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राज्यसभा चुनाव कैसे होते हैं

राज्यसभा सदस्यों को आम मतदाता नहीं, विधायक चुनते हैं, वरीयता क्रम वाले मतपत्र से, जिसे उन्हें अपनी पार्टी को दिखाना होता है। अक्टूबर में खाली हो रही सभी 12 सीटें निर्विरोध भरी गईं।

संपादकीय डेस्क सेप्रकाशित

संक्षेप में

राज्यों से राज्यसभा सदस्यों को हर राज्य के निर्वाचित विधायक एकल संक्रमणीय मत के ज़रिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व की पद्धति से चुनते हैं। सदस्यों का कार्यकाल छह साल का होता है, हर दो साल में करीब एक-तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं, और मतदान खुले मतपत्र से होता है, जिसमें नोटा का विकल्प नहीं है।

राज्यसभा सदस्यों को कौन चुनता है?

हर राज्य की विधानसभा के निर्वाचित सदस्य, आम जनता नहीं। संविधान का अनुच्छेद 80 कहता है कि हर राज्य के प्रतिनिधि “राज्य की विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा” चुने जाएंगे, और यह चुनाव “एकल संक्रमणीय मत के ज़रिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व की पद्धति” से होगा।

सदन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकतम 238 निर्वाचित प्रतिनिधि हो सकते हैं, और इनके अलावा राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत 12 सदस्य। संविधान की चौथी अनुसूची तय करती है कि किस राज्य को कितनी सीटें मिलेंगी।

राज्यसभा चुनाव हर दो साल में क्यों होते हैं?

क्योंकि यह सदन कभी भंग नहीं होता, और हर दूसरे साल इसके करीब एक-तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं। अनुच्छेद 83 कहता है कि राज्यसभा “भंग नहीं होगी”। सदस्यों का कार्यकाल छह साल का होता है, इसलिए सीटें बैच में खाली होती हैं और उन्हें द्विवार्षिक चुनाव के ज़रिए भरा जाता है।

एकल संक्रमणीय मत कैसे काम करता है?

हर विधायक उम्मीदवारों को अपनी वरीयता के क्रम में रखता है, और कोई उम्मीदवार वोटों का एक तय कोटा हासिल करके जीतता है। पहली वरीयता के हर वोट का मूल्य 100 अंक माना जाता है, ताकि भिन्नों की गिनती हो सके। Deccan Herald के बताए नियम के अनुसार, उम्मीदवार को वैध वोटों के कुल मूल्य को सीटों की संख्या में एक जोड़कर भाग देने से मिली संख्या से एक अंक ज़्यादा चाहिए।

कोटा कैसे निकलता है (उदाहरण)

  • 400वैध वोट डालने वाले विधायक (उदाहरण)
  • 10भरी जाने वाली सीटें (उदाहरण)
  • 3,637जीत के लिए ज़रूरी अंक: 40,000 अंक (400 वोट x 100) को 11 से भाग देने पर 3,636.36, उसमें एक अंक जोड़कर। यह करीब 36.4 वोट है, इसलिए पहली वरीयता के 37 वोट से सीट पक्की हो जाती है

अगर किसी उम्मीदवार को कोटे से ज़्यादा वोट मिलते हैं, तो अतिरिक्त वोट उन मतपत्रों की अगली वरीयता को घटे हुए मूल्य पर चले जाते हैं। अगर सीटें फिर भी खाली रहें, तो गिनती अगले दौर में जाती है।

राज्यसभा चुनाव में मतपत्र खुला क्यों होता है?

ताकि क्रॉस-वोटिंग मुश्किल हो। Deccan Herald के अनुसार, लोकसभा या विधानसभा चुनाव से अलग, राज्यसभा चुनाव में वोट डालने वाले विधायकों को अपना भरा हुआ मतपत्र अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखाना होता है।

सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) ने इस तर्क का समर्थन किया है। LiveLaw के अनुसार, 2018 के एक फैसले में कोर्ट ने कहा कि राज्यसभा के चुनाव में “मतदान की गोपनीयता की कोई जगह नहीं है”।

क्या विधायक राज्यसभा चुनाव में नोटा चुन सकते हैं?

नहीं। 21 अगस्त 2018 को मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर व डी.वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने चुनाव आयोग के उन परिपत्रों को रद्द कर दिया जिनसे राज्यसभा के मतपत्रों में “इनमें से कोई नहीं” (नोटा) का विकल्प जोड़ा गया था। यह याचिका कांग्रेस के मुख्य सचेतक शैलेश मनुभाई परमार ने दायर की थी।

LiveLaw के अनुसार, कोर्ट ने कहा कि नोटा प्रत्यक्ष चुनावों में काम कर सकता है, लेकिन अप्रत्यक्ष चुनाव में यह लोकतंत्र की शुचिता को कमज़ोर करेगा और दल-बदल व भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे सकता है। कोर्ट ने इन चुनावों में पार्टी अनुशासन के महत्व पर ज़ोर दिया।

कार्यकाल के बीच कोई सांसद इस्तीफा दे तो क्या होता है?

सीट अलग उपचुनाव से भरी जाती है। पश्चिम बंगाल में ताज़ा उपचुनाव रुक्मिणी “कोयल” मल्लिक की खाली की गई सीट के लिए था। IANS के अनुसार, वे 2026 की शुरुआत में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के टिकट पर निर्विरोध चुनी गई थीं और किसी सत्र में शामिल हुए बिना 16 जुलाई को इस्तीफा दे दिया। जून के बाद इस्तीफा देने वाली वे टीएमसी की चौथी राज्यसभा सदस्य थीं। इसके बाद वे भाजपा में शामिल हो गईं, जिसने उन्हें उसी सीट के लिए अपना उम्मीदवार बनाया। डीडी न्यूज़ के अनुसार, 9 अक्टूबर को वे निर्विरोध चुनी गईं।

अक्टूबर 2026 में राज्यसभा की कौन-सी सीटों पर चुनाव थे?

11 द्विवार्षिक सीटों और एक उपचुनाव के लिए मतदान 16 अक्टूबर को होना था, लेकिन सभी सीटें 9 अक्टूबर को निर्विरोध भर गईं। News On AIR के अनुसार, चुनाव आयोग ने 29 सितंबर को उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक सीट के लिए चुनाव अधिसूचित किए, जिनके सदस्य 25 नवंबर 2026 को रिटायर हो रहे हैं।

राज्यसभा चुनाव, अक्टूबर 2026

  1. 29 सितंबर 2026चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की 1 सीट के लिए द्विवार्षिक चुनाव अधिसूचित किए।
  2. 6 अक्टूबर 2026नामांकन बंद। उत्तर प्रदेश में 11 नामांकन दाखिल हुए, जिनमें से एक बिना प्रस्तावक वाले निर्दलीय का था (UNI)।
  3. 7 अक्टूबर 2026नामांकनों की जांच।
  4. 9 अक्टूबर 2026नाम वापसी की आखिरी तारीख। उत्तर प्रदेश के सभी 10 उम्मीदवार, उत्तराखंड के दिनेश आर्य और पश्चिम बंगाल की कोयल मल्लिक निर्विरोध निर्वाचित घोषित (डीडी न्यूज़)।
  5. 16 अक्टूबर 2026मतदान की तय तारीख, जिसकी अब ज़रूरत नहीं रही।
  6. 25 नवंबर 2026उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के रिटायर हो रहे सदस्यों का कार्यकाल खत्म।

उत्तर प्रदेश में भाजपा ने आठ उम्मीदवार उतारे: धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार (IANS)। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और बी.एल. वर्मा को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया। समाजवादी पार्टी (सपा) ने दो उम्मीदवार उतारे, राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी (Business Today)। डीडी न्यूज़ के अनुसार, दोनों निर्दलीय नामांकन जांच में खारिज हो गए, और निर्वाचन अधिकारी ने 9 अक्टूबर को सभी 10 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया। उत्तराखंड में भाजपा के दिनेश कुमार आर्य निर्विरोध चुने गए।

मूल दस्तावेज़