth” और आधे मज़ाक में “Secular, Socialist, Democratic, Lazy” बताता है।

इसका अंदाज़ व्यंग्य का है। इसकी मज़ाकिया सदस्यता शर्तों में बेरोज़गार, आलसी, हर वक्त ऑनलाइन रहने वाला और “पेशेवर तरीके से भड़ास निकालने” की काबिलियत वाला होना शामिल है। लेकिन इसकी मांगें गंभीर हैं: परीक्षा पेपर लीक की जवाबदेही, और अब मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा।

इसका नाम कॉकरोच जनता पार्टी क्यों है?

यह नाम भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणी का जवाब है। उन्होंने बिना सही योग्यता के पेशों में आने वाले “youngsters like cockroaches” की बात कही थी। अगले दिन उन्होंने साफ किया कि उनका इशारा फर्ज़ी डिग्री वालों की तरफ था, आम युवाओं की तरफ नहीं, जिन्हें उन्होंने “विकसित भारत के स्तंभ” कहा।

तब तक यह शब्द चल पड़ा था। युवाओं ने इसे पहचान बना लिया और “मैं भी कॉकरोच” जैसे नारे आए। यह नाम भारतीय जनता पार्टी के नाम पर भी चुटकी है।

इसे कौन चलाता है?

इसके संस्थापक अभिजीत दिपके हैं, जिन्होंने बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस की पढ़ाई की है। उनका कहना है कि मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी पर विवाद के बाद यह विचार “अचानक” आया।

खबरों में सबसे ज़्यादा दिखने वाले नेता दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका हैं, जिन्हें 10 अक्टूबर को दिल्ली में एक साथ हिरासत में लिया गया। लातूर के 35 साल के अजिंक्य शिंदे अगस्त 2026 में सीजेपी के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी बने और बाकी नेताओं के हिरासत में होने पर आंदोलन की अगुवाई करते हैं।

क्या यह राजनीतिक दल है?

नहीं। नाम के बावजूद यह चुनाव आयोग में दल के रूप में पंजीकृत नहीं है। इसने कोई चुनाव नहीं लड़ा है। विपक्ष के सांसदों ने खुलकर इसका समर्थन किया है: शुरुआत के कुछ ही दिनों में तृणमूल कांग्रेस के सांसद महुआ मोइत्रा और कीर्ति आज़ाद ने ऑनलाइन खुलकर खुद को इससे जोड़ा।

आंकड़ों में सीजेपी

  • 60 लाख+20 मई 2026 तक इंस्टाग्राम फॉलोअर, शुरुआत के कुछ ही दिन बाद
  • 36 दिननीट प्रदर्शन, जिसके बाद शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दिया
  • 13 करोड़+अब तक मतदाता सूचियों से हटे नाम, मीडिया के आंकड़ों के मुताबिक

नीट प्रदर्शनों से क्या हासिल हुआ?

नीट मेडिकल प्रवेश परीक्षा के पेपर लीक पर सीजेपी के नेतृत्व में 36 दिन चले प्रदर्शनों के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को इस्तीफा दिया। दिपके ने यह खबर जंतर-मंतर पर समर्थकों को सुनाई।

20 जुलाई को प्रदर्शन हिंसक हो गया, जब पुलिस ने संसद की ओर जा रहे मार्च को आंसू गैस और लाठियों से रोका और 100 से ज़्यादा प्रदर्शनकारी घायल हुए। इसके बाद बेंगलुरु, जयपुर, लखनऊ, मुंबई और पटना में प्रदर्शन फैल गए।

यह मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ क्यों है?

सीजेपी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को ज़िम्मेदार मानती है, जिसमें उसके मुताबिक मतदाताओं के नाम गलत तरीके से काटे गए। मीडिया के आंकड़ों के मुताबिक अब तक मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से ज़्यादा नाम हटाए जा चुके हैं।

सितंबर के आखिर में आंदोलन तेज़ हुआ। लगभग उसी समय इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के दो साथी आयुक्तों ने 10 महीनों में एसआईआर के फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। चुनाव आयोग आरोपों को खारिज करता है और कहता है कि पुनरीक्षण से दोहरे, मृत या अयोग्य मतदाताओं के नाम हटते हैं।

सीजेपी संयोजक सौरव दास ने 2 अक्टूबर को कहा, “हम इसे तभी खत्म करेंगे जब ज्ञानेश कुमार इस्तीफा देंगे। उन्हें जाना होगा।”

मीम से जंतर-मंतर तक

  1. 15 मई 2026अदालत में सीजेआई सूर्यकांत की 'कॉकरोच' टिप्पणी; अगले दिन सफाई।
  2. मई 2026 के मध्यअभिजीत दिपके ने ऑनलाइन कॉकरोच जनता पार्टी शुरू की।
  3. 20 जुलाई 2026पुलिस ने संसद की ओर नीट प्रदर्शन मार्च रोका; 100 से ज़्यादा घायल।
  4. 25 जुलाई 2026शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
  5. सितंबर 2026 का अंतसीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक देशव्यापी प्रदर्शन की चेतावनी दी।
  6. 2 अक्टूबर 2026मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जंतर-मंतर पर पहला प्रदर्शन; पुलिस ने सैकड़ों को हिरासत में लिया।
  7. 10 अक्टूबर 2026जंतर-मंतर मार्च रोका गया; हज़ारों हिरासत में, नेता दिल्ली हवाई अड्डे पर पकड़े गए।
  8. 11 अक्टूबर 2026नेता रिहा; सुप्रीम कोर्ट ने मेट्रो और इंटरनेट बहाल करने को कहा।

सरकार और भाजपा का क्या कहना है?

भाजपा और चुनाव आयोग सीजेपी के आरोपों को खारिज करते हैं, और दिल्ली पुलिस ने इसे जंतर-मंतर पर जुटने की अनुमति नहीं दी। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने 8 अक्टूबर को कहा कि ये आरोप “एक गैरज़िम्मेदार, अराजकतावादी विपक्ष” लगा रहा है। 10 अक्टूबर को पुलिस ने दिल्ली भर में हज़ारों लोगों को हिरासत में लिया, और सुप्रीम कोर्ट ने मेट्रो व ट्रेन बंद करने पर वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब मांगा है।

आगे क्या होगा?

सीजेपी का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रहेंगे। अजिंक्य शिंदे ने 10 अक्टूबर को कहा, “बड़ी संख्या में जंतर-मंतर आइए, और जहां भी दिल्ली पुलिस रोके, वहीं प्रदर्शन कीजिए।” सुप्रीम कोर्ट 13 अक्टूबर को हिरासत और अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह संसद के दोनों सदनों से प्रस्ताव पास होना ज़रूरी है, इसलिए सीजेपी की मांग इस पर टिकी है कि मुख्य चुनाव आयुक्त खुद पद छोड़ें या संसद कदम उठाए।