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दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर वकील, पत्रकार और डीवाईएफआई सुप्रीम कोर्ट पहुंचे

बार एसोसिएशन, पत्रकारों के दो संगठनों और एक राज्यसभा सांसद ने नई याचिकाएं दायर की हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वकील शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं, और मामलों को मंगलवार के लिए सूचीबद्ध किया।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
नई दिल्ली के एक कार्यक्रम में जज और वकील (फ़ाइल फ़ोटो)
नई दिल्ली के एक कार्यक्रम में जज और वकील (फ़ाइल फ़ोटो)Ajayndelhi / Wikimedia

मुख्य बातें

  1. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन ने 10 अक्टूबर को कोर्ट के पास वकीलों के साथ पुलिस के बर्ताव की जांच मांगी है।
  2. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि बार के हर सदस्य को शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने का अधिकार है।
  3. हिरासत और अवमानना से जुड़ी याचिकाएं मंगलवार, 13 अक्टूबर को सुनी जाएंगी, उसी दिन एसआईआर की याचिकाएं भी सूचीबद्ध हैं।

पिछले सप्ताहांत मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान की गई हिरासत को लेकर वकील, पत्रकार और एक राज्यसभा सांसद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। कोर्ट हिरासत और अवमानना से जुड़े मामलों पर मंगलवार, 13 अक्टूबर को सुनवाई करेगा।

ये याचिकाएं उस मामले में जुड़ती हैं जिसे कोर्ट ने रविवार की विशेष बैठक में खोला था। तब कोर्ट ने मेट्रो और इंटरनेट सेवाएं बहाल करने का आदेश दिया था और कहा था कि शांतिपूर्ण, निहत्थे लोगों को कानून से बाहर जाकर हिरासत में नहीं रखा जा सकता।

बार एसोसिएशन कोर्ट में

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) का कहना है कि 10 अक्टूबर को कोर्ट के पास वरिष्ठ अधिवक्ताओं, महिला वकीलों और बुज़ुर्ग वकीलों समेत कई अधिवक्ताओं से धक्का-मुक्की की गई और उन्हें “हिरासत की वजह बताए बिना ज़बरदस्ती पुलिस वाहनों में बिठाकर ले जाया गया।” एससीबीए ने हिरासत, उसमें शामिल अधिकारियों और कमान की कड़ी पर स्थिति रिपोर्ट, बीएनएसएस की धारा 163 के तहत जारी निषेधाज्ञा का पूरा आदेश, और सीसीटीवी व बॉडी-कैमरा फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की है। वह सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली की दूसरी अदालतों तक पहुंचने के लिए साफ़ रास्ते भी चाहता है।

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) ने स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग की है। उसकी याचिका कहती है कि वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत को हाथ-पैर पकड़कर उठाया गया, महिला वकीलों से बिना नाम-पट्टी वाली महिला पुलिसकर्मियों ने बदसलूकी की, और हिरासत में लिए गए वकीलों को यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स ले जाया गया। याचिका के मुताबिक, “शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने और असहमति जताने के अधिकार को खोखला नहीं बनाया जा सकता।”

मुख्य न्यायाधीश ने क्या कहा

सोमवार सुबह ये मामले मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सामने उठाए गए। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि धारा 163 का कोई आदेश सार्वजनिक नहीं किया गया है, और पीठ से पुलिस को संयम बरतने को कहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “कुछ वीडियो हैं, जो मैं कल दिखाऊंगा।”

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वकील प्रदर्शन करने के लिए स्वतंत्र हैं, और कोर्ट को राजनीति से दूर रखने की अपील की।

हर वकील, बार के हर सदस्य को शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का हिस्सा बनने का अधिकार है।

सूर्यकांत, भारत के मुख्य न्यायाधीश, कोर्ट में, 12 अक्टूबर 2026

उन्होंने कहा, “वकीलों, वादियों और कोर्ट कर्मचारियों की आवाजाही में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए। उन्हें काम करने दिया जाना चाहिए। मैंने प्रदर्शनकारियों से भी अपील की है। सभी राजनीतिक दलों से भी... सुप्रीम कोर्ट को इसमें घसीटा नहीं जाना चाहिए।”

एससीबीए अध्यक्ष प्रदीप राय ने भी यही बात रखी। उन्होंने कहा, “पार्टियों को हमारे दायरे में दख़ल नहीं देना चाहिए।” दिन में बाद में एससीबीए और एससीएओआरए, दोनों ने प्रस्ताव पारित कर सोशल मीडिया पर मुख्य न्यायाधीश के इस्तीफ़े की मांग की निंदा की।

पत्रकार और डीवाईएफआई

पत्रकारों के दो संगठनों, फ्री स्पीच कलेक्टिव और नेटवर्क ऑफ़ विमेन इन मीडिया, इंडिया का कहना है कि 10 और 11 अक्टूबर को प्रेस कार्ड दिखाने के बावजूद पत्रकारों को हिरासत में लिया गया और घसीटा गया। फ्री स्पीच कलेक्टिव की याचिका कहती है, “किसी पत्रकार पर बल प्रयोग भीड़ नियंत्रण का कोई आनुषंगिक नतीजा नहीं है।” वह प्रदर्शनों में प्रेस के साथ पुलिस के बर्ताव के लिए बाध्यकारी दिशानिर्देश चाहता है।

राज्यसभा सांसद और डेमोक्रेटिक यूथ फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (डीवाईएफआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए.ए. रहीम का कहना है कि 11 अक्टूबर को कनॉट प्लेस से उठाए गए डीवाईएफआई सदस्यों को पर्दे लगी खिड़कियों वाले वाहनों में करीब सात घंटे रखा गया, उनसे मारपीट हुई, और बिना गिरफ़्तारी मेमो के सूरजमल स्टेडियम में छोड़ा गया। उन्होंने कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है।

मंगलवार को क्या होगा

मंगलवार को केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त और दिल्ली मेट्रो प्रमुख के ख़िलाफ़ अवमानना याचिका भी आनी है, साथ ही मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़ी याचिकाएं भी। मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया है कि राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के दूसरे नेताओं की सोमवार को दायर नई याचिका, जिसमें सभी राज्यों में एसआईआर रोकने की मांग है, इन लंबित मामलों के साथ सुनी जा सकती है।