LokVox

राजनीतिविपक्ष

सुप्रीम कोर्ट से पहले रोका गया इंडिया गठबंधन का मार्च, एसआईआर के खिलाफ याचिका दायर

पुलिस ने विपक्ष के मार्च को सुप्रीम कोर्ट से पहले भगवान दास रोड पर रोक दिया। राहुल गांधी समेत 11 नेताओं ने चुनाव आयोग और तीनों आयुक्तों के खिलाफ रिट याचिका दायर की।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
अपडेट
नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट परिसर के भीतर
नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट परिसर के भीतरPinakpani / Wikimedia

मुख्य बातें

  1. पुलिस ने इंडिया गठबंधन के मार्च को सुप्रीम कोर्ट से पहले भगवान दास रोड पर बैरिकेड लगाकर रोका।
  2. राहुल गांधी और 10 अन्य नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ रिट याचिका दायर की, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्त भी प्रतिवादी हैं।
  3. याचिका में सभी राज्यों में एसआईआर पर अंतरिम रोक मांगी गई है; मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि समय पर दायर होने पर अदालत इसे मंगलवार को लेगी।

सोमवार शाम पुलिस ने इंडिया गठबंधन के मार्च को सुप्रीम कोर्ट पहुंचने से पहले भगवान दास रोड पर बैरिकेड लगाकर रोक दिया। लगभग उसी समय गठबंधन के वकीलों ने वह याचिका दायर कर दी जिसका वादा किया गया था: मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के खिलाफ रिट याचिका।

राहुल गांधी व अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग नाम का यह मामला एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड एस प्रसन्ना के जरिए दोपहर बाद, अदालत का फाइलिंग काउंटर बंद होने से कुछ पहले दायर किया गया। इसका डायरी नंबर 64196/2026 है।

याचिका पर ग्यारह नाम

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 11 याचिकाकर्ताओं में सबसे ऊपर हैं। उनके साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव (सपा), तेजस्वी यादव (राजद), सौगत राय (टीएमसी), सुप्रिया सुले (एनसीपी-एसपी), संजय राउत (शिवसेना-यूबीटी), डी राजा (सीपीआई), एम ए बेबी (सीपीआई(एम)), महुआ माजी (झामुमो) और ई टी मोहम्मद बशीर (आईयूएमएल) हैं।

याचिका में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और एसआईआर में गड़बड़ियों का आरोप है। इसमें अदालत से मांग की गई है कि मामले का फैसला होने तक सभी राज्यों में पुनरीक्षण पर रोक लगे, आयोग के एसआईआर से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक कराए जाएं और नाम हटाने की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति बने। याचिका में हटाए गए मतदाताओं की बूथ-वार सूची कारणों के साथ जारी करने और बिना नोटिस व सुनवाई के किसी का नाम न काटने की मांग भी है।

रविवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने गठबंधन के नेताओं से मिलने से इनकार कर दिया था और उन्हें याचिका दायर करने को कहा था। सोमवार को उन्होंने संकेत दिया कि समय पर दायर होने पर अदालत इसे मंगलवार को सुनने को तैयार है। एसआईआर से जुड़ी दूसरी याचिकाएं उसी दिन पहले से सूचीबद्ध हैं।

ऐसे थमा मार्च

नेता कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया से बस में निकले और करीब शाम 4:20 बजे कनॉट प्लेस के बाहरी घेरे से पैदल चल पड़े। “मार्च फॉर डेमोक्रेसी” मंडी हाउस से आगे बढ़ा, लेकिन भगवान दास रोड पर पुलिस के बैरिकेड ने उसे रोक दिया। राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने एक गाड़ी की छत पर चढ़कर भीड़ को संबोधित किया।

अखिलेश यादव ने कहा, “सरकार को हमारी बात सुननी चाहिए और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना चाहिए।” सीपीआई महासचिव डी राजा ने प्रधानमंत्री पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया: “प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर एक शब्द नहीं कहा है।”

शाम को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, खड़गे और अखिलेश यादव अदालत की रजिस्ट्री के भीतर गए, जबकि बाकी नेता गेट पर इंतज़ार करते रहे। सोमवार को किसी नेता को हिरासत में लिए जाने की खबर नहीं आई।

राहुल गांधी का आरोप

मार्च से पहले कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में राहुल गांधी ने फिर मुख्य चुनाव आयुक्त से पद छोड़ने को कहा। उन्होंने कहा, “इस्तीफा दीजिए, सरकारी गवाह बन जाइए; आपसे गलती हुई है, लेकिन इस गलती के पीछे का दिमाग आप नहीं हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार “मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर टिक नहीं पाएंगे”।

दूसरा पक्ष

भाजपा ने मार्च और याचिका दोनों को खारिज किया। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने कहा, “यह बेबुनियाद है... वे झूठ बोल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट एसआईआर की संवैधानिकता पर पहले ही फैसला दे चुका है।”

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा, “भारत के लोकतंत्र की विश्वसनीयता को विपक्ष की राजनीतिक सुविधा का बंधक नहीं बनाया जा सकता।” उन्होंने आयोग के बचाव में 124 पूर्व अधिकारियों के खुले पत्र का भी हवाला दिया। सोमवार रात तक चुनाव आयोग की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी।

इससे पहले अदालत में मुख्य न्यायाधीश ने कहा था, “सुप्रीम कोर्ट को इसमें घसीटा नहीं जाना चाहिए।” राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के एक कार्यक्रम में प्रदर्शनों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “यह कानून-व्यवस्था का मामला है। यह मेरा विषय नहीं है।” इस टिप्पणी पर तब विवाद खड़ा हो गया जब कांग्रेस की केरलम इकाई ने उनसे इस्तीफे की मांग वाली पोस्ट डाली और फिर हटा ली।

आगे क्या

मंगलवार को अदालत सप्ताहांत की हिरासतों से जुड़ी याचिकाओं और केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त और डीएमआरसी प्रमुख के खिलाफ अवमानना याचिका पर भी सुनवाई करेगी। गठबंधन की याचिका इनके साथ सुनी जाएगी या नहीं, यह इस पर निर्भर करेगा कि रजिस्ट्री उसे समय पर मंज़ूरी देती है या नहीं।

अपडेट 12 अक्टूबर 2026, रात 9:30 बजे: यह खबर पहली बार प्रकाशित होने के बाद अपडेट की गई।